Hate Crime Probe: ओडिशा हाई कोर्ट ने एक मुस्लिम युवक के साथ हुई बेरहमी और उसे जबरन ‘जय श्रीराम’ के नारे लगवाने के मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस सावित्री रथ की बेंच ने पीड़ित के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में मांग की गई थी कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच या विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी जाए। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस संवेदनशील मामले की जांच अब DSP (डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) या उससे ऊपर के रैंक के किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में होगी।
विचलित करने वाली घटना (The Viral Horror)
- आरोप: याचिका के अनुसार, आरोपियों ने मुस्लिम युवक को बुरी तरह पीटा, उसके कपड़े उतारकर उसे नग्न अवस्था में सड़क पर घसीटा और उसे जबरन “जय श्रीराम” बोलने के लिए मजबूर किया।
- सोशल मीडिया: इस पूरी घटना का वीडियो बनाया गया और उसे 4 जनवरी, 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
- पुलिस कार्रवाई: वीडियो वायरल होने के बाद बहल्दा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने पर्याप्त धाराएं नहीं लगाईं।
कोर्ट का तर्क: “वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी जरूरी”
- हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित टिप्पणियां कीं।
- वीडियो साक्ष्य: कोर्ट ने नोट किया कि चूंकि घटना का वीडियो बनाया गया और उसे वायरल किया गया, इसलिए यह मामला गंभीर प्रकृति का है।
- निष्पक्ष जांच: “कोर्ट की राय में यह उचित होगा कि इस मामले की जांच की निगरानी DSP या SDPO रैंक से नीचे के अधिकारी द्वारा न की जाए ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।”
- धाराओं का खेल: कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस ने FIR में BNS की धारा 117(2) लगाई थी, लेकिन आरोपियों को पेश करते समय इस धारा को हटा दिया गया।
याचिकाकर्ता की मांग (BNS की नई धाराएं)
- पीड़ित के पिता ने मांग की है कि FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराएं जोड़ी जाएं।
- धारा 111: संगठित अपराध (Organized Crime)।
- धारा 299: हत्या का प्रयास (Murderous attempt/Culpable homicide)।
- धारा 302: स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना।
- धारा 117(4): गंभीर चोट पहुँचाने के विशिष्ट मामले।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विषय | अदालत का निर्देश |
| जांच अधिकारी | DSP / SDPO रैंक का सीनियर ऑफिसर। |
| निगरानी का उद्देश्य | जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना। |
| BNS की धाराएं | वरिष्ठ अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि अपराध की गंभीरता के अनुसार सही धाराएं लगाई जाएं। |
| वीडियो साक्ष्य | सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को मुख्य साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखना। |
निष्कर्ष: कानून के राज का भरोसा
ओडिशा हाई कोर्ट का यह हस्तक्षेप स्पष्ट करता है कि सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाली घटनाओं को न्यायपालिका अत्यंत गंभीरता से लेती है। वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति से अब यह उम्मीद है कि इस ‘नफरती अपराध’ (Hate Crime) के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
IN THE HIGH COURT OF ORISSA AT CUTTACK
CORAM: HON’BLE MISS JUSTICE SAVITRI RATHO
CRLMP No. 283 of 2026
Sk. Hanif
versus
- State of Odisha, represented through it’s Secretary, Home Department, Bhubaneswar
2 Director General and Inspector General of Police, Odisha, Cuttack - Superintendent of Police, Mayurbhanj
- I.I.C., Bahalda Police Station

