Saturday, June 27, 2026
HomeLaworder HindiJudge's Selection: जज भर्ती को चुनौती…क्या असफल उम्मीदवार सवाल नहीं उठा सकते,...

Judge’s Selection: जज भर्ती को चुनौती…क्या असफल उम्मीदवार सवाल नहीं उठा सकते, पढ़िए हाईकोर्ट ने मामले पर क्या कहा

Judge’s Selection: मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस अनीता सुमंत और जस्टिस मुम्मिनैनी सुधीर कुमार की खंडपीठ ने 2013 की जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) भर्ती को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
भर्ती का वर्ष2013 (नियुक्ति 2014 में हुई)।
विवाद का विषय7 साल की वकालत का अनुभव और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता।
कोर्ट का निर्णययाचिकाएं खारिज; चयन समिति के निर्णय को बरकरार रखा गया।
मुख्य टिप्पणीअस्पष्ट आरोपों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता।
निर्देशयाचिकाकर्ताओं के सुझावों को भविष्य की भर्तियों के लिए उचित समिति के सामने रखने का निर्देश।

जिला न्यायाधीशों की भर्ती प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने मई 2026 में जिला न्यायाधीशों (District Judges) की भर्ती प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि चयन समिति (Selection Committee) द्वारा उम्मीदवारों के मूल्यांकन में तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, जब तक कि प्रक्रिया में कोई गंभीर और ठोस गड़बड़ी न दिखाई दे। कोर्ट ने कहा कि केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर वरिष्ठ न्यायाधीशों वाली चयन समिति के विवेक पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।यह मामला 2013 में जारी एक अधिसूचना से जुड़ा है, जिसके तहत 23 जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई थी। असफल उम्मीदवारों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और कुछ चयनित उम्मीदवारों की ‘7 साल की वकालत’ की पात्रता (Eligibility) पर सवाल उठाए थे।

अनुभव का प्रमाण: “वकालत की गुणवत्ता बनाम अवधि”

  • याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि दो चयनित उम्मीदवारों ने पर्याप्त संख्या में ‘वकालतनामा’ (Vakalats) दाखिल नहीं किए थे और वे नियमित रूप से कोर्ट नहीं आते थे।
  • अधिसूचना की शर्तें: 2013 की अधिसूचना में केवल संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) से ‘अनुभव प्रमाण पत्र’ की मांग की गई थी।
  • दस्तावेजी अनुपालन: चयनित उम्मीदवारों ने वह प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था जिसे अधिसूचना में मांगा गया था। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति के वर्षों बाद अब उन पर वकालत की “गुणवत्ता” (Quality of Practice) के नए मानक नहीं थोपे जा सकते।
  • भविष्य के सुधार: कोर्ट ने माना कि भविष्य की भर्तियों (जैसे 2023 की अधिसूचना) में मानकों को और सख्त किया गया है, लेकिन 2013 के मामले को उस समय की शर्तों के आधार पर ही परखा जाएगा।

चयन समिति की गरिमा

  • अदालत ने चयन प्रक्रिया में शामिल वरिष्ठ न्यायाधीशों की विशेषज्ञता पर भरोसा जताया।
  • विशेषज्ञता: जिला जजों का चयन हाई कोर्ट के तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति द्वारा किया जाता है। वे प्रश्नपत्र तैयार करने और ‘वाइवा-वोस’ (Viva-voce) के दौरान उम्मीदवारों की योग्यता परखने के लिए काफी प्रयास करते हैं।
  • अहस्तक्षेप का सिद्धांत: जब तक किसी गंभीर कदाचार या स्पष्ट अवैधता का प्रमाण न हो, कोर्ट चयन समिति के विवेक में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

असफल उम्मीदवारों का आचरण

कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पूरी तरह शामिल हुए और बाद में असफल रहे, उन्हें केवल इसलिए प्रक्रिया को ‘दोषपूर्ण’ बताने का अधिकार नहीं है क्योंकि वे सफल नहीं हो सके।

न्यायिक नियुक्तियों में स्थिरता

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला न्यायिक नियुक्तियों में स्थिरता सुनिश्चित करता है। यह स्पष्ट करता है कि एक बार जब योग्य उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो जाता है और वे वर्षों तक सेवा कर लेते हैं, तो पुरानी शर्तों की व्याख्या को लेकर दी गई चुनौतियों का कोई कानूनी आधार नहीं रह जाता।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
39.6 ° C
39.6 °
39.6 °
29 %
3.3kmh
59 %
Sat
39 °
Sun
44 °
Mon
43 °
Tue
36 °
Wed
32 °

Recent Comments