Thursday, October 1, 2026
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 Madras HC: कानून के बिना निगरानी निजता का उल्लंघन…फोन टैपिंग पर केंद्र सरकार का आदेश रद्द

 Madras HC: मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के टेलीफोन टैपिंग करना व्यक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

CBI द्वारा स्वतंत्र रूप से जुटाए गए अन्य साक्ष्य मान्य

न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने कहा कि निजता का अधिकार अब संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा People’s Union for Civil Liberties और के.एस. पुट्टस्वामी मामलों में दिए गए निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि फोन टैपिंग केवल तभी हो सकती है जब वास्तव में सार्वजनिक आपातकाल या सुरक्षा की स्थिति मौजूद हो। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “इस आदेश का प्रभाव उन साक्ष्यों पर नहीं पड़ेगा जो CBI ने फोन टैपिंग के अलावा स्वतंत्र रूप से जुटाए हैं। ट्रायल कोर्ट उन साक्ष्यों को उनके गुण-दोष के आधार पर स्वतंत्र रूप से परखे। यह फैसला स्पष्ट करता है कि सरकारी एजेंसियां नागरिकों की निजता का हनन नहीं कर सकतीं, जब तक कि उसके पीछे कोई स्पष्ट, कानूनी और अपरिहार्य कारण न हो। यह निर्णय निजता के अधिकार की संवैधानिक व्याख्या को और मजबूती देता है।

क्या है मामला?

यह फैसला एवरॉन एजुकेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पी. किशोर द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया। केंद्र सरकार ने एक भ्रष्टाचार मामले में CBI जांच के तहत किशोर के मोबाइल फोन की टैपिंग की अनुमति दी थी। यह मामला आयकर विभाग के एक सहायक आयुक्त से जुड़ा था।

कोर्ट ने क्या कहा?

12 अगस्त 2011 को जारी आदेश ना तो “सार्वजनिक आपातकाल” की स्थिति में था और ना ही “सार्वजनिक सुरक्षा के हित” में — जो कि टेलीग्राफ एक्ट की धारा 5(2) में फोन टैपिंग की अनुमति के लिए आवश्यक स्थितियां हैं। यह मामला गुप्त निगरानी और अपराध पकड़ने के लिए किया गया एक छुपा ऑपरेशन था, जिसे कोई सामान्य व्यक्ति स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता। इसलिए यह कानून की सीमाओं से बाहर है।

नियमों का उल्लंघन भी पाया गया

न्यायमूर्ति ने कहा कि अधिकारी टेलीग्राफ नियमावली के नियम 419-A(17) का भी उल्लंघन कर बैठे, जिसमें कहा गया है कि रिकॉर्ड की गई बातचीत को समयसीमा में रिव्यू कमेटी के समक्ष रखा जाना चाहिए था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टैपिंग धारा 5(2) के तहत की गई या नहीं। ऐसा नहीं किया गया।

नतीजा: आदेश अवैध और असंवैधानिक घोषित

कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा फोन टैपिंग की अनुमति देने वाले आदेश को असंवैधानिक, अधिकार क्षेत्र से बाहर और नियमों का उल्लंघन करार दिया। आदेश के आधार पर रिकॉर्ड की गई कॉल्स का उपयोग किसी भी प्रकार की कार्यवाही में नहीं किया जा सकेगा।

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