Friday, November 6, 2026
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CHILD SUPPORT: कामकाजी महिला को बच्चों के भरण-पोषण का हक; नाबालिग की जिम्मेदारी पिता की होती है

CHILD SUPPORT: फैमिली कोर्ट इंदौर ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर महिला कामकाजी भी है, तब भी वह अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए पति से मदद मांग सकती है।

पत्नी को हर महीने 22 हजार रुपए दे: कोर्ट

कोर्ट ने एक फार्मा कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम कर रहे 42 साल के व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह अपनी पत्नी को हर महीने 22 हजार रुपए दे, ताकि उनके दो नाबालिग बच्चों की देखभाल हो सके। यह रकम तब तक दी जाएगी, जब तक बच्चे बालिग नहीं हो जाते। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग बच्चों की देखभाल करना पिता की प्राथमिक और नैतिक जिम्मेदारी है। महिला इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और एक निजी कंपनी में काम करती है। उसकी मासिक आय 20 हजार रुपए है। कोर्ट ने 30 जून को दिए आदेश में कहा, “भले ही पत्नी खुद का खर्च चला सकती है, लेकिन बच्चों की जिम्मेदारी पिता की ही है।”

बच्चों की देखभाल मां कर रही, बेटी को दिल की बीमारी

कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों बच्चे मां के साथ रहते हैं और 2020 में पति-पत्नी के अलग होने के बाद से उनकी पूरी जिम्मेदारी मां ही निभा रही है। खास बात यह है कि बेटी को दिल की बीमारी है और उसकी सर्जरी हो चुकी है। उसका इलाज अब भी चल रहा है। महिला और बच्चों की ओर से वकील राघवेंद्र सिंह रघुवंशी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि 2020 से दोनों बच्चे मां के साथ रह रहे हैं और उनकी सभी जरूरतों का ध्यान वही रख रही हैं।

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