Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अमेजन टेक्नोलॉजीज इंक को 340 करोड़ रुपए (करीब 39 मिलियन डॉलर) का हर्जाना और लागत चुकाने के आदेश पर रोक लगा दी।
सिंगल जज के आदेश को चुनौती
यह फैसला जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस अजय दीगपाल की बेंच ने सुनाया। अमेजन ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को लाइफस्टाइल इक्विटीज को ट्रेडमार्क उल्लंघन के लिए हर्जाना देने को कहा गया था। अब इस मामले में अमेजन की मुख्य अपील 9 अक्टूबर को सुनी जाएगी। यह आदेश लग्जरी लाइफस्टाइल ब्रांड ‘बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब’ के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में दिया गया था।
अमेजन के खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अमेजन को आदेशित रकम जमा कराने या उसकी गारंटी देने के लिए कहना न्याय के साथ अन्याय होगा। बेंच ने कहा कि सिंगल जज ने अमेजन की संलिप्तता को लेकर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं दिया था। आदेश में ई-उल्लंघन की सामान्य बातों पर ध्यान दिया गया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि अमेजन ने वास्तव में उल्लंघन किया। कोर्ट ने कहा कि अमेजन के खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं है और न ही ऐसा कोई दावा किया गया है जिससे यह साबित हो कि कंपनी ने जानबूझकर ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया।
2020 में दायर हुआ था मामला
लाइफस्टाइल इक्विटीज ने 2020 में अमेजन टेक्नोलॉजीज और अन्य के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का केस दायर किया था। आरोप था कि अमेजन ने ‘बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब’ के रजिस्टर्ड लोगो और डिवाइस मार्क्स से मिलते-जुलते चिन्हों का इस्तेमाल कर कपड़े और अन्य उत्पाद बेचे।
‘सिंबल’ ब्रांड के तहत बेचे गए थे उत्पाद
लाइफस्टाइल इक्विटीज का दावा था कि अमेजन ने ‘सिंबल’ ब्रांड के तहत ऐसे उत्पाद बनाए और बेचे, जिन पर उल्लंघन करने वाला लोगो था। इसके अलावा, अमेजन डॉट इन पर काम करने वाली कंपनी क्लाउडटेल इंडिया भी इन उत्पादों की बिक्री में शामिल थी।

