Perarivalan Story : पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में सजा काट चुके ए.जी. पेरारिवलन ने अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत की है।
ए.जी. पेरारिवलन तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में अपना नामांकन (Enrollment) कराया है। अब वे मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करेंगे। पेरारिवलन, जिन्हें 19 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था और जिन्होंने जेल की सलाखों के पीछे लगभग 31 साल बिताए, अब काले कोट में कोर्ट रूम के अंदर नजर आएंगे।
शिक्षा और नामांकन (Education & Enrollment)
- LLB और AIBE: मई 2022 में जेल से रिहा होने के तुरंत बाद पेरारिवलन ने LLB कोर्स में दाखिला लिया था। उन्होंने 2025 में ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) सफलतापूर्वक पास किया।
- नामांकन: सोमवार को बार काउंसिल में औपचारिक नामांकन के साथ ही वे अब कानूनी रूप से वकालत करने के पात्र हो गए हैं।
कानूनी संघर्ष की पृष्ठभूमि (The Long Legal Battle)
- पेरारिवलन का मामला भारतीय न्यायपालिका में ‘अनुच्छेद 142’ के उपयोग और राज्यपाल की शक्तियों पर एक मिसाल बन गया है।
- गिरफ्तारी और सजा: उन्हें 1991 में बम बनाने में मदद करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी।
- मृत्युदंड का उम्रकैद में बदलना: 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिकाओं के निपटारे में अत्यधिक देरी के आधार पर उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
- ऐतिहासिक रिहाई (मई 2022): सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल. नागेश्वर राव, बी.आर. गवई और ए.एस. बोपन्ना की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया था।
राज्यपाल और राष्ट्रपति का विवाद (The Constitutional Deadlock)
- पेरारिवलन की रिहाई में देरी का मुख्य कारण संवैधानिक अंगों के बीच असहमति थी।
- तमिलनाडु कैबिनेट ने 2018 में ही उन्हें रिहा करने की सिफारिश की थी।
- राज्यपाल ने फाइल को राष्ट्रपति के पास भेज दिया था, यह कहते हुए कि केवल राष्ट्रपति ही माफी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं।
- सुप्रीम कोर्ट का रुख: कोर्ट ने माना कि राज्यपाल को कैबिनेट की सलाह माननी चाहिए थी और देरी के कारण कोर्ट को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा।
केस के मुख्य बिंदु (Key Milestones)
| वर्ष | घटनाक्रम |
| 1991 | 19 साल की उम्र में गिरफ्तारी। |
| 2014 | सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया। |
| 2022 | अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्ण रिहाई। |
| 2025 | ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE) पास की। |
| 2026 | 27 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट के वकील के रूप में नामांकन। |
पुनर्वास का एक उदाहरण
पेरारिवलन का वकील बनना भारतीय कानूनी व्यवस्था में ‘सुधारात्मक न्याय’ (Reformative Justice) का एक सशक्त उदाहरण है। तीन दशक से अधिक समय जेल में बिताने के बाद, उन्होंने न केवल अपनी शिक्षा पूरी की बल्कि अब वे उसी न्यायिक प्रणाली का हिस्सा बन गए हैं जिसने उन्हें कभी दोषी ठहराया था और बाद में रिहा भी किया। उनकी वकालत की शुरुआत सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

