Monday, August 17, 2026
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Israel’s New Law: इजराइल ने ऐसा कानून पास किया…फिलिस्तीनियों के रौंगटे खड़े हो गए, पढ़ें पूरा कानून

Israel’s New Law: इजराइल की संसद (नेसेट) ने सोमवार (31 मार्च, 2026) को एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कानून पारित किया है।

इस कानून में आतंकवादी हमलों के दोषी ठहराए गए फिलिस्तीनियों के लिए मृत्युदंड (Death Penalty) को अनिवार्य बनाता है। 62-47 के मतों से पारित यह कानून इजराइल की पिछली न्यायिक परंपराओं से एक बड़ा अलगाव दर्शाता है। इजराइल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर के समर्थन वाले इस बिल को नेसेट की मंजूरी मिल गई है। बेन ग्विर ने इसे “पीड़ितों के लिए न्याय का दिन” बताया है।

कानून के मुख्य प्रावधान (Key Provisions)

  • यह कानून विशेष रूप से वेस्ट बैंक के उन फिलिस्तीनियों पर लागू होता है जो सैन्य अदालतों में दोषी पाए जाते हैं।
  • परिभाषा: जो कोई भी “इज़राइल राज्य के अस्तित्व को नकारने के इरादे से” किसी इज़राइली की हत्या करता है, उसे मृत्युदंड दिया जाएगा।
  • बहुमत का फैसला: पहले मौत की सजा के लिए जजों के पैनल की सर्वसम्मति (Unanimous) जरूरी थी, लेकिन अब केवल साधारण बहुमत से सजा सुनाई जा सकती है।
  • अपील का अधिकार नहीं: इस कानून के तहत सजा पाने वाले व्यक्ति को अपील करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
  • समय सीमा: सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर फांसी देना अनिवार्य होगा।
  • विशेष परिस्थितियां: जज केवल ‘अस्पष्ट रूप से परिभाषित’ विशेष परिस्थितियों में ही उम्रकैद दे सकते हैं, अन्यथा मृत्युदंड अनिवार्य है।

भेदभाव और ‘दोहरी न्यायिक प्रणाली’ के आरोप

  • CNN और UN की रिपोर्टों के अनुसार, यह कानून इज़राइल की न्यायिक प्रणाली में एक गहरी खाई को दर्शाता है।
  • नस्लीय निशाना: यह कानून विशेष रूप से फिलिस्तीनियों पर लागू होता है (जो सैन्य अदालतों में चलते हैं), जबकि इज़राइली नागरिकों पर नागरिक अदालतों (Civilian Courts) में मुकदमा चलता है।
  • यहूदी अपराधियों पर लागू नहीं: आलोचकों का कहना है कि कानून में “इज़राइल राज्य के अस्तित्व को नकारने” की जो शर्त है, वह प्रभावी रूप से यहूदी अपराधियों को इस सजा से बाहर रखती है।

इजराइल में मृत्युदंड का इतिहास

  • इजराइल में मृत्युदंड कानूनी रूप से मौजूद रहा है, लेकिन इसका उपयोग अत्यंत दुर्लभ है।
  • ऐतिहासिक मामला: इज़राइल के इतिहास में अब तक केवल एक बार मृत्युदंड दिया गया है—1962 में नाजी युद्ध अपराधी एडोल्फ इचमैन (Adolf Eichmann) को फांसी दी गई थी।
  • बदलाव: अब तक आतंकवादी मामलों में ‘सर्वसम्मति’ की शर्त के कारण कभी भी मृत्युदंड नहीं दिया गया था, जिसे इस नए कानून ने हटा दिया है।

अंतरराष्ट्रीय निंदा (International Outcry)

  • यूरोपीय संघ (EU), संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई देशों ने इस कदम को “सभ्यता की पीछे की ओर वापसी” बताया है।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN): यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और ‘नस्लीय अलगाव’ (Apartheid) को बढ़ावा देने वाला बताया है।
  • यूरोपीय देश: इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने एक संयुक्त बयान में इज़राइल से इस कानून को वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने ‘जीवन के अधिकार’ को एक सर्वोच्च मूल्य बताया।
  • फिलिस्तीनी प्राधिकरण: इसे “विधायी कवर के तहत न्यायेतर हत्याओं (Extrajudicial Killings) को वैध बनाने” की कोशिश करार दिया गया है।

LiveLawOrder Observation: तनाव में और बढ़ोत्तरी

यह कानून न केवल इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष को और हिंसक बना सकता है, बल्कि यह इज़राइल के अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ संबंधों को भी तनावपूर्ण बना रहा है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इससे निर्दोष लोगों को फांसी दिए जाने का जोखिम बढ़ जाएगा और यह अंतरराष्ट्रीय संधियों (ICCPR) का उल्लंघन है।

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