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Judge Abuse: द्वारका कोर्ट की न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवांगी मंगला को खुले कोर्ट में धमकी…पढ़ें पूरा मामला

Judge Abuse: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट(एनआई एक्ट) शिवांगी मंगला को खुले कोर्ट में 63 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक राज सिंह ने कहा, ‘तू है क्या चीज… बाहर मिल, देखता हूं कैसे जिंदा घर जाती है।

दो अप्रैल को कोर्ट रूम में हुई थी घटना

यह घटना दो अप्रैल को दिल्ली की द्वारका कोर्ट जिला अदालत में एनआई एक्ट-5 की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी मंगला की अदालत में घटित हुई। उस वक्त अदालत परिसर में सनसनी फैल गई। विंटेज क्रेडिट एंड लिजिंग प्राइवेट लिमिटेड बनाम राज सिंह के बीच चेक बाउंस मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी सरकारी शिक्षक राज सिंह और उसके वकील अतुल कुमार ने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट(एनआई एक्ट) शिवांगी मंगला को खुले कोर्ट में गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। आरोपी ने मजिस्ट्रेट पर सामान फेंकने की कोशिश की और अपने वकील से कहा कि किसी भी तरह से उसके पक्ष में फैसला करवाया जाए। बाद में आरोपी और वकील के अभद्र व्यवहार को कोर्ट ने 2 अप्रैल के आदेश में दर्ज कर लिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवांगी मंगला ने आरोपी को चेक बाउंस के मामले में दोषी ठहराया था।

जज बाेलीं- मैं हर हाल में न्याय के पक्ष में खड़ी हूं, धमकी पर कदम उठाऊंगी…

मजिस्ट्रेट शिवांगी मंगला ने अपने आदेश में कहा कि वे आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग, दिल्ली में शिकायत करेंगी। उन्होंने लिखा, ‘मैं हर परिस्थिति में न्याय के पक्ष में खड़ी हूं और आरोपी द्वारा दी गई धमकी और उत्पीड़न के खिलाफ उचित कदम उठाऊंगी।’ जज ने आदेश में यह भी लिखा कि दोषी और उसके वकील ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया। उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया। आदेश में आगे लिखा गया, “फिर दोनों ने मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूँ, और आरोपी को बरी कर दूँ, नहीं तो वे मेरे खिलाफ शिकायत करेंगे और जबरन मेरा इस्तीफा करवाएंगे।”

यह रहे दो अप्रैल के आदेश में जज की टिप्पणी

2 अप्रैल के आदेश में, न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी मंगल ने दर्ज किया कि उन्होंने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) के तहत दोषी ठहराया, जिसके बाद आरोपी “गुस्से से फट पड़ा और खुली अदालत में न्यायाधीश से सवाल करने लगा कि सजा कैसे सुनाई जा सकती है। आदेश में लिखा है कि आरोपी ने अनौपचारिक और अपमानजनक हिंदी भाषा में न्यायाधीश की मां के बारे में अपशब्द कहे और न्यायाधीश को खुलेआम परेशान किया। आरोपी के हाथ में कोई वस्तु भी थी, जिसे वह न्यायाधीश पर फेंकने की कोशिश कर रहा था, और उसने अपने वकील को आदेश दिया कि किसी भी तरह से उसके पक्ष में निर्णय करवाएं। आदेश में यह भी कहा गया कि दोषी और उसका वकील दोनों ने न्यायाधीश को परेशान किया।

कोर्ट ने वकील को शोकॉज किया

कोर्ट ने आरोपी के वकील अतुल कुमार को शोकॉज किया है। पूछा कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला भेजा जाए। इसके बाद मामले को 5 अप्रैल को सजा सुनाने के लिए सूचीबद्ध किया गया।

दोषी को सजा व वकील की अनुचित हरकत की शिकायत

5 अप्रैल को दोपहर 2 बजे अधिवक्ता अतुल कुमार अदालत में उपस्थित हुए। बताया कि दोषी एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं, जो पेंशन पर जीवन यापन करते हैं और उनके तीन आश्रित पुत्र हैं। इसके बाद अदालत ने दोषी को 1.10 साल की सजा सुनाई और ₹6.65 लाख का जुर्माना लगाया। दोषी ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए याचिका दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। दोषी और उसके वकील की अनुचित हरकतों के बारे में अदालत ने कहा, इस मामले को जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दक्षिण-पश्चिम, द्वारका के पास भेजा जाए ताकि इसे दिल्ली उच्च न्यायालय में भेजा जा सके और 2 अप्रैल के आदेश के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई की जा सके।

यह है धारा 138 – नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act)

यह धारा चेक बाउंस से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति किसी को भुगतान के लिए चेक देता है और बैंक में वह चेक अपर्याप्त धनराशि या अन्य कारणों से बाउंस हो जाता है, तो यह एक दंडनीय अपराध बनता है।
इसमें आरोपी को 2 साल तक की सजा या जुर्माना (चेक की राशि से दोगुना तक) या दोनों हो सकते हैं।

यह है न्यायालय में अनुशासन और अवमानना

अदालत में जज को डराना, गाली देना, या धमकाना, अदालत की अवमानना (Contempt of Court) मानी जाती है। यह अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाता है, और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालता है। इस मामले में आरोपी और उसके वकील दोनों ने अनुचित व्यवहार किया। इसलिए जज ने इसे दिल्ली उच्च न्यायालय को रेफर करने का निर्णय लिया ताकि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई हो सके।

जज करेगी राष्ट्रीय महिला आयोग से शिकायत

जज एक महिला हैं और उन्हें लैंगिक गालियों का सामना करना पड़ा। इसलिए उन्होंने आरोपी के खिलाफ National Commission for Women (NCW) में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है।

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