Arms Act: पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा, वैध लाइसेंसधारी के पास कारतूस रखना अपराध नहीं है।
पुनरीक्षण याचिका (revision) को किया खारिज
दिल्ली पुलिस की पुनरीक्षण याचिका (revision) को अदालत ने खारिज कर दिया है। उसे 2019 में आईजीआई एयरपोर्ट पर पांच जिंदा कारतूसों के साथ पकड़ा गया था। अदालत ने कहा कि आरोपी के पास वैध आर्म्स लाइसेंस था और उसकी ओर से कारतूसों का रखा जाना जानबूझकर नहीं था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) दीप्ति देवेश ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई थी। मजिस्ट्रेट ने आरोपी अमित चौधरी (निवासी — मोदीनगर, गाजियाबाद) को आर्म्स एक्ट के तहत आरोपमुक्त किया था।
अनजाने में कारतूस उसके ट्रैवल बैग में रहने की दलील दी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष ने कभी यह विवाद नहीं किया कि आरोपी के पास वैध हथियार लाइसेंस है। चौधरी ने सुनवाई के दौरान अपनी लाइसेंस की प्रति भी पेश की, जो 0.32 बोर हथियार के लिए जारी की गई थी। कोर्ट ने कहा, “जब्त की गई गोलियां उसी हथियार से संबंधित हैं जिसके लिए आरोपी के पास वैध लाइसेंस मौजूद है। आरोपी ने यह भी बताया कि वह यात्रा पर निकल रहा था और अनजाने में कारतूस उसके ट्रैवल बैग में रह गए।”
ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं
अदालत ने माना कि इस स्थिति में आरोपी के पास गोलियां होना अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह लाइसेंसधारी है। साथ ही, अदालत ने कहा कि यह “जानबूझकर किया गया कब्ज़ा” (conscious possession) भी नहीं था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए 2 अगस्त 2023 के ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं पाई गई। इसलिए दिल्ली पुलिस की पुनरीक्षण याचिका खारिज की जाती है।”
आईजीआई एयरपोर्ट में कारतूस के साथ पकड़ाया था आरोपी
मामले के अनुसार, 2019 में आईजीआई एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान आरोपी के बैग की स्कैनिंग में 0.32 एमएम बोर के पांच जिंदा कारतूस मिले थे। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पास गाजियाबाद के डीएम द्वारा जारी वैध रिवॉल्वर लाइसेंस है। जांच में यह तथ्य सत्य पाया गया, फिर भी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत चार्जशीट दायर की थी।

