Thursday, July 2, 2026
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 Section 125 CPC: लगातार किसी गैर मर्द के साथ संबंध में रहना साबित होता है…तब महिला को भत्ता से वंचित संभव

 Section 125 CPC: पटना हाईकोर्ट ने कहा, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत व्यभिचार करना और व्यभिचार में रहना दो अलग-अलग बातें हैं।

महिला पर व्यभिचार का लगा आरोप

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी महिला पर कुछ अलग-अलग घटनाओं के आधार पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया है, तो केवल इसी आधार पर उसे भत्ता (maintenance) से वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि वह लगातार किसी गैर मर्द के साथ संबंध में रह रही थी। यह फैसला जस्टिस जितेन्द्र कुमार ने 7 जुलाई 2025 को सुनाया।

बुलबुल खातून ने दायर की थी पुनर्विचार याचिका

यह मामला बुलबुल खातून द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने फैमिली कोर्ट द्वारा खुद को भत्ता न दिए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि “व्यभिचार में रहना” का मतलब है लगातार ऐसा आचरण करना, न कि कुछ अलग-अलग घटनाएं। केवल एक-दो घटनाओं से यह साबित नहीं होता कि महिला व्यभिचार में रह रही थी।

यह है मामले की पृष्ठभूमि

बुलबुल खातून ने पूर्णिया की फैमिली कोर्ट में CrPC की धारा 125 के तहत खुद और अपने नाबालिग बेटे के लिए ₹20,000 प्रति माह भत्ते की मांग की थी। कोर्ट ने बेटे को ₹4,000 प्रति माह देने का आदेश दिया, लेकिन बुलबुल को कोई भत्ता नहीं दिया। पति मोहम्मद शमशाद ने आरोप लगाया था कि बुलबुल का मोहम्मद तरीकत नामक व्यक्ति से अवैध संबंध है और वह उसी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। उन्होंने पंचायत की रिपोर्ट भी पेश की और दावा किया कि उन्होंने धार्मिक संस्था के जरिए तीन तलाक दे दिया है।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने पाया कि बुलबुल खातून के खिलाफ लगातार व्यभिचार में रहने का कोई ठोस या प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। गवाहों ने किसी भी घटना की तारीख, समय या स्थान नहीं बताया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति ने जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया, उसके खिलाफ कोई आपराधिक शिकायत भी दर्ज नहीं कराई। कोर्ट ने तीन तलाक को भी अवैध बताया और कहा कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तीन तलाक अमान्य और गैरकानूनी है। पति ने न तो भत्ता दिया और न ही मेहर, इसलिए वह जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

कानूनी और संवैधानिक संदर्भ

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया:

  • शायरा बानो बनाम भारत सरकार (2017): तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया गया।
  • मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम (1985): तलाकशुदा मुस्लिम महिला को CrPC की धारा 125 के तहत भत्ता देने का अधिकार।
  • दानियाल लतीफी बनाम भारत सरकार (2001): भत्ता देने की जिम्मेदारी इद्दत अवधि के बाद भी जारी रहती है।
  • मोहम्मद अब्दुल समद बनाम तेलंगाना राज्य (2025): तलाकशुदा मुस्लिम महिला CrPC की धारा 125 या 1986 के कानून के तहत भत्ता मांग सकती है।

भत्ता देने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि बुलबुल खातून को भत्ता पाने का पूरा हक है। न तो तलाक वैध है और न ही व्यभिचार के आरोप साबित हुए हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि महिला को दहेज की मांग के चलते घर से निकाला गया था। पति सक्षम है और उसे पत्नी और बेटे की जिम्मेदारी उठानी होगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि भत्ता उसी तारीख से दिया जाए, जब मूल आवेदन किया गया था, न कि फैमिली कोर्ट के आदेश की तारीख से।

Case Title: Bulbul Khatoon & Another v. Md. Shamshad @ Md. Samsad & Another (Criminal Revision No. 509 of 2021) – Patna High Court

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