Jewar Airport: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की बेंच ने गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण को पूरी तरह वैध ठहराया है।
कोर्ट ने किसानों की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013’ के सभी नियमों का पालन करते हुए की गई है। एयरपोर्ट के दूसरे और तीसरे चरण (Phase II & III) के विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई जमीन को चुनौती देते हुए 12 किसानों ने याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि यह उनके संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 300A) का उल्लंघन है।
कोर्ट का मुख्य निर्णय (Key Verdict)
- अदालत ने अधिग्रहण प्रक्रिया की बारीकी से जांच करने के बाद निष्कर्ष निकाले।
- कानूनी वैधता: कोर्ट ने पाया कि अनिवार्य सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA), जनसुनवाई, सहमति की आवश्यकता और उचित मुआवजे जैसे सभी वैधानिक चरणों का पालन किया गया है। इसलिए, इसे अनुच्छेद 300-A का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
- निजी बनाम सार्वजनिक हित: कोर्ट ने टिप्पणी की, “अधिग्रहण से प्रभावित व्यक्ति अक्सर खुश नहीं होते, लेकिन जनहित के बड़े प्रोजेक्ट्स को हल्के में रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट को उन ‘खामोश’ लोगों (जनता) के हितों का भी ध्यान रखना होगा जो इस प्रोजेक्ट के असली लाभार्थी हैं।”
आबादी (Residential) जमीन पर विशेष निर्देश
- किसानों की मुख्य चिंता कृषि भूमि को लेकर नहीं, बल्कि उनके घर और बस्तियों (Abadi area) के विस्थापन को लेकर थी। इस पर कोर्ट ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
- पुनर्वास पहले, कब्जा बाद में: हाई कोर्ट ने साफ कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था’ (R&R) योजना पूरी तरह लागू हो।
- विकसित प्लॉट: आवासीय जमीनों का कब्जा तभी लिया जाए जब प्रभावित परिवारों को विकसित प्लॉट आवंटित कर दिए जाएं और पुनर्वास के सभी उपाय पूरे कर लिए जाएं।
मुआवजे का विकल्प खुला है
- कोर्ट ने नोट किया कि मुआवजे का निर्धारण (Award) पहले ही किया जा चुका है और वितरण भी शुरू हो गया है।
- बढ़ा हुआ मुआवजा: यदि किसान मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं हैं, तो उनके पास संबंधित अथॉरिटी के सामने औपचारिक चुनौती देकर ‘बढ़ा हुआ मुआवजा’ मांगने का कानूनी विकल्प अभी भी खुला है।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| प्रोजेक्ट | नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), विस्तार चरण-2 और 3। |
| याचिकाकर्ता | 12 किसान (गौतम बुद्ध नगर)। |
| प्रतिवादी | उत्तर प्रदेश सरकार और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA)। |
| कानूनी आधार | भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 (LARR Act)। |
| मुख्य निर्देश | पुनर्वास (Rehabilitation) के बिना आवासीय क्षेत्र का कब्जा न लिया जाए। |
बुनियादी ढांचे के विकास को हरी झंडी
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला नोएडा एयरपोर्ट के समय पर विस्तार के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अदालत ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता, बशर्ते प्रभावित किसानों को कानून के तहत मिलने वाले पुनर्वास और मुआवजे के हक से वंचित न किया जाए।

