Monday, August 10, 2026
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District Judge: परीक्षा में फेल होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देना न्यायसंगत नहीं…क्यों नहीं महाराष्ट्र जिला जज मुख्य परीक्षा पर रोक लगी, पढे़ं

District Judge: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में 89 जिला न्यायाधीशों (District Judges) की चल रही भर्ती प्रक्रिया को विधिक राहत देते हुए मुख्य लिखित परीक्षा पर रोक लगाने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।

District Judge भर्ती मामला:आठ वकीलों की याचिका को खारिज

हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अनखाड की खंडपीठ ने(सूरज माने और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) मामले में यह फैसला सुनाया। इस निर्णय से 27 और 28 जून 2026 को होने वाली मुख्य लिखित परीक्षा (Main Written Exam) के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में असफल रहे आठ वकीलों की याचिका को खारिज करते हुए विधिक व्यवस्था दी कि उम्मीदवार नियमों से भली-भांति वाकिफ थे और परीक्षा में फेल होने के बाद वे पूरी चयन प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते।

विवाद का कारण: गैर-अधिसूचित नियम परिवर्तन (Non-Notified Rule Changes)

याचिकाकर्ताओं का तर्क: यह कानूनी विवाद जिला जज भर्ती के नियमों को लेकर शुरू हुआ था। याचिका दायर करने वाले आठ वकीलों ने 10 मई 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा दी थी, लेकिन वे क्वालिफाइंग मार्क्स हासिल करने में असफल रहे। उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर 14 मई के प्रारंभिक परिणामों और भर्ती विज्ञापन को रद्द करने की मांग की। उनका मुख्य विधिक तर्क था कि यह भर्ती ‘महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008’ के उन संशोधनों के आधार पर की जा रही है, जो विज्ञापन जारी होने के समय आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचित (Notified) नहीं थे।

विधिक सिद्धांत ‘खेल के बीच में नियम बदलना’: याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने की तारीख (30 जनवरी) को लागू नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए थी। सरकार की देरी के कारण बाद में अधिसूचित नियमों को पिछली तारीख से लागू करना उम्मीदवारों के साथ पूर्वाग्रह और संविधान का उल्लंघन है।

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हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: “पुराने नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही निरस्त थे”

बॉम्बे हाई कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं और महाधिवक्ता (Advocate General) मिलिंद साठे की दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं के तर्कों को विधिक रूप से खारिज कर दिया।

रेजनीश के.वी. बनाम के. दीपा (सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) का विधिक प्रभाव

अदालत ने स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट के फुल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘रेजनीश के.वी. बनाम के. दीपा और अन्य’ के अनुपालन में इन संशोधनों को मंजूरी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि शीर्ष अदालत के फैसले से असंगत (Inconsistent) सभी मौजूदा नियम स्वतः प्रभावी नहीं रहेंगे।

अदालत का विधिक निष्कर्ष: “हम इस दलील में कोई दम नहीं पाते कि स्वीकृत संशोधनों पर तब तक अमल नहीं किया जा सकता था जब तक कि वे आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित न हो जाएं। पुराने असंगत नियम ‘रेजनीश के.वी.’ मामले के फैसले के बाद पहले ही समाप्त हो चुके थे। 17 जून 2026 की सरकारी अधिसूचना ने केवल इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों के अनुरूप लाने की औपचारिक वैधानिक प्रक्रिया को पूरा किया है।”

विज्ञापन में पहले से ही थी स्पष्ट विधिक सूचना

खंडपीठ ने नोट किया कि 30 जनवरी को जारी विज्ञापन में उम्मीदवारों को स्पष्ट रूप से सूचित किया गया था कि चयन प्रक्रिया ‘महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008’ के संशोधित संस्करण द्वारा विनियमित है, भले ही औपचारिक अधिसूचना बाद में आई हो। उम्मीदवारों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी।

फेल होने के बाद विधिक चुनौती स्वीकार्य नहीं (Estoppel Doctrine)

अदालत ने याचिकाकर्ताओं के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की और विबंध (Estoppel) के विधिक सिद्धांत को दोहराया। याचिकाकर्ता वकीलों ने न तो स्वीकृत संशोधनों की प्रति मांगी और न ही प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने से पहले विज्ञापन को चुनौती दी। विज्ञापन की शर्तों को सचेत रूप से स्वीकार करने, बिना किसी विरोध के चयन प्रक्रिया में भाग लेने और परीक्षा में असफल होने के बाद, याचिकाकर्ता अब उस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते जिसमें उन्होंने खुद प्रतिस्पर्धा की थी।

केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुबॉम्बे उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (25 जून 2026)
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court), मुंबई
माननीय न्यायाधीशकार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अनखाड
मामले का शीर्षकसूरज माने और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य [Suraj Mane & Ors. v. State of Maharashtra & Anr.]
मुख्य कानूनी प्रश्नक्या औपचारिक राजपत्र अधिसूचना से पहले विज्ञापन में घोषित संशोधित नियमों के आधार पर भर्ती वैध है?
विधिक सिद्धांतयदि पुराने नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त हैं, तो नए प्रशासनिक रूप से स्वीकृत नियमों को विज्ञापन में स्पष्ट करने पर प्रक्रिया वैध मानी जाएगी। परीक्षा में असफल उम्मीदवार प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते।
अदालत का अंतिम आदेशरिट याचिकाएं पूरी तरह खारिज (Dismissed); 27-28 जून की मुख्य परीक्षा अपने तय शेड्यूल पर आयोजित होगी।

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा महाराष्ट्र में 89 जिला न्यायाधीशों (District Judges) की भर्ती

क्या है मुख्य विवाद? (The Dispute)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में 89 जिला जजों की सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के लिए विज्ञापन निकाला था। 10 मई 2026 को इसकी प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) हुई और 14 मई 2026 को नतीजे आए।

विवाद तब शुरू हुआ जब प्रारंभिक परीक्षा में असफल रहे कुछ वकीलों (Advocates) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस पूरी भर्ती प्रक्रिया और 27-28 जून 2026 को होने वाली मुख्य परीक्षा (Mains Exam) पर रोक लगाने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं के मुख्य तर्क

  • गैर-अधिसूचित नियम (Unnotified Rules): याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि हाईकोर्ट इस भर्ती में ‘महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008’ के उन संशोधनों (Amendments) को लागू कर रहा है, जो विज्ञापन जारी होने के समय सरकारी गैजेट (Official Gazette) में अधिसूचित नहीं हुए थे।
  • वकीलों के कोटे में दखल: इन नए नियमों के तहत सेवारत न्यायिक अधिकारियों (Serving Judicial Officers) को भी वकीलों के लिए आरक्षित 25% कोटे (Nomination Quota) में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जा रही थी। वकीलों का कहना था कि इससे बार (Bar) के वकीलों के अवसर कम हो रहे हैं।
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