Wednesday, September 30, 2026
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NIA COURTS: एक साल के भीतर पूरा हो UAPA ट्रायल; हर महीने एक केस निपटाने का लक्ष्य रखें राज्य

NIA COURTS: सुप्रीम कोर्ट ने 17 राज्यों को निर्देश दिया है कि वे समर्पित NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालतों के माध्यम से UAPA (आतंकवाद विरोधी कानून) मामलों का ट्रायल एक साल के भीतर पूरा करने का प्रयास करें।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन राज्यों में 10 से अधिक NIA मामले लंबित हैं, वहां विशेष समर्पित अदालतें बनाई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में “न्याय में देरी” को समाप्त करने की दिशा में मील का पत्थर है। बुनियादी ढांचे के लिए सीधे केंद्र से मिलने वाला फंड राज्यों की हीलाहवाली को खत्म करेगा।

अदालत के मुख्य निर्देश: डे-टू-डे सुनवाई और विशेष अभियोजक

  • औसत लक्ष्य: कोर्ट ने उम्मीद जताई कि औसतन एक महीने में एक NIA केस का निपटारा हो।
  • कार्यप्रणाली: इसके लिए अदालतों को डे-टू-डे (प्रतिदिन) सुनवाई करनी होगी और एक समर्पित विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त करना होगा।
  • न्यायिक अधिकारी: हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के परामर्श से समर्पित पीठासीन अधिकारी तैनात किए जाएं, जिन्हें अन्य मामलों का बोझ न दिया जाए।
  • अन्य विशेष अदालतें: राज्यों को NDPS (ड्रग्स), MCOCA (संगठित अपराध) जैसे जघन्य अपराधों के लिए भी समर्पित अदालतें बनाने का प्रयास करना चाहिए।

फंडिंग का नया मॉडल: राज्य के हिस्से का इंतजार नहीं

  • CJI सूर्यकांत ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित फंडिंग मॉडल पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
  • वित्तीय सहायता: केंद्र प्रत्येक विशेष NIA कोर्ट के लिए 1 करोड़ रुपये (गैर-आवर्ती) और 1 करोड़ रुपये प्रति वर्ष (आवर्ती व्यय) का अनुदान देगा।
  • 60:40 का फॉर्मूला नहीं: CJI ने कहा कि यह सामान्य मैचिंग ग्रांट (जहाँ राज्य 40% देते हैं) जैसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि कई राज्य राजस्व की कमी के कारण अपना हिस्सा नहीं दे पाते, जिससे बुनियादी ढांचा नहीं बन पाता।

राज्यों की स्थिति और प्रगति

  • दिल्ली: दिल्ली सरकार ने बताया कि राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर की दूसरी मंजिल पर NIA और अन्य विशेष (NDPS, MCOCA) समेत 15 अदालतें अप्रैल 2026 तक चालू हो जाएंगी।
  • कर्नाटक और तमिलनाडु: इन राज्यों ने स्वीकार किया कि उनके पास 10 से अधिक NIA मामले हैं और वे और अधिक अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं।
  • ACR मूल्यांकन: सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी कर कहा कि इन विशेष अदालतों के जजों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) के मूल्यांकन के लिए एक विशेष तंत्र बनाया जाए, जिसे पारंपरिक तरीके से नहीं देखा जाएगा।

पृष्ठभूमि: क्यों पड़ी ज़रूरत?

यह निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की उस स्थिति रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे का प्रस्ताव दिया गया था। 16 दिसंबर 2025 को केंद्र ने प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में समर्पित NIA अदालतें स्थापित करने का निर्णय लिया था।

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