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Women Lawyers: जेब से खर्च करने को रहें तैयार…महिला वकीलों को महिला दिवस मनाने पर किया था सस्पेंड, पलटा बार एसो. का फरमान

Women Lawyers: कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की बेंच ने बार एसोसिएशन के इस कदम को “दमनकारी” (Predatory) करार दिया और एसोसिएशन के सचिव को कड़ी फटकार लगाई।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मांड्या जिले के के.आर. पेट बार एसोसिएशन (KR Pete Bar Association) द्वारा चार महिला वकीलों के निलंबन पर अंतरिम रोक लगा दी है। इन महिला वकीलों को कथित तौर पर अदालत परिसर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम आयोजित करने के कारण निलंबित किया गया था। यह मामला तब शुरू हुआ जब 9 मार्च, 2026 को महिला वकीलों ने कानूनी सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) के सहयोग से एक कार्यक्रम आयोजित किया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अगले ही दिन चार वकीलों एस.डी. सरोजम्मा, एम.एन. वाणी, के. मंजुला और राम्या एच.आर. को 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी और सचिव को फटकार

  • जस्टिस मगदुम ने सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन के सचिव के व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताई।
  • निजी खर्च की चेतावनी: जज ने मौखिक रूप से कहा, “बार एसोसिएशन के सचिव कौन हैं? उन्हें क्या दिक्कत है? मैं इस याचिका को मंजूर करूँगा और आदेश दूँगा कि सचिव अब से हर साल अपनी जेब से पैसे खर्च कर महिला दिवस समारोह आयोजित करें।”
  • दमनकारी कार्रवाई: कोर्ट ने कहा कि केवल महिला दिवस मनाने के आधार पर सदस्यता निलंबित करना प्रथम दृष्टया एक दमनकारी कार्रवाई प्रतीत होती है।

बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने का आरोप

  • याचिकाकर्ताओं के वकील एम.एस. नागराजा ने कोर्ट को कुछ गंभीर स्थितियों से अवगत कराया।
  • मानवीय गरिमा का हनन: यह आरोप लगाया गया कि एसोसिएशन न केवल उन्हें अदालत में पेश होने से रोक रहा था, बल्कि उन्हें वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं का उपयोग करने से भी वंचित कर दिया गया था।
  • मनमाना फैसला: वकीलों का दावा है कि निलंबन का फैसला अध्यक्ष और सचिव ने बिना किसी कार्यकारी समिति की बैठक बुलाए, बिना किसी कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) दिए और बिना सुनवाई का मौका दिए “एकतरफा” तरीके से लिया था।

विवाद की जड़: ‘परमिशन’ और ‘प्रोफेशनल ईगो’

  • एसोसिएशन का तर्क: बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का दावा था कि कार्यक्रम के लिए उनसे पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और उन्हें आमंत्रित भी नहीं किया गया था।
  • अदालत का रुख: कोर्ट ने पाया कि फोटो और रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट है कि वकीलों को केवल एक सकारात्मक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए दंडित किया जा रहा था।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्ताएस.डी. सरोजम्मा, एम.एन. वाणी, के. मंजुला और राम्या एच.आर.
एसोसिएशनके.आर. पेट बार एसोसिएशन, मांड्या।
कोर्ट का आदेशनिलंबन पर तत्काल रोक; सभी सुविधाएं बहाल करने का निर्देश।
घटना की तारीखमहिला दिवस कार्यक्रम (9 मार्च); निलंबन (10 मार्च)।
प्रमुख संदेशवकील एसोसिएशन अपनी शक्तियों का उपयोग सदस्यों को प्रताड़ित करने के लिए नहीं कर सकते।

बार एसोसिएशनों के लिए एक कड़ा सबक

कर्नाटक हाई कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि बार एसोसिएशन कोई ‘निजी क्लब’ नहीं हैं जहाँ पदाधिकारी अपनी मर्जी से किसी का भी करियर या सम्मान दांव पर लगा सकें। महिला दिवस जैसे आयोजन समाज और कानूनी समुदाय के लिए गर्व का विषय होने चाहिए। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सुनवाई की अगली तारीख तक इन महिला वकीलों को प्रैक्टिस करने या बार रूम की सुविधाओं का उपयोग करने से कोई नहीं रोकेगा।

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