Sunday, August 23, 2026
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Lawyers’ Chamber: एसोसिएट होने का मतलब चैंबर पर हक नहीं…कहा- वकीलों के चैंबर अलॉटमेंट कमेटी का फैसला सही है

Lawyers’ Chamber: दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों के चैंबर आवंटन (Chamber Allotment) को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।

हाईकोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने एक वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चैंबर अलॉटमेंट कमेटी (CAC) द्वारा उन्हें चैंबर से बेदखल करने या आवंटन न देने के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई वकील किसी अन्य वरिष्ठ वकील के साथ ‘एसोसिएट’ (Associate) के रूप में चैंबर का उपयोग कर रहा है, तो उस चैंबर पर उसका कोई कानूनी या निहित अधिकार (Vested Right) नहीं बनता है।

मामला क्या था? (The Associate vs. Allottee Dispute)

  • पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता वकील एक अन्य वकील (राजेश नयन) के ‘एसोसिएट’ के रूप में चैंबर नंबर 570 का उपयोग कर रहे थे।
  • विवाद: जब चैंबर खाली करने या आवंटन की बात आई, तो याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन्हें वहां रहने का अधिकार है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उन्होंने मूल आवंटियों (Original Allottees) को कुछ राशि का भुगतान भी किया था।
  • CAC का रुख: कमेटी ने माना कि याचिकाकर्ता केवल एक ‘अनुमति प्राप्त उपयोगकर्ता’ (Permissive User) थे, न कि चैंबर के असली मालिक या आवंटी।

कोर्ट का तर्क: “बिना नियम के कोई अधिकार नहीं”

  • हाई कोर्ट ने चैंबर अलॉटमेंट कमेटी के दृष्टिकोण को सही ठहराया।
  • नीति का अभाव: ऐसी कोई नीति, नियम या विनियम (Regulation) मौजूद नहीं है जो एक एसोसिएट को उस चैंबर पर स्थायी अधिकार देता हो जिसमें वह काम कर रहा है।
  • निहित अधिकार: “रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को केवल एक सहयोगी के रूप में चैंबर का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। अतः उनके पक्ष में कोई ‘निहित अधिकार’ नहीं बनता है।”
  • हस्तक्षेप से इनकार: कोर्ट ने कहा कि वह CAC द्वारा लिए गए प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

पैसों के लेनदेन पर कोर्ट की सलाह

  • याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उन्होंने मूल आवंटियों को पैसे दिए थे।
  • रिकवरी का रास्ता: यदि याचिकाकर्ता ने कोई भुगतान किया है, तो वह उस राशि की वसूली या हर्जाने (Damages) के लिए अलग से कानूनी उपाय (Remedies) अपना सकते हैं।
  • नियमों का उल्लंघन: कोर्ट ने CAC को निर्देश दिया कि यदि मूल आवंटियों ने चैंबर की शर्तों का उल्लंघन कर इसे किसी और को ‘सब-लेट’ (किराये पर देना) किया है, तो उनके खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयअदालत का निर्णय
याचिकाकर्ता की स्थितिकेवल एक ‘एसोसिएट’ या सहायक।
चैंबर पर हककोई कानूनी या निहित अधिकार (Vested Right) नहीं।
CAC की भूमिकाकमेटी का फैसला नियमों के अधीन और सही है।
आगे का रास्तापैसों के विवाद के लिए सिविल सूट या अन्य कानूनी विकल्प खुला है।

निष्कर्ष: चैंबर आवंटन में पारदर्शिता

यह फैसला बार एसोसिएशनों और अदालती परिसरों में चैंबर के अवैध हस्तांतरण या ‘एसोसिएट’ के नाम पर चैंबर पर कब्जा जमाए रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगाता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चैंबर का आवंटन केवल निर्धारित नियमों के तहत ही होगा, न कि आपसी समझ या अनौपचारिक संबंधों के आधार पर।

IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI
CORAM: HON’BLE MR. JUSTICE PURUSHAINDRA KUMAR KAURAV
W.P.(C) 4237/2026
ANJU TANWAR
versus
LAWYERS CHAMBERS ALLOTMENT
COMMITTEE & ORS.

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