Concrete Outcomes: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने वैश्विक मंच पर भारतीय न्यायपालिका और वकीलों के भविष्य को लेकर एक बेहद मजबूत विजन साझा किया है।
ऑक्सफोर्ड यूनियन (Oxford Union) में संवाद के दौरान दिया वकत्वय
मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनियन (Oxford Union) में एक संवाद के दौरान सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा कि वे कानूनी पेशे (Legal Profession) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और उन्हें लंबे समय तक इस पेशे में बनाए रखने के लिए केवल कागजी बातें नहीं कर रहे, बल्कि जमीन पर ठोस नतीजे (Concrete Outcomes) लाकर दिखाएंगे। न्यायशास्त्र और आधुनिक तकनीक पर बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बार (वकीलों) और बेंच (जजों) दोनों स्तरों पर बुनियादी सुधारों, अदालतों में लंबित मामलों (Pendency) और युवा वकीलों की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी।
मैं नीति बनाना भी जानता हूं और नतीजे देना भी
जब ऑक्सफोर्ड में सीजेआई सूर्य कांत से महिला वकीलों को कानूनी पेशे में बनाए रखने (Retention) और उन्हें आगे बढ़ाने (Advancement) को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने माना कि हाल के वर्षों में लॉ कॉलेजों से बड़ी संख्या में महिलाएं डिग्री लेकर निकल तो रही हैं, लेकिन बार (वकालत) में वे लंबे समय तक करियर नहीं टिका पातीं। सीजेआई ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा, मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो केवल बयानबाजी करता है। मैं यह भी जानता हूं कि इन चीजों से कैसे निपटना है। मैं इस पर काम कर रहा हूं और इसके परिणाम दिखाऊंगा। मैं एक ऐसा मजबूत तंत्र (Robust Mechanism) तैयार करूंगा जिसके तहत महिलाएं न केवल इस पेशे में शामिल होंगी, बल्कि लंबे समय तक टिकी रहेंगी, अपनी वास्तविक व्यावसायिक क्षमता का निर्माण करेंगी और कानूनी पेशे में अपनी योग्यता साबित करेंगी।
जज के रूप में महिलाओं की हिस्सेदारी: 26% से 46% तक का सफर
सीजेआई ने देश की अदालतों (Bench) में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के सकारात्मक आंकड़े साझा किए।
निचली न्यायपालिका में क्रांति: सीजेआई ने पंजाब और हरियाणा में न्यायिक चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि वहां महिला न्यायिक अधिकारियों का प्रतिशत 26-27 प्रतिशत से बढ़कर 46 प्रतिशत हो गया था। आज कई राज्यों में जिला न्यायपालिका में महिलाएं लगभग 47-48 प्रतिशत हैं।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति: उन्होंने गर्व से उल्लेख किया कि उन्होंने सीजेआई के रूप में अपने पहले ही कार्यकाल में जस्टिस वी. मोहना को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत (Elevate) किया है।
असली चुनौती ‘बार’ (Bar Side) में है: 50% आरक्षण का फॉर्मूला
सीजेआई ने कहा, न्यायपालिका (Judges) में तो सुधार दिख रहा है, लेकिन वकालत करने वाली महिला वकीलों के लिए माहौल अभी भी चुनौतीपूर्ण है। इस साल की शुरुआत में बेंगलुरु में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के एक सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया।
सरकारी वकीलों में भागीदारी: महिला वकीलों को आर्थिक और पेशेवर स्थिरता देने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सरकारी वकीलों और सरकारी कानूनी अधिकारियों (Government Counsels) की नियुक्तियों में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाए।
कड़ी चेतावनी: सीजेआई ने कहा कि बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए आरक्षण के निर्देशों को यदि पूरी शिद्दत और ईमानदारी से लागू नहीं किया गया, तो कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
सदियों नहीं लगेंगे, इसी साल कम करके दिखाऊंगा मुकदमों का बोझ
अदालतों में लंबित करोड़ों मुकदमों (Case Pendency) के सवाल पर सीजेआई सूर्य कांत ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जाता है कि भारत में बैकलॉग खत्म होने में सदियों लग जाएंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा पेंडेंसी पूरी तरह से ‘प्रबंधन योग्य’ (Manageable) है।
जजों की संख्या बढ़कर 38 हुई: सीजेआई ने बताया कि उनके अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को बढ़ाकर अब 38 कर दिया गया है।
निपटारे के नए तरीके: मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए एक जैसे मामलों को एक साथ जोड़कर (Grouping) एक ही फैसले से निपटाया जा रहा है। इसके अलावा मध्यस्थता (Mediation) और एक ‘राष्ट्रीय न्यायिक नीति’ (National Judicial Policy) पर काम चल रहा है।
नया मुकदमा ‘एरियर’ (Arrear) नहीं: उन्होंने तकनीकी अंतर समझाते हुए कहा कि कोर्ट में फाइल होते ही केस पेंडेंसी में दिखने लगता है, जबकि शुरुआती प्रक्रियाओं (नोटिस जारी करना, जवाब दाखिल करना) में वक्त लगता है। वास्तविक पेंडेंसी इतनी डरावनी नहीं है। सीजेआई ने वादा किया कि इस साल के अंत तक वे ऐसे प्रमाणित आंकड़े पेश करेंगे जो भविष्य के लिए बेंचमार्क बनेंगे।
युवा वकीलों और सबरीमाला केस की तारीफ
मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट में युवा वकीलों (Young Lawyers) द्वारा दी जा रही उच्च गुणवत्ता वाली कानूनी सहायता की जमकर तारीफ की। उन्होंने हाल ही में सबरीमाला मामले में 9 जजों की बेंच के सामने हुई सुनवाई का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के चोटी के वरिष्ठ वकीलों की मौजूदगी के बावजूद, दोनों पक्षों के युवा अधिवक्ताओं ने जिस असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वह बेहद उत्साहजनक और दिल को छू लेने वाला था।
विश्लेषण: सीजेआई के भाषण के मुख्य बिंदु और उनका महत्व
| विषय | मुख्य घोषणा / स्टैंड | न्यायपालिका पर इसका सीधा प्रभाव |
| महिला वकील | 50% सरकारी वकील बनाने का सुझाव और बार काउंसिल में अनिवार्य आरक्षण। | महिला वकीलों को केस और वित्तीय स्थिरता मिलेगी, जिससे वे ड्रॉप-आउट नहीं होंगी। |
| केस पेंडेंसी | जजों की संख्या 38 की गई, मुकदमों की ग्रुपिंग और कंक्रीट डेटा का वादा। | न्याय की रफ्तार तेज होगी और ‘तारीख पर तारीख’ के ढर्रे में सुधार आएगा। |
| युवा वकील | सुप्रीम कोर्ट में युवा वकीलों को तरजीह और उनके टैलेंट को प्रोत्साहन। | वकालत में चल रहे ‘सीनियर-विशेषाधिकार’ (Senior Elite Culture) का प्रभाव कम होगा। |

