Wednesday, October 28, 2026
HomeHigh Courtkicking advocate: वकील को लात मारने की सजा पुलिस को मिली… हाईकोर्ट...

kicking advocate: वकील को लात मारने की सजा पुलिस को मिली… हाईकोर्ट बोला-अब आप सब-इंस्पेक्टर पद पर से ही रिटायर होंगी, पढ़ें फैसला

kicking advocate: कर्नाटक हाई कोर्ट ने पुलिस बर्बरता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बेंगलुरु की एक महिला सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच ने वकील नबोनिता सेन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर पद्मावती के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पुलिस अधिकारी के आचरण को “अक्षम्य” बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी द्वारा किसी नागरिक को “लात मारना” केवल विभागीय जांच का विषय नहीं, बल्कि एक अपराध है।

घटना की पृष्ठभूमि (Road Rage to Police Assault)

  • तारीख: 23-24 फरवरी 2025 की दरम्यानी रात।
  • विवाद: वकील नबोनिता सेन के साथ सड़क पर छेड़छाड़ (Road Rage) हुई, जिसमें उनके कार का शीशा तोड़ दिया गया। वह रिपोर्ट दर्ज कराने मडिवाला पुलिस स्टेशन पहुंचीं।
  • स्टेशन पर हंगामा: आरोप है कि दो घंटे इंतजार कराने के बाद सेन उत्तेजित हो गईं और उन्होंने पुलिस डेस्क से कागज और अन्य सामान फेंक दिए।
  • बर्बरता: नाइट पेट्रोलिंग से लौटीं सब-इंस्पेक्टर पद्मावती ने कथित तौर पर सेन के साथ मारपीट की और उन्हें लात मारी, जो सीसीटीवी में कैद हो गया।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: बिना किसी कारण के लात मारी

  • जस्टिस नागप्रसन्ना ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया।
  • सीसीटीवी का प्रमाण: फुटेज स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पद्मावती ने याचिकाकर्ता के शरीर के सभी हिस्सों पर बिना किसी तुक या कारण के लात मारी।
  • सजा का संदेश: यह एक ऐसा मामला है जहाँ अधिकारी को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्हें कोई प्रमोशन नहीं दिया जाएगा; यदि वह सब-इंस्पेक्टर हैं, तो सब-इंस्पेक्टर के रूप में ही रिटायर होंगी।
  • विभागीय जांच काफी नहीं: कोर्ट ने कहा कि केवल विभागीय चेतावनी पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध दर्ज कर जांच होनी चाहिए।

कानूनी पेंच: दोनों तरफ से मुकदमे

  • वर्तमान स्थिति में कानूनी समीकरण काफी जटिल हो गए हैं।
  • वकील पर मामला: पुलिस ने सेन के खिलाफ ‘सरकारी काम में बाधा डालने’ (BNS की धारा 121, 132, 351) का मामला दर्ज किया था।
  • पुलिस पर मामला: अब कोर्ट के आदेश के बाद सब-इंस्पेक्टर पर भी आपराधिक मुकदमा चलेगा।
  • कोर्ट का रुख: जज ने सेन के खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया, लेकिन पुलिस की बर्बरता पर भी बराबर की कार्रवाई का आदेश दिया।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
न्यायाधीशजस्टिस एम. नागप्रसन्ना।
आरोपी अधिकारीसब-इंस्पेक्टर पद्मावती (मडिवाला पुलिस स्टेशन)।
अगली सुनवाई5 जून, 2026 (पुलिस को जांच रिपोर्ट पेश करनी होगी)।
संवैधानिक संदेशवर्दी कानून से ऊपर नहीं है; नागरिक के साथ मारपीट पर सख्त दंड अनिवार्य है।

वर्दी की मर्यादा

यह मामला कानून के रक्षकों द्वारा कानून को हाथ में लेने का उदाहरण है। हाई कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि भले ही नागरिक ने पुलिस स्टेशन में हंगामा किया हो, पुलिस के पास उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने या लात मारने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। पुलिस का काम नियंत्रण करना है, बदला लेना नहीं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
30.2 ° C
30.2 °
30.2 °
49 %
2.2kmh
100 %
Wed
30 °
Thu
22 °
Fri
22 °
Sat
27 °
Sun
29 °

Recent Comments