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Jaggi Murder Case: 23 साल बाद इंसाफ की गूंज…पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद

Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड (2003) में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने अमित जोगी को धारा 302 और 120-बी (IPC) के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी पाया है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “गलत और आधारहीन फैसला”

  • हाई कोर्ट ने अपने आदेश में निचली अदालत के पुराने फैसले पर कड़ा रुख अपनाया।
  • अवैध निर्णय: “हमारी सुविचारित राय है कि आरोपी अमित जोगी को बरी करने वाला ट्रायल जज का फैसला स्पष्ट रूप से अवैध, गलत, विकृत और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के विपरीत था।”
  • सजा का ऐलान: कोर्ट ने अमित जोगी को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

क्या था रामअवतार जग्गी हत्याकांड? (The 2003 Horror)

  • तारीख: 4 जून, 2003।
  • घटना: छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल के दौरान NCP नेता रामअवतार जग्गी की सरेआम हत्या कर दी गई थी।
  • जांच: पहले राज्य पुलिस और फिर CBI ने मामले की जांच की। CBI ने अमित जोगी सहित कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

कानूनी उतार-चढ़ाव (Legal Timeline)

  • इस मामले ने पिछले 23 वर्षों में कई मोड़ देखे।
  • 2007 (ट्रायल कोर्ट): रायपुर की अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन अमित जोगी को ‘सबूतों के अभाव’ में बरी कर दिया था।
  • CBI की चुनौती: CBI ने इस बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 2011 में तकनीकी कारणों (देरी) से इसे खारिज कर दिया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: पिछले साल (नवंबर 2025), सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ CBI की अपील पर नये सिरे से विचार करे। इसी निर्देश के बाद हाई कोर्ट ने पिछले महीने सुनवाई फिर से शुरू की थी।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयविवरण
दोषीअमित जोगी (अध्यक्ष, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़)।
धाराएं302 (हत्या) और 120-B (साजिश) IPC।
सजाउम्रकैद और जुर्माना।
प्रभाव2007 के बरी करने वाले आदेश को ‘अस्थिर’ (Untenable) मानकर रद्द किया गया।

निष्कर्ष: 23 साल बाद इंसाफ की गूंज

रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार इस मुकाम पर पहुँची है। हाई कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता के रसूख के बावजूद आपराधिक साजिशों से बचा नहीं जा सकता। अमित जोगी के पास अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प शेष है।

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