HomeSupreme CourtDomestic Violence: तीन शादियां कीं और पहली पत्नी को लाठियों से पीटा?…...

Domestic Violence: तीन शादियां कीं और पहली पत्नी को लाठियों से पीटा?… क्या कोई जानवर की तरह पत्नी को पीटता है, पूरा केस पढ़ें

Domestic Violence: सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में आरोपी पति की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज करते हुए अत्यंत कड़ी मौखिक टिप्पणी की है।

पहली पत्नी को शराब के नशे में जमीन पर पटकने का आरोप

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी को नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि एक पति अपनी पत्नी के साथ जानवरों जैसा व्यवहार नहीं कर सकता और वह सम्मान की हकदार है। यह मामला एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिस पर अपनी पहली पत्नी को शराब के नशे में जमीन पर पटकने, ईंट से मारने और लाठी से पीटने का आरोप है।

“जानवरों जैसा व्यवहार क्यों?”

सुनवाई के दौरान जब आरोपी के वकील ने दलीलें पेश कीं, तो पीठ ने कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस वराले की टिप्पणी, “कोई कारण नहीं है कि पत्नी के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाए। वहीं, जस्टिस अरविंद कुमार का सवाल, “आप अपनी पत्नी को क्यों मारना चाहते हैं? आपके पास पहले से ही तीन पत्नियां हैं, अगर आप ऐसे ही मारते रहे तो यह लड़की भी आपको छोड़ देगी। कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी ने न केवल शारीरिक हिंसा की, बल्कि तीन शादियाँ करने के बावजूद पहली पत्नी को गुजारा भत्ता (Expenses) तक नहीं दिया।

एक दिलचस्प किस्सा: “शनिवार की हिंसा”

  • जस्टिस अरविंद कुमार ने कानूनी सहायता (Legal Aid) के दौरान किए गए एक प्रयोग का एक वास्तविक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि अक्सर शनिवार को दो अलग-अलग थानों में एक साथ दो मामले दर्ज होते थे।
  • पहला मामला: पत्नी शिकायत करती थी कि शनिवार को साप्ताहिक मजदूरी मिलने के बाद पति शराब पीकर उसे पीटता है।
  • दूसरा मामला: पति शिकायत करता था कि पत्नी उसे पीट रही है। पत्नी का तर्क होता था— “तुम शराब पीते हो मुझे समस्या नहीं, लेकिन शराब पीकर मुझे छुओ मत।”इस किस्से के माध्यम से कोर्ट ने समाज में व्याप्त शराब और घरेलू हिंसा के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला।

कानूनी संदर्भ: BNS की नई धाराएं

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। इनमें धारा 126(2) के तहत गलत तरीके से रोकना (Wrongful restraint), धारा 115(2) में स्वेच्छा से चोट पहुँचाना, धारा 85 में पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता (पूर्व की धारा 498A IPC के समान), धारा 353 के तहत आपराधिक बल का प्रयोग।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
कोर्ट का आदेशअग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज।
आरोपशराब के नशे में पत्नी को ईंट और लाठी से पीटना।
पारिवारिक स्थितिआरोपी की तीन शादियाँ (कथित तौर पर)।
न्यायाधीशजस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले।
मुख्य संदेशवैवाहिक संबंधों में गरिमा (Dignity) अनिवार्य है; हिंसा के लिए कोई जगह नहीं।

सम्मान का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि न्यायपालिका वैवाहिक क्रूरता के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है। पत्नी के साथ शारीरिक हिंसा करना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा का हनन है। कोर्ट ने आरोपी को साफ कह दिया कि यदि उसे राहत चाहिए, तो उसे सरेंडर कर नियमित जमानत की प्रक्रिया का पालन करना होगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
few clouds
34 ° C
34 °
34 °
40%
3.6m/s
20%
Mon
38 °
Tue
39 °
Wed
40 °
Thu
40 °
Fri
38 °

Recent Comments