Punjab State Information Commission: मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| फोरम | पंजाब राज्य सूचना आयोग (Punjab State Information Commission) |
| मुख्य सूचना आयुक्त | इंदरपाल सिंह |
| मुख्य कानूनी मुद्दा | क्या राज्य द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी RTI अधिनियम की धारा 2(h) के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ हैं? |
| अंतिम निर्णय | हाँ, जांच अधिकारी सरकार द्वारा नियंत्रित होते हैं और उन्हें RTI के तहत मांगी गई जानकारी देनी होगी। |
Punjab State Information Commission: पंजाब राज्य सूचना आयोग (Punjab State Information Commission) ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी (Inquiry Officer) सूचना का अधिकार कानून (RTI Act), 2005 की धारा 2(h) के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ (Public Authority) के दायरे में आते हैं।
मुख्य सूचना आयुक्त इंदरपाल सिंह (Inderpal Singh) ने एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) को उनके द्वारा संचालित विभागीय जांचों की जानकारी देने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी राज्य सरकार के “नियंत्रण” (Controlled) में काम करते हैं।
Punjab State Information Commission: मुख्य कानूनी निष्कर्ष और सिद्धांत
- धारा 2(h) के तहत नियंत्रण (Government Control)
- आयोग ने माना कि जांच अधिकारी RTI अधिनियम की धारा 2(h)(d)(i) के तहत आते हैं, जिसके अनुसार सरकार द्वारा “स्वामित्व, नियंत्रित या पर्याप्त रूप से वित्तपोषित” कोई भी निकाय सार्वजनिक प्राधिकरण है।
- सरकार द्वारा जांच अधिकारियों का पैनल बनाना, उनके लिए प्रशासनिक निर्देश जारी करना और कार्यभार तय करना यह साबित करता है कि वे राज्य द्वारा नियंत्रित हैं।
- व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता (Record-Keeping):“नागरिक या भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करने वाले अधिकारियों को systematically रिकॉर्ड बनाए रखना अनिवार्य है। बिना रिकॉर्ड के कोई अधिकारी यह साबित नहीं कर सकता कि फाइलें वापस सौंप दी गई थीं या अपने मानदेय/पारिश्रमिक (Remuneration) के दावों को सही ठहरा सकता है।”
- 20-मामलों की सीमा (Workload Limit)
- आयोग ने 20 दिसंबर 2019 के सरकारी आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत एक जांच अधिकारी के पास प्रति कैलेंडर वर्ष अधिकतम 20 मामलों (Inquiries) की सीमा तय की गई है। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव को सिफारिश की कि इस सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए तिमाही या वार्षिक डेटा संकलित किया जाए।
Punjab State Information Commission: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- RTI आवेदन: चंडीगढ़ के एक निवासी ने सेवानिवृत्त एडीजे द्वारा जनवरी 2020 से जून 2023 के बीच प्राप्त, लंबित और पूरी की गई जांचों की जानकारी मांगी थी।
- शुरुआती इनकार: कार्मिक विभाग (Personnel Department) ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि आवेदक को उन संबंधित विभागों से संपर्क करना चाहिए जिन्होंने जांच सौंपी थी।
- जांच अधिकारी का तर्क: सेवानिवृत्त एडीजे ने तर्क दिया कि वे कोई ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं हैं और न ही धारा 4 के तहत रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच पूरी होने पर मूल फाइलें संबंधित विभागों को लौटा दी जाती हैं और उन्हें कोई सचिवीय सहायता (Secretarial Assistance) नहीं मिलती।
Punjab State Information Commission: आयोग का अंतिम आदेश
पंजाब राज्य सूचना आयोग ने सेवानिवृत्त एडीजे के तर्कों को खारिज करते हुए उन्हें मांगी गई जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया। आयोग ने माना कि सरकारी नियंत्रण और सार्वजनिक धन से पारिश्रमिक प्राप्त करने के कारण जांच अधिकारी RTI के तहत जवाबदेह हैं।

