Corbett Tiger Reserve violations: कोर्बेट टाइगर रिज़र्व में हुए अवैध निर्माण और पेड़ कटाई मामले पर गंभीर रुख अपनाया है।
सख्त टाइमलाइन के साथ अनिवार्य आदेश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन और संरक्षण को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए। CJI बी.आर. गवई, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की बेंच ने एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए राज्यों को सख्त टाइमलाइन के साथ अनिवार्य आदेश दिए।
कोर और क्रिटिकल हैबिटेट में टाइगर सफारी पर पूरी तरह रोक
कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 33(a) और 38-V के मुताबिक, कोर एरिया या क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट में किसी भी कीमत पर टाइगर सफारी की इजाजत नहीं दी जा सकती।
अतिरिक्त बजट देने का निर्देश दिया
कोर्ट ने कहा कि क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट को Forest Rights Act के क्रिटिकल वाइल्डलाइफ हैबिटेट की तरह ही मान्यता मिलनी चाहिए, ताकि पारिस्थितिक महत्व और वनवासियों के अधिकारों की एक समान व्याख्या हो। इसके अलावा, कोर्ट ने CAMPA फंड को स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए जारी रखने और कोर क्षेत्रों को अवैध गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त बनाने के लिए अतिरिक्त बजट देने का निर्देश दिया।
सिर्फ बफर के डिग्रेडेड या नॉन-फॉरेस्ट लैंड पर ही सफारी
- सफारी सिर्फ बफर के डिग्रेडेड/नॉन-फॉरेस्ट जमीन पर ही बन सकेगी, बशर्ते वह टाइगर कॉरिडोर का हिस्सा न हो।
- हर सफारी के साथ फुल-फ्लेज्ड रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर अनिवार्य होगा, जहाँ घायल, संघर्षग्रस्त और बचाए गए बाघों की देखभाल हो सके।
- चिड़ियाघरों से लाए बाघों पर पूरी तरह प्रतिबंध।
कोर्ट ने कमेटी की सिफारिशें मानते हुए कई कड़े नियम लागू किए
- सफारी में सिर्फ वही बाघ रखे जा सकेंगे जो उसी लैंडस्केप से रेस्क्यू हुए हों।
- एनक्लोज़र डिजाइन CZA से मंजूर होना जरूरी।
- वाइल्ड और कैप्टिव बाघों का कोई संपर्क न हो।
- फील्ड डायरेक्टर का प्रबंधन नियंत्रण—चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की निगरानी में।
- सफारी की सारी कमाई टाइगर कंज़र्वेशन फाउंडेशन में जाएगी।
- कैरिंग कैपेसिटी तय करना अनिवार्य।
- सिर्फ सोलर/हाइब्रिड/इलेक्ट्रिक वाहन—सख्त नियमों के साथ।
- वेस्टवॉटर का जीरो डिस्चार्ज अनिवार्य।
एक साल में सभी टाइगर रिज़र्व के लिए ESZ नोटिफिकेशन अनिवार्य
कोर्ट ने कहा, हर टाइगर रिज़र्व के लिए इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) का नोटिफिकेशन 1 साल में किया जाए। ESZ का दायरा पूरे बफर और फ्रिंज एरिया तक फैले, और जहाँ बफर नहीं है, वहाँ कम से कम 1 किमी का कुशन ज़रूरी है। ESZ लागू होने के बाद 2011 की अधिसूचना के सभी प्रतिबंध लागू होंगे—जिसमें टाइगर हैबिटेट/बफर/ESZ से 1 किमी तक खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पूरे टाइगर रिज़र्व और उसके ESZ को तीन महीनों में ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित किया जाए। होटल, पानी का उपयोग, सड़क चौड़ीकरण और रात का वाहन आवागमन सख्त शर्तों के तहत ही।
कोर्ट ने कहा
“ESZ सिर्फ राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों तक सीमित नहीं हो सकता। इसे टाइगर रिज़र्व के बफर और फ्रिंज क्षेत्रों पर भी लागू करना होगा।”
बफर और फ्रिंज में पूरी तरह प्रतिबंधित गतिविधियाँ
कोर्ट ने निम्न गतिविधियों पर सीधा प्रतिबंध लगाया
- कमर्शियल माइनिंग
- सॉमिल
- प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग
- कमर्शियल फायरवुड उपयोग
- बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट
- विदेशी प्रजातियों का परिचय
- हानिकारक रसायन
- लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट/टूरिज्म फ्लाइट
- कचरा/अपशिष्ट का प्राकृतिक सिस्टम में डिस्चार्ज
- बिना इजाजत पेड़ों की कटाई
रिसॉर्ट्स पर रोक, नाइट टूरिज्म बंद, पूरा रिज़र्व बनेगा साइलेंस ज़ोन
- नए रिसॉर्ट सिर्फ बफर में—कॉरिडोर में बिल्कुल नहीं।
- होमस्टे व कम्युनिटी आधारित पर्यटन को बढ़ावा।
- जीरो-वेस्ट अनिवार्य।
- कोर में टूरिज्म जोन में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित।
- वाहन कैरिंग कैपेसिटी लागू।
- नाइट सफारी/नाइट टूरिज्म पर पूर्ण रोक।
- कोर से गुजरने वाली सड़कों पर सूर्यास्त से सूर्योदय तक वाहनों पर रोक (आपातकाल को छोड़कर)।
सभी राज्यों को प्रणाली सुधारने के लिए बड़े निर्देश
- 6 महीने में सभी राज्यों को कोर और बफर क्षेत्र घोषित करने होंगे।
- 3 महीने में टाइगर कंज़र्वेशन प्लान (TCP) तैयार या अपडेट करने होंगे।
- 2 महीने में हर रिज़र्व की स्टीयरिंग कमेटी बनाकर साल में दो बैठकें अनिवार्य।
- NTCA को TCP और स्टीयरिंग कमेटियों की निगरानी का निर्देश।
- सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा—मास टूरिज्म की जगह स्थानीय मॉडल अपनाने का आदेश।

