Friday, October 2, 2026
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Matrimonial Law: क्या लंबे समय का अलगाव पति-पत्नी के तलाक का आधार है? मद्रास हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट जवाब

Matrimonial Law: मद्रास हाई कोर्ट (मदुरै बेंच) ने वैवाहिक विवादों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस जी.के. इलन्तिरायण और जस्टिस आर. पूर्णिमा की बेंच ने थूथुकुडी की फैमिली कोर्ट के 2020 के फैसले को पलटते हुए एक मैकेनिकल इंजीनियर पति को तलाक की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने पाया कि पत्नी का व्यवहार पति के प्रति मानसिक प्रताड़ना जैसा था। एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी द्वारा पति की लंबे समय तक उपेक्षा करना, अलग रहना और गंभीर आपराधिक आरोप लगाना ‘मानसिक क्रूरता’ (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने माना कि ऐसे हालात में पति तलाक का हकदार है।

कोर्ट का मुख्य निष्कर्ष: क्या है मानसिक क्रूरता?

  • हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निम्नलिखित बातें ‘क्रूरता’ मानी जाएंगी।
  • उपेक्षा और अलगाव: बिना किसी ठोस कारण के लंबे समय तक पति और बच्चों से अलग रहना।
  • गंभीर आपराधिक आरोप: पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न या घरेलू हिंसा के ऐसे झूठे आरोप लगाना जो बाद में साबित न हो सकें।
  • दोहरा रवैया: एक तरफ गंभीर आरोप लगाना और दूसरी तरफ कोर्ट में यह कहना कि वह पति के साथ रहना चाहती है। कोर्ट ने इसे “बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात” माना।

मामला क्या था? (The Background)

  • शादी और बच्चे: इस जोड़े की शादी जून 2000 में हुई थी और उनकी दो बेटियां हैं। पति हैदराबाद में काम करता था।
  • पति के आरोप: पति ने दावा किया कि पत्नी का व्यवहार हिंसक था, वह आत्महत्या की धमकी देती थी और उसके चरित्र पर शक करती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने 2015 में उसे और बच्चों को छोड़ दिया, जिसके बाद उसने बच्चों की देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।
  • पत्नी के आरोप: पत्नी ने पति पर शराब पीने, लापरवाही बरतने और दहेज की मांग करने के आरोप लगाए। उसने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था।

फैमिली कोर्ट बनाम हाई कोर्ट (The Conflict of Judgments)

  • फैमिली कोर्ट का रुख: निचली अदालत ने यह कहकर तलाक याचिका खारिज कर दी थी कि पति क्रूरता साबित नहीं कर पाया। कोर्ट ने यह भी कहा था कि चूंकि वे मुकदमे के दौरान भी साथ रहे, इसलिए ‘क्रूरता’ को माफ (Condone) कर दिया गया माना जाएगा।
  • हाई कोर्ट का फैसला: बेंच ने निचली अदालत के तर्क को गलत माना। कोर्ट ने नोट किया कि पत्नी द्वारा दर्ज कराया गया घरेलू हिंसा का मामला खारिज हो चुका था। कोर्ट ने कहा कि झूठे और गंभीर आरोप लगाना अपने आप में मानसिक क्रूरता है, जो वैवाहिक रिश्ते को पूरी तरह खत्म कर देता है।

व्यभिचार (Adultery) का मुद्दा

पति ने पत्नी पर व्यभिचार के आरोप भी लगाए थे, लेकिन हाई कोर्ट ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि पति ने उस ‘तीसरे व्यक्ति’ को मुकदमे में पार्टी (Party) नहीं बनाया था, इसलिए एडल्ट्री का आरोप साबित नहीं माना जा सकता। हालांकि, क्रूरता (Cruelty) के आधार पर तलाक के लिए पर्याप्त तथ्य मौजूद थे।

निष्कर्ष: सम्मान के बिना साथ रहना संभव नहीं

यह फैसला रेखांकित करता है कि विवाह केवल एक छत के नीचे रहने का नाम नहीं है। यदि एक साथी दूसरे पर निराधार और गंभीर आरोप लगाकर उसके सामाजिक सम्मान को ठेस पहुँचाता है, तो कानून उसे उस रिश्ते से बाहर निकलने का अधिकार देता है।

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