Thursday, November 5, 2026
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Draw sympathy: शख्स ने जज के सामने रखा भ्रूण…कोर्ट ने कहा, न्याय सबूतों से मिलता है, तमाशे से नहीं

Draw sympathy: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पिछले हफ्ते एक रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब एक याचिकाकर्ता ने न्याय की गुहार लगाते हुए सीधे जज के डायस (मंच) के सामने एक भ्रूण (Foetus) रख दिया।

जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने इस चौंकाने वाली हरकत पर सख्त नाराजगी जताई और इसे “अत्यंत आपत्तिजनक” करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए व्यक्ति को निर्देश दिया कि वह ‘इमोशनल थिएटर’ करने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करे और संबंधित क्षेत्राधिकार के मजिस्ट्रेट के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराए। यह घटना व्यक्तिगत त्रासदी और हताशा का उदाहरण तो है, लेकिन साथ ही यह अदालती मर्यादाओं की भी याद दिलाती है, जहाँ न्याय का पैमाना केवल साक्ष्य (Evidence) होता है, तमाशा (Spectacle) नहीं।

क्या था पूरा मामला?

  • आरोप: याचिकाकर्ता का दावा था कि उसने मारुति सुजुकी लिमिटेड में 200 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का खुलासा किया था, जिसके बाद से उसके परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है।
  • हादसा: शख्स ने आरोप लगाया कि एक कार हमले में उसकी पत्नी का गर्भपात (Miscarriage) हो गया। प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर उसने सहानुभूति पाने के लिए भ्रूण को ही अदालत कक्ष में पेश कर दिया।
  • बदलती मांगें: शुरू में उसने ‘इच्छा मृत्यु’ (Euthanasia) मांगी, लेकिन बाद में अपनी मांग बदलकर शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे की गुहार लगाने लगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियां: “अदालत भावनाओं के प्रदर्शन का मंच नहीं”

  • जस्टिस हिमांशु जोशी ने याचिका को “तथ्यहीन और अस्पष्ट” बताते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई।
  • सबूतों का अभाव: कोर्ट ने नोट किया कि याचिका गंभीर आरोपों से भरी थी, लेकिन उनके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया था।
  • कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 175(3) के तहत उपलब्ध कानूनी उपचारों (जैसे मजिस्ट्रेट के पास जाना) का उपयोग नहीं किया।
  • भावनाओं से हेरफेर: बेंच ने स्पष्ट किया, “किसी एक पक्ष का दुख या पीड़ा न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकती। न्याय केवल कानूनन स्वीकार्य सामग्री के आधार पर होता है, न कि नाटकीय आचरण (Theatrical Conduct) से।”

बायोमेडिकल वेस्ट और शव का अपमान

  • अदालत ने याचिकाकर्ता को याद दिलाया कि भ्रूण जैसे मानव शारीरिक अवशेषों को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत ही संभाला जाना चाहिए।
  • अपराध: कोर्ट ने कहा कि अदालत जैसे सार्वजनिक स्थान पर भ्रूण का प्रदर्शन करना भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत ‘मानव शव का अपमान’ करने के समान है, जो एक दंडनीय अपराध है।
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