Monday, August 31, 2026
HomeLatest NewsDivorce Ruling: वैवाहिक विवादों में कानून का इस्तेमाल हथियार के रूप में...

Divorce Ruling: वैवाहिक विवादों में कानून का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया…देखिए कोर्ट ने यह फैसला दिया

Divorce Ruling: कलकत्ता हाई कोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि वैवाहिक विवादों में कानून का इस्तेमाल हथियार के रूप में (Misuse of Law) नहीं किया जाना चाहिए।

पत्नी द्वारा दायर अपील खारिज

कलकत्ता हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जीवनसाथी के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज करना और उनके चरित्र पर निराधार आरोप लगाना ‘मानसिक क्रूरता’ (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है। अदालत ने इसी आधार पर एक पति को दी गई तलाक की डिक्री को बरकरार रखा है। झूठे आरोपों के माध्यम से किसी के सामाजिक और मानसिक जीवन को नष्ट करना कानूनन अपराध और क्रूरता है, जो वैवाहिक संबंधों को खत्म करने का वैध आधार बनता है। जस्टिस सव्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की बेंच ने पत्नी द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 2021 के तलाक के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट उस स्तर पर पहुँच गई है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं है।

झूठे आरोपों का जाल (False Allegations)

  • अदालत ने पाया कि पत्नी ने पति और उसके परिवार को परेशान करने के लिए सुनियोजित प्रयास किए।
  • निराधार शिकायतें: पत्नी ने पति के खिलाफ एक के बाद एक कई आपराधिक मामले दर्ज कराए, जिनमें पति बाद में बेगुनाह (Acquitted) साबित हुआ।
  • चरित्र हनन: पत्नी ने पति पर परिवार की ही एक महिला सदस्य के साथ अवैध संबंध होने के गंभीर लेकिन अपुष्ट (Unsubstantiated) आरोप लगाए।
  • कोर्ट की टिप्पणी: “पत्नी और उसके परिवार का निरंतर प्रयास पति के परिवार को बदनाम करना और उन्हें मानसिक पीड़ा देना था। यह ‘मानसिक क्रूरता’ के दायरे में आता है।”

“विवाह की शेल्फ-लाइफ खत्म” (Irretrievable Breakdown)

  • कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि दोनों पक्ष 17 वर्षों से अलग रह रहे हैं।
  • कानूनी स्थिति: हालांकि ‘शादी का पूरी तरह से टूट जाना’ (Irretrievable Breakdown) सीधे तौर पर हिंदू विवाह अधिनियम में तलाक का आधार नहीं है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब परिस्थितियां इतनी खराब हो जाएं, तो वह ‘क्रूरता’ के दायरे में आ जाता है।
  • तर्क: “पार्टियों के बीच की दरार ‘पॉइंट ऑफ नो रिटर्न’ पर पहुँच गई है। इस शादी की ‘शेल्फ-लाइफ’ बहुत पहले ही खत्म हो चुकी है।”

स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) पर रुख

  • पत्नी को फिलहाल स्थायी गुजारा भत्ता देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया, लेकिन एक तकनीकी रास्ता खुला रखा।
  • आवेदन की कमी: कोर्ट ने नोट किया कि पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत गुजारा भत्ते के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं दिया था।
  • स्वतंत्रता: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी भविष्य में सक्षम सिविल कोर्ट में उचित आवेदन के माध्यम से स्थायी गुजारा भत्ते की मांग करने के लिए स्वतंत्र है।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयअदालत का निष्कर्ष
मुख्य आधारझूठी एफआईआर और चरित्र पर लांछन लगाना ‘क्रूरता’ है।
अलगाव की अवधि17 साल का लंबा अलगाव शादी के अंत का संकेत है।
धारा 13(1)(ia)हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति तलाक का हकदार है।
नतीजाअपील खारिज; तलाक की डिक्री बरकरार।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
29 ° C
29 °
29 °
89 %
2.6kmh
99 %
Sun
30 °
Mon
34 °
Tue
32 °
Wed
27 °
Thu
29 °

Recent Comments