Monday, August 17, 2026
HomeLatest NewsCrime of Passion: पत्नी को प्रेमी के साथ देख खोया आपा…गुजरात HC...

Crime of Passion: पत्नी को प्रेमी के साथ देख खोया आपा…गुजरात HC ने पति के पक्ष में यह दिया फैसला, जान लें

Crime of Passion: गुजरात हाई कोर्ट ने एक दशक पुराने मामले में गंभीर और अचानक उकसावे (Grave and Sudden Provocation) के कानूनी सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

गैर-इरादतन हत्या की सजा रखी बरकरार

हाईकोर्ट जस्टिस गीता गोपी की बेंच ने हसमुखभाई भूराभाई वसावा की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। आरोपी को IPC की धारा 304 पार्ट-II (गैर-इरादतन हत्या) के तहत 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने उस पति की दोषसिद्धि (Conviction) को बरकरार रखा है, जिसने अपनी पत्नी को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

मामला क्या था? (The 1997 Incident)

  • वारदात: घटना 31 जुलाई 1997 की रात की है। आरोपी हसमुखभाई ने दावा किया कि उसने अपनी पत्नी को घर के अंदर एक पड़ोसी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा।
  • हमला: इसके बाद हुए झगड़े में आरोपी ने अपनी पत्नी पर घूंसों, लातों और लकड़ी की वस्तु से इतना भीषण हमला किया कि गंभीर चोटों (लिवर फटने और आंतरिक रक्तस्राव) के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

कोर्ट में कानूनी बहस: ‘हत्या’ या ‘उकसावा’?

  • इस केस का मुख्य बिंदु यह था कि क्या यह मामला धारा 302 (हत्या) का है या धारा 300 के अपवाद 1 (Exception 1) के तहत आता है।
  • बचाव पक्ष की दलील: यह कोई सोची-समझी साजिश नहीं थी। पत्नी को उस स्थिति में देखकर आरोपी ने अपना मानसिक संतुलन और आत्म-नियंत्रण खो दिया था। यह ‘गंभीर और अचानक उकसावे’ का मामला है।
  • अभियोजन का पक्ष: हमला बहुत क्रूर और इरादतन था। चोटों की प्रकृति दर्शाती है कि यह केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य था।

हाई कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष (Key Findings)

  • अदालत ने साक्ष्यों और एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल कन्फेशन (गवाहों के सामने कबूलनामा) का गहन विश्लेषण किया।
  • कबूलनामे की विश्वसनीयता: आरोपी ने एम्बुलेंस ड्राइवर और अपने वरिष्ठ अधिकारी के सामने स्वेच्छा से जुर्म कबूल किया था। कोर्ट ने इसे भरोसेमंद माना।
  • उकसावे की सीमा: कोर्ट ने स्वीकार किया कि जीवनसाथी को किसी और के साथ देखना ‘गंभीर उकसावा’ हो सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें जरूरी हैं- उकसावा गंभीर और अचानक होना चाहिए, प्रतिक्रिया तत्काल होनी चाहिए, बिना किसी पूर्व योजना के।
  • पूर्व संदेह: कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी को अपनी पत्नी पर पहले से ही शक था, जो इस घटना के ‘अचानक’ होने के दावे को थोड़ा कमजोर करता था, लेकिन फिर भी इसे गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) की श्रेणी में ही रखा गया।

मेडिकल साक्ष्य: लिवर का फटना

मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि अत्यधिक मारपीट के कारण महिला का लिवर फट गया था (Liver Rupture) और अंदरूनी रक्तस्राव हुआ था, जो मौत के लिए पर्याप्त था। कोर्ट ने माना कि आरोपी को पता था कि इस तरह के हमले से मौत हो सकती है (Knowledge), भले ही उसका इरादा (Intent) हत्या का न रहा हो।

यह रहा अदालत का निष्कर्ष: कानून और मानवीय भावनाएं

गुजरात हाई कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून मानवीय भावनाओं और ‘तात्कालिक गुस्से’ को समझता है, लेकिन वह हिंसा को पूरी तरह माफ नहीं करता। इसीलिए आरोपी को ‘हत्या’ (Section 302) के बजाय ‘गैर-इरादतन हत्या’ (Section 304) की सजा दी गई।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
29 ° C
29 °
29 °
89 %
2.6kmh
100 %
Sun
30 °
Mon
35 °
Tue
33 °
Wed
34 °
Thu
35 °