Thursday, September 24, 2026
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SC News: आंध्र प्रदेश सरकार ओडिशा सरकार की तरह क्यों नहीं करते? माओवादी नेता के समर्पण मामले में यह दी सलाह

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से पूछा कि क्या वह माओवादी नेता दुना केशव राव उर्फ आज़ाद, जिन्होंने 2011 में आत्मसमर्पण किया था, के मुकदमे के लिए विशेष अदालतें स्थापित कर सकती है।

अपराधों से संबंधित दर्जनों से अधिक मामले लंबित

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को ओडिशा सरकार के वकील ने बताया कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है कि राव के मुकदमे के लिए तीन जिलों में विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी और इस संबंध में अगले दो हफ्तों में अधिसूचना जारी होने की संभावना है। आंध्र प्रदेश सरकार के वकील ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राव के खिलाफ राज्य में हत्या जैसे अपराधों से संबंधित दर्जनों से अधिक मामले लंबित हैं।

18 मई 2011 को हैदराबाद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था

पीठ ने आंध्र प्रदेश सरकार के वकील से कहा, आप भी ओडिशा सरकार की तरह क्यों नहीं करते? इन मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने पर विचार करें। राव की ओर से पेश अधिवक्ता मोहम्मद इर्शाद हनीफ ने कहा कि आंध्र प्रदेश पुलिस ने इन मामलों में उनके मुवक्किल को अभी तक गिरफ्तार भी नहीं किया है, जिनका अब जिक्र किया जा रहा है। कभी ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सक्रिय सबसे खतरनाक माओवादी कमांडरों में गिने जाने वाले राव सीपीआई (माओवादी) ओडिशा राज्य आयोजन समिति के सदस्य थे। उन्होंने 18 मई 2011 को हैदराबाद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

राव को 10 मामलों में बरी किया जा चुका

राव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें एक के बाद एक झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है और ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश सरकारों को उनके साथ किए गए वादे का पालन करना चाहिए था कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सामान्य जीवन जीने की अनुमति दी जाएगी। ओडिशा सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राव को 10 मामलों में बरी किया जा चुका है, जबकि 37 मामले अब भी लंबित हैं। 20 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी कर दोनों सरकारों से जवाब मांगा था। बाद में ओडिशा पुलिस ने राव को हिरासत में लिया, जिसे राव ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा उनके विश्वासघात और भरोसे के उल्लंघन के रूप में बताया, क्योंकि उन्होंने राज्य की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण किया था।

झूठे मामलों में आरोपी को फंसाया गया

राव ने शीर्ष अदालत को बताया, याचिकाकर्ता ने आंध्र प्रदेश सरकार के समक्ष यह आशा लेकर आत्मसमर्पण किया था कि उसे समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा। लेकिन उसका सपना उस समय चकनाचूर हो गया जब औपचारिक पूछताछ के बहाने उसे ओडिशा लाया गया और कई झूठे मामलों में फंसा दिया गया। याचिकाकर्ता को बार-बार झूठे मामलों में फंसाकर अनिश्चितकाल के लिए जेल में रखने की साजिश रची जा रही है। राव की याचिका में दोनों राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सभी लंबित मामलों का छह महीने के भीतर समयबद्ध तरीके से निपटारा करें। उन्होंने यह भी मांग की है कि सभी आपराधिक मामलों को एक ही अदालत, अधिमानतः ओडिशा के भुवनेश्वर में, स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि मुकदमों का प्रभावी और सुचारू रूप से निपटारा हो सके।

आरोपी के खिलाफ 14 और आपराधिक मामले दर्ज किए

राव ने कहा कि ओडिशा सरकार ने पिछले वर्ष उसके खिलाफ 14 और आपराधिक मामले दर्ज किए हैं, जो प्रक्रिया का दुरुपयोग और एक नागरिक के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। राव ने अपनी याचिका में कहा, “उत्तरदाता संख्या 2 यानी आंध्र प्रदेश राज्य, जिसे याचिकाकर्ता ने आत्मसमर्पण किया था, ने उसे बिना वारंट के और बिना स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए, उत्तरदाता संख्या 1 यानी ओडिशा राज्य के हवाले कर दिया, जिससे याचिकाकर्ता के विश्वास और भरोसे को तोड़ा गया।

याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया था

याचिका में यह भी कहा गया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने आत्मसमर्पण के लिए याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया था, लेकिन याचिकाकर्ता को यह अनुमान नहीं था कि उसे 14 वर्षों से अधिक समय तक हिरासत में रहना पड़ेगा। राव ने आरोप लगाया कि ओडिशा पुलिस ने उसे विभिन्न झूठे आरोपों के आधार पर मामलों में फंसा दिया। उन्होंने कहा, यह उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति की मूल भावना और उद्देश्य तब विफल हो जाते हैं जब याचिकाकर्ता जैसे लोग झूठे मामलों में फंसे रहते हैं और अनिश्चितकाल तक जेल में बंद रहते हैं, जिससे हिंसा छोड़ने पर विचार कर रहे अन्य युवाओं में गलत संदेश जाता है।

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