सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- संयम और बोलने का समय: न्यायमूर्ति नागरत्ना ने युवा वकील को समझाते हुए कहा:“वकील साहब, आप अभी बहुत युवा हैं। आपको पता होना चाहिए कि कब बोलना है और कब नहीं बोलना है। हमने आपके खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं किया है। आप किसी वरिष्ठ वकील को इस तरह ‘पूरी तरह गलत’ नहीं कह सकते।”
- वरिष्ठों के अधीन प्रशिक्षण का महत्व: पीठ ने वकालत के घटते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा:“आज हमें बताया जाता है कि कुछ युवा बिना किसी प्रशिक्षण के अपना खुद का दफ्तर शुरू कर रहे हैं। यह सचमुच अच्छा नहीं है। जब तक आप किसी सीनियर के साथ ट्रेनिंग नहीं करेंगे, आपको वकालत की असली बारीकियां और तरकीबें समझ नहीं आएंगी। युवा महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन उनके सौम्य कौशल (Soft Skills) कहां हैं? हर दिन वरिष्ठों से सीखना पड़ता है।”
- पुराने दिनों का अनुभव: न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि वे सख्त जजों की अदालतों में जाकर बैठती थीं ताकि वहां के माहौल को समझ सकें और यह सीख सकें कि कठिन सवालों के जवाब कैसे दिए जाते हैं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों में पारंपरिक अदालती प्रशिक्षण (Traditional Legal Training), अदालती शिष्टाचार (Court Decorum) और पेशेवर आचरण (Professional Etiquette) में आ रही गिरावट पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ‘पूजा एंटरटेनमेंट इंडिया लिमिटेड बनाम टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड एवं अन्य’ मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणियां कीं। अदालत ने युवा वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के प्रति संयमित भाषा का उपयोग करने और अदालती कार्यवाही को देखकर सीखने की सलाह दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि वकालत का पेशा केवल डिग्री या ‘हार्डवेयर’ हासिल करने तक सीमित नहीं है; इसमें सॉफ्ट स्किल्स, धैर्य और तर्कों की प्रस्तुति की गरिमा अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे केवल वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मार्गदर्शन में ही सीखा जा सकता है।
शीर्ष अदालत की प्रमुख मौखिक टिप्पणियां एवं नसीहत
1. ‘सॉफ्ट स्किल्स कहाँ हैं? हमें बार के भविष्य की चिंता है’
अदालत में एक युवा वकील द्वारा वरिष्ठ वकील की दलीलों पर आक्रामक टिप्पणी करने पर न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने कहा: “आजकल हमें बताया जाता है कि कुछ युवा वकील बिना किसी वरिष्ठ के अधीन प्रशिक्षण लिए सीधे अपना स्वतंत्र कार्यालय शुरू कर रहे हैं। यह बिल्कुल अच्छा चलन नहीं है। जब तक आप किसी सीनियर के साथ प्रशिक्षण नहीं लेंगे, तब तक आप वकालत के वास्तविक कौशल और इस पेशे के गुर नहीं सीख पाएंगे; आप केवल भ्रमित रहेंगे। हम जानते हैं कि आज के युवा बेहद महत्वाकांक्षी हैं। लेकिन सीनियर्स के साथ काम किए बिना आप इस पेशे की सूक्ष्म बारीकियों (Niceties of the profession) को नहीं समझ सकते। आजकल युवा इतने महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन सॉफ्ट स्किल्स कहाँ हैं? आपके पास हार्डवेयर हो सकता है, लेकिन सॉफ्ट स्किल्स आपको हर दिन विकसित करनी होती हैं। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी सीनियर्स से ही स्थानांतरित होता है। हमें बार के भविष्य को लेकर गहरी चिंता है।”
2. अदालती मर्यादा और वरिष्ठों के प्रति आदर का पाठ
- जब युवा वकील ने वरिष्ठ वकील के तर्कों को बीच में टोकते हुए “पूरी तरह गलत” (Absolutely wrong) कहा, तो न्यायमूर्ति नागरत्ना ने तुरंत टोकते हुए कहा:“मिस्टर वकील, आप अभी बहुत युवा हैं। आपको यह भली-भांति पता होना चाहिए कि कब बोलना है और कब शांत रहना है। हमने अभी आपके खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं किया है। आप एक वरिष्ठ अधिवक्ता से इस लहजे में ‘पूरी तरह गलत’ जैसी भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते।”
3. सख्त जजों की अदालतों में बैठकर सीखने का निजी अनुभव
- न्यायमूर्ति नागरत्ना ने वकालत के अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए साझा किया कि कैसे अदालती कक्षों में बैठकर प्रक्रिया देखना युवा वकीलों के लिए सबसे बड़ी पाठशाला हुआ करता था:“जब हम युवा थे, तो हमारे पास कभी-कभार ही कोई एक मामला या कोई मेंशनिंग होती थी। उसके बाद हम अदालत के कमरों में जाकर बैठते थे, विशेषकर उन जजों की अदालतों में जो बहुत सख्त (Tough judges) माने जाते थे, ताकि हम उस सख्ती के आदी हो सकें। इसका फायदा यह होता था कि अगली बार जब आपका मुकदमा उस बेंच के सामने आता, तो आप पहले से जानते थे कि जज के सवालों का किस गरिमा और तरीके से जवाब देना है।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (कॉपीराइट विवाद)
- मूल विवाद: यह मामला हिंदी फिल्म ‘हाय जवानी तो इश्क होना है’ में ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ गानों के कॉपीराइट विवाद से जुड़ा था।
- बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने पाया था कि पूजा एंटरटेनमेंट ने पहले बिहार की एक दीवानी अदालत में ऐसी ही कार्यवाही शुरू की थी, जिससे ‘फोरम शॉपिंग’ (Forum Shopping) का संदेह पैदा हुआ।
- सुप्रीम कोर्ट का रुख: * शीर्ष अदालत ने पाया कि अंतरिम राहत की अर्जियां पहले से ही बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं।
- अदालत ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को बंद करते हुए हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह लंबित अंतरिम आवेदनों पर यथाशीघ्र निर्णय ले।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: पूजा एंटरटेनमेंट इंडिया लिमिटेड बनाम टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड एवं अन्य [विशेष अनुमति याचिका (सिविल) – सर्वोच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) की धारा 49(1)(c) (बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अधिवक्ताओं के लिए व्यावसायिक नैतिकता और शिष्टाचार के मानक); कॉपीराइट अधिनियम, 1957; भारत का संविधान – अनुच्छेद 136
- संबद्ध नैतिक नियम: बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स (अध्याय II – वकीलों का अदालतों और सहयोगियों के प्रति कर्तव्य) — ‘अदालत और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के प्रति सम्मानजनक भाषा और गरिमापूर्ण आचरण बनाए रखना प्रत्येक अधिवक्ता का विधिक दायित्व है।’
- पीठ: न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह (सर्वोच्च न्यायालय)
Young Advocate: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस ए.जी. मसीह |
| मूल विवाद | ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ गानों के कॉपीराइट विवाद को लेकर फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ की रिलीज पर रोक |
| मुख्य मुद्दा | कोर्ट में बहस के दौरान युवा वकील का अमर्यादित आचरण |
| कोर्ट की टिप्पणी | युवा वकीलों को वरिष्ठों से वकालत के तरीके और सॉफ्ट स्किल्स सीखने चाहिए। |

