Friday, October 2, 2026
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SC News: सहमति से बने रिश्ते के बिगड़ने पर दुष्कर्म की धाराएं नहीं… शादी का झूठा वादा साबित नहीं होता

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर कोई सहमति से बना रिश्ता बाद में बिगड़ जाए या दोनों पार्टनर एक-दूसरे से दूर हो जाएं, तो यह आपराधिक मामला दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता।

जुलाई 2023 में दर्ज एक दुष्कर्म केस को खारिज

यह टिप्पणी कोर्ट ने महाराष्ट्र के सतारा में जुलाई 2023 में दर्ज एक दुष्कर्म केस को खारिज करते हुए दी। इस केस में एक महिला ने युवक पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना न सिर्फ अदालतों पर बोझ बढ़ाता है, बल्कि आरोपी की पहचान पर भी दाग लगाता है।

सिर्फ शादी के वादे पर ही संबंध बने थे, ऐसा नहीं: कोर्ट

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि एफआईआर में दर्ज आरोपों को सही मान भी लें, तब भी यह नहीं लगता कि महिला की सहमति उसकी मर्जी के खिलाफ ली गई थी या सिर्फ शादी के वादे पर ही संबंध बने थे। कोर्ट ने कहा, “यह मामला ऐसा नहीं लगता जिसमें शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया गया हो। सहमति से बना रिश्ता अगर बाद में बिगड़ जाए, तो यह राज्य की आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हर बार शादी का वादा टूटने को दुष्कर्म मानना और आरोपी पर केस चलाना एक बड़ी भूल है। इससे कानून का दुरुपयोग होता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटा

यह फैसला उस अपील पर आया, जिसमें आरोपी युवक ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जून 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। युवक ने रेप समेत अन्य धाराओं में दर्ज केस को रद्द करने की मांग की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि जून 2022 से जुलाई 2023 के बीच युवक ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। हालांकि, युवक ने सभी आरोपों से इनकार किया था।

प्यार में थे दोनों, महिला पहले से शादीशुदा थी

कोर्ट ने पाया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद युवक को अगस्त 2023 में अग्रिम जमानत मिल गई थी। जांच में सामने आया कि दोनों जून 2022 से एक-दूसरे को जानते थे और महिला ने खुद माना कि वे अक्सर मिलते थे और प्यार में थे।कोर्ट ने यह भी बताया कि महिला ने 29 दिसंबर 2022 को अपने पहले पति से ‘खुला’ (मुस्लिम महिलाओं द्वारा पति को तलाक देने की प्रक्रिया) लिया था। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि वह पहले से शादीशुदा होते हुए भी सिर्फ शादी के वादे पर किसी और से शारीरिक संबंध बनाए।

महिला का व्यवहार भी संदेहास्पद

कोर्ट ने कहा कि महिला बिना बताए युवक के गांव पहुंच गई थी, जो उसके मानसिक तनाव और असंतुलन को दर्शाता है। इससे लगता है कि केस दर्ज करने के पीछे कोई निजी नाराजगी या उद्देश्य हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि एक चार साल के बच्चे की मां और पहले से शादीशुदा महिला का इतने लंबे समय तक किसी व्यक्ति के साथ संबंध बनाए रखना, यह मानना मुश्किल है कि वह लगातार धोखा खा रही थी।

25 साल का है युवक, भविष्य को देखते हुए राहत

कोर्ट ने कहा कि आरोपी युवक की उम्र सिर्फ 25 साल है और उसका पूरा जीवन अभी बाकी है। ऐसे में उसके खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया चलाना न्याय के हित में नहीं होगा। इसलिए कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए केस को इसी स्तर पर खत्म कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर कोई सहमति से बना रिश्ता बाद में बिगड़ जाए या दोनों पार्टनर एक-दूसरे से दूर हो जाएं, तो यह आपराधिक मामला दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता।

जुलाई 2023 में दर्ज एक दुष्कर्म केस को खारिज

यह टिप्पणी कोर्ट ने महाराष्ट्र के सतारा में जुलाई 2023 में दर्ज एक दुष्कर्म केस को खारिज करते हुए दी। इस केस में एक महिला ने युवक पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना न सिर्फ अदालतों पर बोझ बढ़ाता है, बल्कि आरोपी की पहचान पर भी दाग लगाता है।

सिर्फ शादी के वादे पर ही संबंध बने थे, ऐसा नहीं: कोर्ट

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि एफआईआर में दर्ज आरोपों को सही मान भी लें, तब भी यह नहीं लगता कि महिला की सहमति उसकी मर्जी के खिलाफ ली गई थी या सिर्फ शादी के वादे पर ही संबंध बने थे। कोर्ट ने कहा, “यह मामला ऐसा नहीं लगता जिसमें शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया गया हो। सहमति से बना रिश्ता अगर बाद में बिगड़ जाए, तो यह राज्य की आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हर बार शादी का वादा टूटने को दुष्कर्म मानना और आरोपी पर केस चलाना एक बड़ी भूल है। इससे कानून का दुरुपयोग होता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटा

यह फैसला उस अपील पर आया, जिसमें आरोपी युवक ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जून 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। युवक ने रेप समेत अन्य धाराओं में दर्ज केस को रद्द करने की मांग की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि जून 2022 से जुलाई 2023 के बीच युवक ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। हालांकि, युवक ने सभी आरोपों से इनकार किया था।

प्यार में थे दोनों, महिला पहले से शादीशुदा थी

कोर्ट ने पाया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद युवक को अगस्त 2023 में अग्रिम जमानत मिल गई थी। जांच में सामने आया कि दोनों जून 2022 से एक-दूसरे को जानते थे और महिला ने खुद माना कि वे अक्सर मिलते थे और प्यार में थे।कोर्ट ने यह भी बताया कि महिला ने 29 दिसंबर 2022 को अपने पहले पति से ‘खुला’ (मुस्लिम महिलाओं द्वारा पति को तलाक देने की प्रक्रिया) लिया था। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि वह पहले से शादीशुदा होते हुए भी सिर्फ शादी के वादे पर किसी और से शारीरिक संबंध बनाए।

महिला का व्यवहार भी संदेहास्पद

कोर्ट ने कहा कि महिला बिना बताए युवक के गांव पहुंच गई थी, जो उसके मानसिक तनाव और असंतुलन को दर्शाता है। इससे लगता है कि केस दर्ज करने के पीछे कोई निजी नाराजगी या उद्देश्य हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि एक चार साल के बच्चे की मां और पहले से शादीशुदा महिला का इतने लंबे समय तक किसी व्यक्ति के साथ संबंध बनाए रखना, यह मानना मुश्किल है कि वह लगातार धोखा खा रही थी।

25 साल का है युवक, भविष्य को देखते हुए राहत

कोर्ट ने कहा कि आरोपी युवक की उम्र सिर्फ 25 साल है और उसका पूरा जीवन अभी बाकी है। ऐसे में उसके खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया चलाना न्याय के हित में नहीं होगा। इसलिए कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए केस को इसी स्तर पर खत्म कर दिया।

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