Thursday, October 1, 2026
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SC-PRESIDENTIAL: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 14 कानूनी सवालों पर हाेगा विचार…पांच जजों की संविधान पीठ की सहमति

SC-PRESIDENTIAL: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए 14 कानूनी सवालों पर विचार करने की सहमति दे दी।

8 अप्रैल के फैसले से जुड़े हैं सवाल

ये सवाल 8 अप्रैल के उस फैसले से जुड़े हैं, जिसमें कोर्ट ने राज्य विधानसभाओं से पास बिलों पर गवर्नर और राष्ट्रपति की कार्रवाई के लिए समयसीमा तय की थी। अब कोर्ट 29 जुलाई को इस मामले की सुनवाई की तारीख तय करेगा और अगस्त के मध्य में सुनवाई शुरू होगी।संवैधानिक बेंच में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत, विक्रम नाथ, पीएस नरसिम्हा और एएस चंद्रूरकर शामिल है।

राष्ट्रपति ने सुप्रीम अदालत से मांगी राय

राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जब कोई ऐसा कानूनी या तथ्यात्मक सवाल उठे, जो सार्वजनिक महत्व का हो, तो वह सुप्रीम कोर्ट से राय ले सकते हैं।

8 अप्रैल काे यह कहा था सुप्रीम अदालत ने

8 अप्रैल के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गवर्नर को राज्य विधानसभा से पास बिलों पर तय समय में फैसला लेना होगा और वे मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर राष्ट्रपति किसी बिल पर मंजूरी नहीं देते हैं, तो राज्य सरकार सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने कहा था कि गवर्नर की व्यक्तिगत असहमति, राजनीतिक कारण या अन्य बाहरी कारणों के आधार पर बिल रोकना संविधान के खिलाफ है और ऐसे फैसले रद्द किए जा सकते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इन सवालों पर विचार कर राष्ट्रपति को राय देगी। इससे गवर्नर और राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका को लेकर स्पष्टता आएगी।

राष्ट्रपति ने जो सवाल उठाए हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • जब कोई बिल अनुच्छेद 200 के तहत गवर्नर के पास भेजा जाता है, तो उनके पास क्या संवैधानिक विकल्प होते हैं?
  • क्या गवर्नर को मंत्रिपरिषद की सलाह मानना जरूरी है?
  • क्या अनुच्छेद 200 के तहत गवर्नर का विवेकाधिकार न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है?
  • क्या अनुच्छेद 361 गवर्नर की कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा पर पूरी तरह रोक लगाता है?
  • अगर संविधान में समयसीमा तय नहीं है, तो क्या कोर्ट समयसीमा तय कर सकता है?
  • क्या राष्ट्रपति का विवेकाधिकार (अनुच्छेद 201) भी न्यायिक समीक्षा के तहत आता है?
  • क्या राष्ट्रपति के विवेकाधिकार पर भी कोर्ट समयसीमा तय कर सकता है?
  • जब गवर्नर कोई बिल राष्ट्रपति के पास भेजते हैं, तो क्या राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से राय लेनी चाहिए?
  • क्या गवर्नर और राष्ट्रपति के फैसले (अनुच्छेद 200 और 201) कानून बनने से पहले ही कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
  • क्या अनुच्छेद 142 के तहत राष्ट्रपति या गवर्नर के आदेशों को बदला जा सकता है?
  • क्या गवर्नर की मंजूरी के बिना राज्य विधानसभा से पास बिल कानून माना जाएगा?
  • क्या अनुच्छेद 145(3) के तहत हर संवैधानिक सवाल को पांच जजों की पीठ के पास भेजना जरूरी है?
  • क्या अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ऐसा आदेश दे सकता है जो संविधान या किसी कानून के खिलाफ हो?
  • क्या केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवाद सुलझाने के लिए सिर्फ अनुच्छेद 131 के तहत ही सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं?
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