Friday, October 2, 2026
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Indissoluble Sacrament: यहां पढ़िए 49 साल से अलग रह रहे बुजुर्ग दंपति के तलाक का केस…70 साल की महिला व 72 वर्ष के पुरुष संग यह हुआ

Indissoluble Sacrament: मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति बट्टू देवांगद एवं न्यायमूर्ति सुनीता गंधम
दंपति की उम्रपत्नी (70 वर्ष), पति (72 वर्ष)
अलगाव की अवधि49 वर्ष (1978 से अलग)
मुख्य निर्णयआपसी सहमति से तलाक मंजूर; 6 महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि माफ की गई।

Indissoluble Sacrament: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने 70 वर्षीय महिला और 72 वर्षीय पुरुष के विवाह को आपसी सहमति (Mutual Consent) से भंग कर दिया है। यह दंपति पिछले 49 वर्षों (1978 से) से अलग रह रहा था।

न्यायमूर्ति बट्टू देवांगद (Justice Battu Devanand) और न्यायमूर्ति सुनीता गंधम (Justice Sunitha Gandham) की पीठ ने माना कि दंपति के पुनर्मिलन (Reunion) की कोई संभावना नहीं बची है, इसलिए कानूनी रूप से अनिवार्य 6 महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि (Cooling-off Period) को माफ करते हुए तलाक की मंजूरी दी जाती है। अदालत ने हिंदू विवाह प्रणाली के विकास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कानून हिंदू विवाह को एक “अखंड संस्कार” (Indissoluble Sacrament) से “संविदात्मक समझौते” (Contractual Agreement) के रूप में देखने की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।

Indissoluble Sacrament: अदालत की मुख्य टिप्पणियां

  • विवाह प्रणाली का बदलता नजरिया:“विधानमंडल (Legislature) का इरादा आपसी सहमति से हिंदू विवाहों को आसानी से भंग करने की व्यवस्था प्रदान करना था, जो विवाह को एक अखंड संस्कार मानने के बजाय संविदात्मक समझौते के रूप में देखने के बदलाव को चिह्नित करता है।”
  • कूलिंग-ऑफ पीरियड माफ करने का आधार:
    • पीठ ने कहा कि अलगाव की इतनी लंबी अवधि (49 वर्ष) को देखते हुए पक्षों को और 6 महीने इंतजार कराने का कोई औचित्य नहीं है। दोनों के बीच जारी अंतहीन मुकदमों को खत्म करने का यही सही मार्ग है।

Indissoluble Sacrament: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • शादी और अलगाव: दोनों का विवाह 4 जून 1972 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। कोई संतान न होने और आपसी मतभेदों के कारण वे सितंबर 1978 से ही अलग रह रहे थे।
  • फैमिली कोर्ट का आदेश (2024): पति ने क्रूरता (Cruelty) और परित्याग (Desertion) के आधार पर पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी दी थी, जिसे जून 2024 में मंजूर कर लिया गया। पत्नी ने इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की।
  • अपील के दौरान समझौता: हाई कोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी विवादों को सुलझा लिया:
    1. पति अपनी पत्नी को ₹20,000 प्रति माह भरण-पोषण (Maintenance) देने पर सहमत हुआ।
    2. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ लंबित आपराधिक व अन्य मामले वापस लेने का फैसला किया।
    3. दोनों ने कोर्ट से आपसी सहमति से तलाक (Section 13B) की मांग की।

Indissoluble Sacrament: अदालत का अंतिम आदेश

हाई कोर्ट ने दंपति को पुनर्मिलन के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन उनके बीच संबंध सुधरने की कोई गुंजाइश न पाते हुए फैमिली कोर्ट के पिछले आदेश को रद्द किया और आपसी सहमति के आधार पर विवाह विच्छेद (Divorce by Mutual Consent) की डिक्री जारी कर दी।

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