Bank Account Freeze: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज (Freeze) करने की पुलिसिया शक्ति पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहतकारी फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की डिवीजन बेंच ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस आधार के पूरा खाता फ्रीज कर देना नागरिकों की आजीविका और उनके अधिकारों पर सीधा हमला है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी मामले की जांच के नाम पर पूरा बैंक खाता ब्लॉक नहीं कर सकती; केवल उतनी ही राशि रोकी जा सकती है जिस पर संदेह हो।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| निर्देश | समय सीमा / विवरण |
| बैंकों के लिए | आदेश मिलने के 1 सप्ताह के भीतर केवल संदिग्ध राशि पर रोक लगाएं और बाकी खाता खोलें। |
| खाताधारकों के लिए | यदि नियम (BNSS की धारा 106) का उल्लंघन हुआ है, तो मजिस्ट्रेट से राहत मांग सकते हैं। |
| कानूनी प्रावधान | BNSS की धारा 106 और 107 के तहत शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। |
| उद्देश्य | साइबर अपराध की जांच और आम नागरिक की आर्थिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना। |
कोर्ट का मुख्य निर्णय: ‘ब्लैंकेट फ्रीजिंग’ पर रोक
- अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं की व्याख्या की।
- सीमित शक्ति: जब पुलिस किसी अपराध की जांच करती है, तो जब्ती (Seizure) की शक्ति केवल उस राशि तक सीमित है जिसका संबंध संदिग्ध अपराध से हो।
- बाकी पैसा सुरक्षित: यदि खाते में ₹1 लाख हैं और संदेह केवल ₹10,000 पर है, तो पुलिस बाकी के ₹90,000 के लेन-देन को नहीं रोक सकती।
- मजिस्ट्रेट को सूचना: पुलिस द्वारा की गई किसी भी ऐसी जब्ती की जानकारी संबंधित मजिस्ट्रेट को देना अनिवार्य है।
खाताधारकों और बैंकों के लिए नए नियम
- अदालत ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं।
- Lien (ग्रहणाधिकार): बैंक केवल उसी राशि पर ‘Lien’ (रोक) लगाएंगे जो जांच एजेंसी ने बताई है। बाकी की राशि का उपयोग खाताधारक सामान्य रूप से कर सकेगा।
- ग्राहक को सूचना: बैंक को खाता फ्रीज करने के तुरंत बाद ग्राहक को इसकी सूचना देनी होगी। इसमें फ्रीज करने का कारण और खाते की वर्तमान स्थिति की जानकारी होनी चाहिए।
- पुलिस की जिम्मेदारी: पुलिस को बैंकों को निर्देश देते समय स्पष्ट रूप से उस राशि का उल्लेख करना होगा जो अपराध से जुड़ी मानी जा रही है।
क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का समाधान
कोर्ट ने एक बड़ी राहत देते हुए साफ किया कि यदि किसी का खाता गलत तरीके से फ्रीज हुआ है, तो वह उसी स्थान के मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है जहाँ उसका बैंक खाता स्थित है। इसके लिए उसे उस शहर या राज्य में जाने की जरूरत नहीं है जहाँ से विवादित ट्रांजेक्शन (Transaction) शुरू हुआ था।
आम आदमी को बड़ी राहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके खाते छोटी-मोटी संदिग्ध गतिविधियों के कारण पूरी तरह ब्लॉक कर दिए जाते थे, जिससे उनकी सैलरी, पेंशन और दैनिक खर्चे रुक जाते थे। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि “जांच के नाम पर प्रताड़ना” स्वीकार्य नहीं है।

