Digital Efficiency: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने एक जमानत याचिका (बबलू यादव केस) की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को अभियोजन (Prosecution) विभाग में सुधार के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट का मानना है कि केवल कानून जानने से काम नहीं चलेगा, आज के दौर में कानूनी ज्ञान + डिजिटल तकनीक का संगम ही न्याय प्रक्रिया को “फास्ट ट्रैक” पर ला सकता है।
यह रही हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां
यंग लॉयर्स और डिजिटल तकनीक
कोर्ट ने सुझाव दिया कि ओडिशा के ‘एडवोकेट जनरल ऑफिस’ की तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार को भी Fresh Law Graduates या युवा वकीलों को ‘रिसर्च एसोसिएट्स’ के रूप में नियुक्त करना चाहिए। ये युवा वकील कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक में माहिर होते हैं, जिससे फाइलों की स्कैनिंग और डेटा फीडिंग का काम तेजी से हो सकेगा। इन्हें मानद आधार (Honorary basis) पर जोड़ा जा सकता है ताकि सिस्टम की एफिशिएंसी (Efficiency) बढ़े।
लापरवाही पर सख्त एक्शन
- यह मामला तब तूल पकड़ा जब कोर्ट ने देखा कि फरवरी में नोटिस जारी होने के बावजूद पुलिस ने मार्च तक निर्देश (Instructions) नहीं भेजे थे।
- IO निलंबित: आगरा के पुलिस कमिश्नर ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में लापरवाह जांच अधिकारी (IO) को सस्पेंड (Suspend) कर दिया गया है और उसके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।
- देरी का कारण: पुलिस और सरकारी वकील के कार्यालय के बीच तालमेल की कमी और कागजी कार्रवाई में सुस्ती।
E-Manu App और रियल-टाइम डेटा
- अपर महाधिवक्ता (AAG) ने कोर्ट को बताया कि सरकारी तंत्र को डिजिटल बनाने के लिए ‘E-Manu App’ तैयार किया गया है।
- मकसद: सभी हितधारकों (Stakeholders) को रीयल-टाइम डेटा और अलर्ट भेजना।
- निर्देश: कोर्ट ने यूपी के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और प्रमुख सचिव (विधि) को निर्देश दिया है कि वे इस ऐप पर डेटा फीड करने के लिए पर्याप्त स्टाफ मुहैया कराएं ताकि पुलिस से निर्देश तुरंत प्राप्त किए जा सकें।
कोर्ट का फैसला: आरोपी को मिली जमानत
अंत में, कोर्ट ने बबलू यादव को निम्नलिखित आधारों पर जमानत दे दी। कहा, जेलों में बढ़ती भीड़ (Overcrowding), ट्रायल कोर्ट में आपराधिक मामलों की भारी पेंडेंसी (Heavy Pendency) व कोर्ट ने केस की मेरिट पर टिप्पणी किए बिना यह राहत प्रदान की।
