Wednesday, September 30, 2026
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V. Sripathy: तमिलनाडु के आदिवासी गांव की वी. श्रीपथी कैसे बनीं राज्य की सबसे युवा जज…प्रसव के ठीक 48 घंटे बाद 200 किमी का सफर किया

V. Sripathy: तमिलनाडु के आदिवासी गांव की वी. श्रीपथी ने यह बता दिया कि हौसले अगर बुलंद हों, तो प्रसव (Childbirth) की शारीरिक पीड़ा, घने जंगलों की भौगोलिक दूरियां और समाज के पारंपरिक बंधन भी आपका रास्ता नहीं रोक सकते।

एम्बुलेंस ड्राइवर पति के साथ V. Sripathy ने 200 किलोमीटर का सफर तय किया

नवजात बेटी को जन्म देने के महज तमिलनाडु की वी. श्रीपथी (V. Sripathy) दो दिन (48 घंटे) बाद, टांके और शारीरिक दर्द की परवाह किए बिना एक एम्बुलेंस ड्राइवर पति के साथ 200 किलोमीटर का सफर तय किया ताकि वह सिविल जज की परीक्षा दे सकें। आज उनकी यह तपस्या रंग लाई है और वह तमिलनाडु की सबसे युवा आदिवासी सिविल जज बनकर इतिहास रच चुकी हैं। उनकी कहानी सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण पेश कर रही है। श्रीपथी की यह कामयाबी सिर्फ एक विधिक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश के सुदूर ग्रामीण और जनजातीय इलाकों की उन करोड़ों बेटियों के लिए एक मशाल है जो जल्दी शादी और मातृत्व के बाद अपने सपनों को दफन कर देती हैं।

रिजर्व फॉरेस्ट के कच्चे रास्तों से येलागिरी की पहाड़ियों तक का सफर

V. Sripathy का जन्म तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के एक बेहद पिछड़े और दुर्गम आदिवासी गांव थुविन्जीकुप्पम (Thuvinjikuppam) में हुआ था। यह गांव रिजर्व फॉरेस्ट (आरक्षित वन) की सीमा के भीतर बसा है, जहां न तो पक्की सड़कें थीं और न ही कोई बुनियादी सुविधाएं। बस पकड़ने के लिए भी ग्रामीणों को 15 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था।

माता-पिता का संघर्ष: V. Sripathy के पिता पेशे से किसान थे और मां गृहणी। अपने तीन बच्चों को बेहतर भविष्य और शिक्षा देने के लिए इस गरीब परिवार ने अपना पैतृक गांव छोड़ दिया और वे येलागिरी पहाड़ियों के ‘अथानावूर’ गांव में आकर बस गए।

मेधावी छात्रा: V. Sripathy ने विज्ञान संकाय (Science Stream) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उनके शिक्षक उन्हें एक शांत, गंभीर और हमेशा औसत से अधिक अंक लाने वाली अनुशासित छात्रा के रूप में याद करते हैं।

कौम की बेबसी देखकर चुना वकालत का रास्ता

V. Sripathy का कानून की पढ़ाई (Law) चुनने का फैसला सिर्फ एक व्यक्तिगत करियर का विकल्प नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सामाजिक टीस थी। बचपन से ही उन्होंने अपने आदिवासी समुदाय (Malayali Tribal Community) के लोगों को छोटी-छोटी विधिक समस्याओं के लिए भटकते और अदालतों के चक्कर काटते देखा था। लोग अपने बुनियादी अधिकारों से भी अनभिज्ञ थे।

V. Sripathy ने तय किया कि वह एक ऐसी अधिकारी बनेंगी जो व्यवस्था की जटिलताओं को सरल बनाकर अपने लोगों को उनके विधिक अधिकार समझा सके और उन्हें न्याय दिला सके। इसी दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने एलएलबी (LLB) की डिग्री पूरी की और सिविल जज परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

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मातृत्व, जल्दी शादी और वो 48 घंटे जिसने इतिहास रच दिया

ग्रामीण भारत की आम लड़कियों की तरह श्रीपथी की शादी भी कम उम्र में हो गई। उनके पति एस. वेंकटेशन (S. Venkatesan) एक एम्बुलेंस ड्राइवर हैं। शादी और ससुराल की ज़िम्मेदारियों के बीच श्रीपथी ने पढ़ाई जारी रखी, जिसमें उनके पति और मायके-ससुराल के परिवारों ने पूरा सहयोग दिया। नवंबर 2023 में उनके जीवन की सबसे कठिन और ऐतिहासिक परीक्षा का समय आया था।

बेटी को जन्म दिया: परीक्षा से ठीक दो दिन पहले V. Sripathy ने एक सुंदर बेटी को जन्म दिया। उनका शरीर अभी पूरी तरह ठीक भी नहीं हुआ था और वह अस्पताल के बेड पर थीं।

200 किलोमीटर का सफर: परीक्षा चेन्नई में थी और उनका गांव वहां से 200 किमी दूर चेंगम के पास था। अपनी नवजात बच्ची को परिवार के भरोसे घर पर छोड़कर, V. Sripathy अपने पति के साथ गाड़ी में बैठीं और दर्द को सहते हुए चेन्नई के परीक्षा केंद्र पहुंचीं।

वायरल तस्वीर के पीछे का सच: परीक्षा केंद्र के बाहर अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लिए V. Sripathy की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी, लेकिन बहुत कम लोग जानते थे कि उस एडमिट कार्ड को हाथ में पकड़ने के लिए इस मां ने शारीरिक और मानसिक रूप से कितना बड़ा त्याग किया था।

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23 साल की उम्र में रचा इतिहास: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने दी बधाई

जब तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) ने सिविल जज परीक्षा के परिणाम घोषित किए, तो इतिहास बन चुका था। महज 23 वर्ष की आयु में V. Sripathy ने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि वह तमिलनाडु के ‘मलयाली’ आदिवासी समुदाय (Malayali Tribal Community) से सिविल जज बनने वाली पहली व्यक्ति बन गईं। इस ऐतिहासिक सफलता की गूंज पूरे राज्य में सुनाई दी।

गांव में जश्न: उनके गृह नगर में ढोल-नगाड़ों, फूलों के हार और एक भव्य विजय जुलूस के साथ इस ‘आदिवासी बेटी’ का स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री की सराहना: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया पर विशेष रूप से पोस्ट साझा करते हुए श्रीपथी के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना की और इसे सामाजिक न्याय की एक बड़ी जीत बताया।

सफलता की रूपरेखा: सिविल जज V. Sripathy (Profile at a Glance)

व्यक्तिगत और सामाजिक श्रेणियांसिविल जज वी. श्रीपथी के जीवन के मुख्य आंकड़े
नामवी. श्रीपथी (V. Sripathy)
उम्र (सफलता के समय)23 वर्ष (तमिलनाडु की सबसे युवा आदिवासी सिविल जज)
मूल समुदाय/जनजातिमलयाली आदिवासी समुदाय (Malayali Tribal Community)
मूल स्थानथुविन्जीकुप्पम (आरक्षित वन क्षेत्र), तिरुवन्नामलाई, तमिलनाडु
पति का पेशाएस. वेंकटेशन (एम्बुलेंस ड्राइवर)
सबसे बड़ी चुनौतीप्रसव (Childbirth) के ठीक 48 घंटे बाद नवजात को छोड़कर 200 किमी दूर परीक्षा देने जाना।
प्रेरणा का स्रोतअपने आदिवासी समाज को कानूनी रूप से सशक्त बनाना और अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
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