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Judicial posts: जजों की नियुक्ति चुटकी बजाते ही नहीं की जा सकती है…बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसा क्याें कहा, जानिए

Judicial posts: बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस भारती एच. डांगरे और जस्टिस सारंग वी. कोटवाल की बेंच ने महाराष्ट्र में 3,000 से अधिक न्यायिक पदों को जल्द भरने के अपने पिछले आदेश को वापस (Recall) ले लिया है।

कोर्ट ने माना कि न्यायिक सेवाओं में भर्ती एक जटिल और बहु-स्तरीय प्रक्रिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने न्यायिक नियुक्तियों (Judicial Appointments) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जजों की नियुक्ति “चुटकी बजाते ही” (At the drop of a hat) नहीं की जा सकती, क्योंकि यहाँ ‘गति’ (Speed) से अधिक ‘गुणवत्ता’ (Quality) का महत्व है।

मामले की मुख्य बातें

  • रजिस्ट्रार जनरल की समीक्षा याचिका: हाई कोर्ट की रजिस्ट्री ने 28 जनवरी के उस आदेश की समीक्षा (Review) मांगी थी, जिसमें जजों के खाली पदों को भरने के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ मांगा गया था।
  • प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र: रजिस्ट्री ने तर्क दिया कि जजों की भर्ती का मामला हाई कोर्ट के प्रशासनिक पक्ष (Administrative Side) का विशेष अधिकार है, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और प्रशासनिक समिति करती है। यह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है।
  • पदों की संख्या: नेशनल कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम कमेटी (NCMSC) ने महाराष्ट्र में बढ़ते मामलों को देखते हुए 3,211 नए पदों (जिला जज, सिविल जज, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आदि) के सृजन की सिफारिश की थी।

कोर्ट की सख्त और स्पष्ट टिप्पणी

बेंच ने जजों के चयन की कठिन प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा:”न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति चुटकी बजाते ही नहीं की जा सकती। हम बस लोगों को उठाकर नियुक्त नहीं कर सकते। हमें गुणवत्ता (Quality) लानी होगी। हम जजों की नियुक्ति वैसे नहीं कर सकते जैसे क्लर्कों की भर्ती की जाती है।

चयन प्रक्रिया की जटिलता

  • कोर्ट ने बताया कि एक जज के चयन के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
  • स्क्रीनिंग और प्रारंभिक परीक्षा: हजारों आवेदकों में से योग्य उम्मीदवारों को चुनना।
  • मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार (Interview): कानूनी ज्ञान और व्यक्तित्व का परीक्षण।
  • सर्विस रिकॉर्ड की जांच: जिला जज कैडर के लिए पिछले प्रदर्शन का सूक्ष्म निरीक्षण।

निष्कर्ष

कोर्ट ने याचिकाकर्ता (वैजनाथ पांडुरंग वाजे) को अपनी जनहित याचिका (PIL) वापस लेने की अनुमति दे दी, क्योंकि वे सरकार और हाई कोर्ट द्वारा भर्ती के लिए उठाए गए वर्तमान कदमों (जैसे 89 जिला जजों के पदों के लिए विज्ञापन) से संतुष्ट थे। कोर्ट ने उन्हें भविष्य में स्थिति बिगड़ने पर दोबारा आने की छूट दी है।

न्यायिक पदों का विवरण (प्रस्तावित):

पद का नाम श्रेणी
जिला जज उच्चतर न्यायिक सेवा
सिविल जज (Sr. & Jr. Division) अधीनस्थ न्यायिक सेवा
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट शहरी क्षेत्रों के लिए
स्मॉल कॉसेस कोर्ट जज विशिष्ट दीवानी मामलों के लिए

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