Friday, October 2, 2026
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License Fee: कोविड लॉकडाउन में बंद रहे बार व होटल ले सकेंगे शराब लाइसेंस और विशेषाधिकार शुल्क की वापसी या फिर एडजस्टमेंट, यहां पढ़ें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन एवं न्यायमूर्ति एन. माला
संबंधित नियमTamil Nadu Liquor (License and Permit) Rules, 1981 (Rule 24-A)
मुख्य सिद्धांतबिना लाइसेंस सरेंडर किए वैधानिक रिफंड नहीं मिल सकता, लेकिन कोविड जैसी अभूतपूर्व आपदा में साम्यता (Equity) के आधार पर 171 दिनों का रिफंड देय है।

License Fee: मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने तमिलनाडु के F.L.III शराब लाइसेंस धारक बार और होटलों को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन प्रतिबंधों के दौरान जितने दिन (171 दिन) व्यापार बंद रहा, उतने समय के लाइंसेंस शुल्क (License Fee) और विशेषाधिकार शुल्क (Privilege Fee) की आनुपातिक वापसी (Refund) या समायोजन (Adjustment) की मांग की जा सकती है।

न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन (Justice G. Jayachandran) और न्यायमूर्ति एन. माला (Justice N. Mala) की खंडपीठ ने तमिलनाडु राज्य और आबकारी आयुक्त द्वारा दायर रिट अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत कानून के तहत वैधानिक अधिकार (Statutory Right) के रूप में नहीं, बल्कि साम्यता/न्याय के आधार (Equitable Considerations) पर दी जा रही है।

अदालत के मुख्य कानूनी सिद्धांत और टिप्पणियां

  • कानूनी प्रावधान (Rule 24-A) बनाम साम्यता (Equity)
    • तमिलनाडु शराब (लाइसेंस और परमिट) नियम, 1981 के नियम 24-A के अनुसार, शुल्क वापसी केवल लाइसेंस का पूर्ण समर्पण (Surrender of License) करने पर ही मिल सकती है।
    • अस्थायी रूप से बंद हुए व्यवसायों के लिए बिना लाइसेंस सरेंडर किए रिफंड पाने का कोई सीधा वैधानिक प्रावधान नहीं है।
    • हालांकि, कोविड-19 को एक असाधारण वैश्विक घटना और ‘फोर्स मेजर’ (Force Majeure) की स्थिति मानते हुए कोर्ट ने माना कि कारोबारी अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि सरकार के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण कारोबार नहीं कर सके।
  • अदालत की मुख्य टिप्पणी:“यद्यपि हम पाते हैं कि प्रतिवादी नियम 24-A के तहत रिफंड का दावा करने के हकदार नहीं हैं, लेकिन मामलों की अनूठी परिस्थितियों को देखते हुए, हम कानून के तहत नहीं बल्कि साम्यता (Equity) के आधार पर 171 दिनों की सीमित अवधि के लिए शुल्क वापसी/समायोजन का दावा करने की अनुमति देते हैं।”

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • विवाद: F.L.III लाइसेंस वाले बार और होटल मालिकों ने लॉकडाउन के दौरान बार बंद रहने की अवधि के लिए लाइसेंस फीस वापस करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।
  • सिंगल जज का फैसला: सिंगल जज ने नियम 24-A के प्रावधान की व्याख्या करते हुए लाइसेंस सरेंडर किए बिना भी आनुपातिक रिफंड की अनुमति दे दी थी।
  • राज्य सरकार की अपील: तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया कि लाइसेंस शुल्क केवल शराब बेचने के लिए ही नहीं, बल्कि उसे अपने पास रखने (Possession) का अधिकार पाने के लिए भी लिया जाता है। राज्य के पास शराब व्यापार का विशेष अधिकार है, इसलिए बिना सरेंडर के रिफंड का कोई कानूनी नियम नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय/उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय

खंडपीठ ने सिंगल जज द्वारा दी गई नियम 24-A की कानूनी व्याख्या को तो खारिज कर दिया, लेकिन मानवीय और न्यायसंगत आधार पर बार मालिकों को राहत प्रदान की।

अदालत ने कहा कि जिन लाइसेंस धारकों ने 171 दिनों के लॉकडाउन के दौरान कोई व्यवसाय नहीं किया, वे दो सप्ताह के भीतर आबकारी आयुक्त (Commissioner of Prohibition and Excise) के समक्ष साक्ष्यों के साथ अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। आबकारी आयुक्त को 12 सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर 171 दिनों का रिफंड या समायोजन (Adjustment) देने का निर्देश दिया गया है।

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