HomeLaw Firms & Assoc.Delhi High Court: लॉ रिसर्चरों को बड़ी राहत…अक्टूबर 2022 से बढ़ा वेतन...

Delhi High Court: लॉ रिसर्चरों को बड़ी राहत…अक्टूबर 2022 से बढ़ा वेतन देने का आदेश

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने यहां कार्यरत लॉ रिसर्चरों (Law Researchers) को बढ़ा हुआ मानदेय ₹80,000 प्रतिमाह की दर से 1 अक्टूबर 2022 से प्रभावी रूप से दिया जाए।

लॉ रिसर्चरों ने दायर की थी याचिका

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश उन लॉ रिसर्चरों की याचिका पर दिया, जिन्होंने बढ़े हुए वेतन और बकाया राशि की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनके पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि यह घोषित किया जाता है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अक्टूबर 2022 से प्रभावी रहेगा और इस कोर्ट द्वारा नियुक्त सभी लॉ रिसर्चरों को इसका लाभ मिलेगा।

याचिकाकर्ताओं का दावा

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 2018 से 2025 के बीच दिल्ली हाईकोर्ट के विभिन्न न्यायाधीशों के साथ कार्य कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट प्रशासन की मंजूरी के बावजूद दिल्ली सरकार ने वेतनवृद्धि लागू नहीं की, जिससे देरी हुई। याचिका में कहा गया कि 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने लॉ रिसर्चरों का मासिक वेतन ₹65,000 से बढ़ाकर ₹80,000 करने की मंजूरी दी थी, लेकिन दिल्ली सरकार ने आदेश लागू नहीं किया। अदालत ने पाया कि यह देरी मनमानी और अनुचित थी, जबकि लॉ रिसर्चर न्यायिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं और लंबे समय तक कार्य करते हैं।

लॉ रिसर्चरों का योगदान न्याय व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लॉ रिसर्चरों का योगदान न्याय व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और उनका पारिश्रमिक इस भूमिका के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी और प्रशासनिक स्वीकृति के बावजूद सरकार की निष्क्रियता ने इस फैसले के कार्यान्वयन में अनुचित विलंब किया। याचिका में यह भी बताया गया कि 2024 में कई बार RTI और अभ्यावेदन दायर किए गए, जिनसे खुलासा हुआ कि यह प्रस्ताव सितंबर 2023 से दिल्ली सरकार के पास लंबित था और वित्त व विधि विभागों की प्रक्रियागत देरी की वजह से फंसा रहा।

यह थी याचिकाकर्ताओं ने दलील

इतिहास बताते हुए याचिकाकर्ताओं ने बताया कि लॉ रिसर्चरों का वेतन 25,000 रुपये से शुरू होकर 2017 में 35,000, 2018 में 50,000, 2019 में 65,000 और 2022 में 80,000 रुपये तक स्वीकृत किया गया था। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 229 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि हाईकोर्ट को अपने कर्मचारियों की सेवा शर्तें तय करने का अधिकार है और एक बार मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बाद सरकार उस पर अमल करने के लिए बाध्य है। पहले की सुनवाई में न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने भी टिप्पणी की थी कि लॉ रिसर्चर अक्सर जजों से भी ज्यादा समय तक काम करते हैं, लेकिन उनका वेतन सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत रिसर्चरों की तुलना में बहुत कम है। अदालत ने यह भी कहा था कि लगभग दो साल से लंबित वेतन वृद्धि लागू न होना असंगत और अन्यायपूर्ण है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
32 ° C
32 °
32 °
51 %
4.1kmh
40 %
Fri
38 °
Sat
40 °
Sun
38 °
Mon
39 °
Tue
39 °

Recent Comments