Monday, May 18, 2026
HomeSupreme CourtSC on Air India Crash: आपका इस केस में गहरा एजेंडा क्या...

SC on Air India Crash: आपका इस केस में गहरा एजेंडा क्या है?, पहले बताइए…अहमदाबाद विमान हादसे से जुड़ी याचिका पर फटकारा

SC on Air India Crash: सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे (AI 171) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बदलाव की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को सिरे से खारिज कर दिया है।

जांच रिपोर्ट में घटनाओं के पूर्ण क्रम शामिल करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें जांच रिपोर्ट में घटनाओं के पूर्ण क्रम (Complete sequence of events) को शामिल करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर कड़े सवाल उठाते हुए पूछा कि इस मामले में उनका “गहरा एजेंडा” (Deep-rooted agenda) क्या है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: मारे गए लोगों के परिजन चुप, आप क्यों?

  • चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता के वकील को फटकार लगाई।
  • मंशा पर सवाल: “आपका गहरा एजेंडा क्या है? क्या हमें मकसद समझ नहीं आता? जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके परिवार के सदस्य याचिका दायर नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप कर रहे हैं।”
  • प्रतिनिधित्व से इनकार: कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को भी ठुकरा दिया कि अधिकारी उसकी याचिका को केवल एक ‘अभ्यावेदन’ (Representation) के रूप में स्वीकार करें।

मामला क्या था? (The June 2023 Crash)

  • हादसा: 12 जून, 2023 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 (बोइंग 787-8), जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी, टेक-ऑफ के तुरंत बाद एक मेडिकल कॉलेज हॉस्टल परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।
  • भयानक तबाही: विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी, साथ ही जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोग भी मारे गए थे।
  • मांग: याचिकाकर्ता चाहता था कि ‘विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो’ (AAIB) अपनी रिपोर्ट में इंजनों के “फ्लेम आउट” (Flame out) होने का समय और ईंधन स्विच (Fuel switches) के ट्रांज़िशन का विवरण सार्वजनिक करे।

हाई कोर्ट का पिछला आदेश बरकरार

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के 25 फरवरी के उस आदेश पर मुहर लगा दी।
  • RTI का रास्ता: यदि याचिकाकर्ता को जानकारी चाहिए थी, तो उन्हें सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम का सहारा लेना चाहिए था।
  • भ्रामक याचिका: हाई कोर्ट ने इस PIL को “अत्यधिक भ्रामक” (Highly misconceived) करार दिया था।

तकनीकी जानकारी और गोपनीयता

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि जांच ब्यूरो इंजन के तकनीकी डेटा को सार्वजनिक डोमेन में प्रकाशित करे। हालांकि, अदालतों का मानना है कि जांच की संवेदनशील तकनीकी जानकारी को PIL के जरिए सार्वजनिक करने का आदेश नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब पीड़ित पक्ष खुद सामने न आए हों।

निष्कर्ष: अदालती समय का सदुपयोग

सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वे ऐसी जनहित याचिकाओं को हतोत्साहित करना चाहते हैं जिनका उद्देश्य पीड़ितों की मदद के बजाय कोई अन्य व्यक्तिगत या व्यावसायिक “एजेंडा” हो सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील जांच रिपोर्टों में हस्तक्षेप के लिए ठोस आधार और सही कानूनी प्रक्रिया (RTI) का पालन जरूरी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
35 ° C
35 °
35 °
59 %
3.1kmh
0 %
Mon
44 °
Tue
43 °
Wed
45 °
Thu
46 °
Fri
45 °

Recent Comments