Sunday, August 30, 2026
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NCERT Textbooks: भ्रष्टाचार और केस पेंडेंसी…कक्षा 8 की नई किताब में न्यायपालिका की चुनौतियों का जिक्र

NCERT Textbooks: शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए NCERT ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई पाठ्यपुस्तक में भारतीय न्यायिक प्रणाली की कमियों और चुनौतियों को शामिल किया है।

अब छात्र केवल अदालतों की संरचना ही नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद भ्रष्टाचार और जजों की कमी जैसे मुद्दों के बारे में भी पढ़ेंगे।

नई किताब में क्या है खास?

संशोधित अध्याय, जिसका शीर्षक ‘Role of the Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका) है, पहले के संस्करणों से काफी अलग है। पहले केवल अदालतों के पदानुक्रम (Hierarchy) पर जोर दिया जाता था, लेकिन अब इसमें ‘कड़वे सच’ को भी जगह दी गई है।

मुख्य चुनौतियाँ और आंकड़े

  • किताब में न्यायपालिका के सामने मौजूद तीन बड़े संकटों को रेखांकित किया गया है।
  • भ्रष्टाचार (Corruption): किताब में साफ कहा गया है कि लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं। यह विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के लिए न्याय पाना और भी मुश्किल बना देता है।

लंबित मामले (Pending Cases):

  • किताब में मुकदमों के अंबार का अनुमानित डेटा दिया गया है।
  • सुप्रीम कोर्ट: लगभग 81,000 मामले।
  • हाई कोर्ट: 62.40 लाख मामले।
  • जिला एवं अधीनस्थ अदालतें: 4.70 करोड़ मामले।
  • जजों की कमी: पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों का न होना न्याय में देरी का एक प्रमुख कारण बताया गया है।

जवाबदेही और पारदर्शिता

  • किताब में यह भी बताया गया है कि सिस्टम को सुधारने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
  • शिकायत प्रणाली: जनता अपनी शिकायतें CPGRAMS (केंद्रीय सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) के जरिए दर्ज करा सकती है। आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच इस माध्यम से 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।
  • टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है ताकि आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा बना रहे।

पूर्व CJI बी.आर. गवई का उद्धरण

पाठ्यपुस्तक में जुलाई 2025 में दिए गए पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के बयान को शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि
न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और दुराचार की घटनाएं जनता के विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इस विश्वास को फिर से बनाने का रास्ता त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई में निहित है।

निष्कर्ष

NCERT का यह कदम स्कूली छात्रों को देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की हकीकत और उनमें सुधार की आवश्यकता को समझने में मदद करेगा।

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