Sunday, August 16, 2026
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Former CJI BR Gavai: “परवरिश ने सिखाया सब्र”…जूता फेंकने की घटना पर पूर्व CJI बीआर गवई की टिप्पणी

Former CJI BR Gavai: पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने अपने कार्यकाल के दौरान हुई जूता फेंकने की घटना पर पहली बार खुलकर बात की।

वकील के खिलाफ कार्रवाई नहीं की

पूर्व सीजेआई ने कहा, वकील के खिलाफ कार्रवाई न करने का फैसला उनकी परवरिश और व्यक्तिगत मूल्यों से प्रेरित था। गवई ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “शायद यह मेरी परवरिश का असर था… मुझे तो यह भी नहीं पता था कि यह किसी कथित टिप्पणी से जुड़ा है। लेकिन मुझे लगा कि मामले को उसी वक्त शांत करना चाहिए।”

यह था मामला

6 अक्टूबर को वकील राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान CJI गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें पकड़ लिया। बाहर जाते समय वकील ने कहा— “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” गवई ने वकील के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था।

“कोलेजियम पारदर्शी है, आरोप बेबुनियाद”

कोलेजियम पर उठ रहे सवालों पर गवई ने दृढ़ता से कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने बताया कि शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों से कोलेजियम सदस्य व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं। परामर्श न्यायाधीशों, केंद्र, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और कानून मंत्रालय से राय ली जाती है। “इन सभी पहलुओं को देखने के बाद ही अंतिम निर्णय होता है।”

“जजों पर व्यक्तिगत हमले ठीक नहीं”

पूर्व सीजेआई बोले, “निर्णयों की निष्पक्ष आलोचना स्वागत योग्य है, लेकिन जजों को निशाना बनाना ठीक नहीं।”

जस्टिस यशवंत वर्मा केस पर बोले—“दुर्भाग्यपूर्ण”

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर आग के बाद नकदी मिलने और चल रही महाभियोग प्रक्रिया पर गवई ने कहा, “घटना ने न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाया है। मामला संसद में लंबित है, इसलिए टिप्पणी उचित नहीं।”

“हाई-प्रोफाइल केसों को प्राथमिकता नहीं”

पूर्व सीजेआई गवई ने स्पष्ट किया कि न्यायालय में जजों की भारी कमी है, फिर भी सिस्टम अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है। “कुछ राष्ट्रीय महत्व के मामलों को प्राथमिकता मिल सकती है, लेकिन इसका मतलब हाई-प्रोफाइल केसों को फायदा नहीं।”

“न्यायिक सक्रियता की भी सीमाएं हैं”

गवई ने कहा कि अदालतों का दायित्व है कि सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर लोग न्याय पा सकें। “लेकिन सक्रियता, आतंकवाद में न बदल जाए—यह भी ध्यान रखना जरूरी है।”उन्होंने याद दिलाया कि संविधान तीनों संस्थाओं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—के बीच स्पष्ट शक्तियों का बंटवारा तय करता है।

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