Thursday, October 1, 2026
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E-Court Portal: ई-कोर्ट स्टेटस और स्थगन आदेशों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती….कोर्ट की सख्ती जानने के लिए पूरा फैसला पढ़ लीजिए

E-Court Portal: मद्रास हाईकोर्ट ने अदालती प्रक्रियाओं और केस मैनेजमेंट को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है।

यह रही खंडपीठ की मामले को लेकर टिप्पणी

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ (Division Bench) ने स्पष्ट किया कि केवल मुकदमों को सूचीबद्ध (List) करने या उन्हें आपस में जोड़ने (Tagging) के नियमित आदेशों से किसी पक्ष के अधिकारों का फैसला नहीं होता, इसलिए इन पर अंतरा-न्यायालय अपील (Intra-Court Appeal) विचारणीय नहीं है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि ई-कोर्ट पोर्टल (e-court portal) पर दर्ज केस स्टेटस प्रविष्टि या किसी मामले में मिलने वाले सामान्य स्थगन आदेश को लेटर्स पेटेंट (Letters Patent) के क्लॉज 15 के तहत ‘निर्णय’ (Judgment) मानकर उसके खिलाफ अपील दायर नहीं की जा सकती।

मामला क्या है?: चिकित्सा भर्ती प्रक्रिया में देरी का विवाद

यह कानूनी विवाद चिकित्सा सेवा भर्ती बोर्ड (MRB) द्वारा की जा रही एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

एकल पीठ का प्रक्रियात्मक आदेश: चिकित्सा भर्ती से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ (Single Judge) ने निर्देश दिया था कि इस मामले को इसी से जुड़ी एक अन्य रिट याचिका के साथ सूचीबद्ध (List) किया जाए।

उम्मीदवारों की अपील: इस प्रक्रियात्मक आदेश के खिलाफ 17 चयनित उम्मीदवारों ने खंडपीठ के समक्ष रिट अपील दायर कर दी। उनका तर्क था कि मामले को दूसरी याचिका के साथ टैग करने से उनकी नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटक गई है, जिससे उन्हें गंभीर वित्तीय और मानसिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने दलील दी कि एकल पीठ को उनके मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए था।

अदालत का प्राथमिक सवाल: खंडपीठ के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या किसी न्यायाधीश द्वारा केस प्रबंधन या सुनवाई टालने के लिए दिए गए प्रशासनिक-न्यायिक निर्देशों को एक अंतिम ‘निर्णय’ माना जा सकता है जिसके खिलाफ अपील की जा सके?

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: क्या हर आदेश ‘निर्णय’ होता है?

मदरास उच्च न्यायालय ने अपील को पूरी तरह से गैर-पोषणीय (Not Maintainable) करार देते हुए खारिज कर दिया और विधिक सिद्धांत प्रतिपादित किए।

निर्णय (Judgment) शब्द का दायरा सीमित है

अदालत ने कहा कि लेटर्स पेटेंट के क्लॉज 15 के तहत केवल उन्हीं आदेशों के खिलाफ अपील हो सकती है जो ‘निर्णय’ की श्रेणी में आते हों। कहा, किसी मामले को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिए गए हर अंतरिम (Interlocutory) या केस-मैनेजमेंट निर्देश को ‘निर्णय’ की परिभाषा में नहीं घसीटा जा सकता। अपील योग्य निर्णय होने के लिए आदेश में अंतिमता (Finality) होनी चाहिए, और उसे पक्षों के मुख्य अधिकारों या दायित्वों को निर्णायक रूप से प्रभावित करना चाहिए।

विरोधाभासी फैसलों को रोकने के लिए टैगिंग जरूरी

खंडपीठ ने माना कि एक जैसे मामलों को एक साथ सुनना न्यायहित में एक सराहनीय कदम है ताकि एक ही विषय पर दो अलग-अलग अदालतों के विरोधाभासी फैसले (Conflicting Pronouncements) न आएं। ऐसे आदेशों से किसी के अधिकारों का हनन नहीं होता और न ही मुकदमा समाप्त होता है।

अपीलों की बाढ़ आने का खतरा

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अदालतों के रोजमर्रा के कामकाज, तारीख तय करने या फाइलिंग से जुड़े आदेशों के खिलाफ भी अपील की अनुमति दी गई, तो इससे अपीलों की बाढ़ आ जाएगी। यह न केवल न्यायिक पदानुक्रम (Hierarchy) को बिगाड़ेगा बल्कि अदालतों के स्वतंत्र कामकाज में भी बाधा डालेगा।

उम्मीदवारों को अपनी बात रखने की छूट

भले ही कोर्ट ने तकनीकी आधार पर अपील खारिज कर दी और भर्ती प्रक्रिया के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उम्मीदवारों के करियर को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उन्हें एक व्यावहारिक राहत दी है। खंडपीठ ने उम्मीदवारों को यह स्वतंत्रता (Liberty) दी है कि वे एकल पीठ के समक्ष जाकर अपने मामले के त्वरित निपटारे (Expeditious Disposal) के लिए अनुरोध कर सकते हैं।

केस मैट्रिक्स: मद्रास हाई कोर्ट का आदेश (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांमद्रास उच्च न्यायालय की विधिक व्यवस्था (2026)
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई (खंडपीठ)
माननीय न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन
केस संदर्भनरेश बनाम प्रधान सचिव (Naresh Vs Principal Secretary)
प्रासंगिक कानून/प्रावधानलेटर्स पेटेंट (Letters Patent) का क्लॉज 15
विवाद का विषयक्या ई-कोर्ट स्टेटस या स्थगन के आदेश के खिलाफ अंतरा-न्यायालय अपील हो सकती है?
याचिकाकर्ताओं के वकीलएडवोकेट एम. ज्ञानशेखर
अदालत का अंतिम निर्णयरिट अपील खारिज। प्रक्रियात्मक आदेशों के खिलाफ अपील विधिक रूप से विचारणीय नहीं है।
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