NCERT Textbook Row: NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” (Corruption in Judiciary) उप-अध्याय को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच के सामने उन तीन विशेषज्ञों (सुपर्णा दिवाकर, मिशेल डैनिनो और आलोक प्रसन्ना कुमार) ने अपना पक्ष रखा, जिन्होंने विवादित चैप्टर तैयार किया था। इस मामले में शामिल तीन प्रमुख शिक्षाविदों ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कोर्ट की पिछली टिप्पणियों ने उनकी शैक्षणिक विश्वसनीयता (Credibility) पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है।
शिक्षाविदों का तर्क: “सामूहिक जिम्मेदारी” (Collective Responsibility)
- वरिष्ठ वकील जे. साई दीपक और गोपाल शंकरनारायणन ने शिक्षाविदों की ओर से दलीलें दीं।
- कोई अकेला जिम्मेदार नहीं: कोर्ट को बताया गया कि पाठ्यपुस्तक में किसी विषय को शामिल करना एक ‘सामूहिक प्रक्रिया’ होती है। इसमें किसी एक व्यक्ति का अंतिम फैसला नहीं होता, बल्कि पूरी टीम और NCERT की कमेटियां मिलकर निर्णय लेती हैं।
- विश्वसनीयता पर सवाल: वकीलों ने कहा कि कोर्ट द्वारा इन शिक्षाविदों को भविष्य के किसी भी सरकारी शैक्षणिक कार्य से ‘ब्लैकलिस्ट’ करने के निर्देश ने उनकी साख को भारी नुकसान पहुँचाया है।
- NEP का हवाला: यह भी तर्क दिया गया कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा 6 और 7 की किताबों में भी विधायिका (Legislature) और चुनाव आयोग (ECI) जैसी संस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई है।
नई ‘हाई-पावर’ कमेटी का गठन
- सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने और भविष्य का पाठ्यक्रम तय करने के लिए एक उच्च-स्तरीय ढांचा तैयार किया है।
- तीन सदस्यीय समिति: जस्टिस इंदु मल्होत्रा (पूर्व SC जज), वरिष्ठ वकील के.के. वेणुगोपाल और प्रकाश सिंह (VC, गढ़वाल यूनिवर्सिटी) की कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी ‘नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी’ के साथ मिलकर कक्षा 8 और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए ‘लीगल स्टडीज’ का सिलेबस फाइनल करेगी।
- व्यापक जांच: कोर्ट ने साफ किया कि NCERT की 20 सदस्यीय नई कमेटी केवल कक्षा 8 के विवादित चैप्टर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पाठ्यक्रम के सभी प्रासंगिक पहलुओं की व्यापक जांच करेगी।
अब तक क्या हुआ? (The Timeline of Conflict)
- 11 मार्च, 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को आदेश दिया था कि वे इन तीन शिक्षाविदों को किसी भी सरकारी फंडिंग वाले शैक्षणिक कार्य से तुरंत अलग (Disassociate) कर दें।
- कारण: कोर्ट ने “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय के ‘चयनात्मक समावेश’ (Selective Inclusion) पर कड़ा एतराज जताया था और इसे न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप माना था।
- NCERT की माफी: NCERT ने इस मामले में माफी मांगी थी और विवादित किताब पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया गया है।
- कारण बताओ नोटिस: शिक्षा मंत्रालय के सचिव और NCERT निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को अवमानना (Contempt) का नोटिस जारी किया गया है।
कार्यवाही के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| पक्ष | मुख्य दलील / निर्देश |
| शिक्षाविद | यह एक टीम वर्क था; हमारी साख दांव पर लगी है। |
| सुप्रीम कोर्ट | कमेटी का दायरा बढ़ाएं; केवल एक चैप्टर नहीं, पूरे ढांचे की समीक्षा हो। |
| NCERT | 2 अप्रैल को नई सिलेबस कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। |
| अगला कदम | कोर्ट शिक्षाविदों द्वारा दाखिल किए गए स्पष्टीकरण की जांच करेगा। |
निष्कर्ष: अभिव्यक्ति की आजादी बनाम संस्थान की गरिमा
यह मामला इस बहस को जन्म देता है कि स्कूली किताबों में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना किस सीमा तक होनी चाहिए। जहाँ शिक्षाविद इसे ‘पेडागोजी’ (Pedagogy) और पारदर्शिता का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट इसे न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुँचाने वाला और प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण मान रहा है।

