Noise Pollution: गुजरात हाई कोर्ट जस्टिस बी. डी. कारिया और जस्टिस एल. एस. पीरजादा की बेंच ने ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) के मुद्दे पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Court) का मामला चलाया जाएगा। यह मामला एडवोकेट अमित पांचाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकरों के अवैध उपयोग और बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जताई गई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 20 साल बाद भी वही हाल
- अदालत ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कुछ कड़वे सच सामने रखे।
- 20 साल का इंतजार: कोर्ट ने कहा कि यह “बेहद दर्दनाक” है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिशानिर्देश जारी किए जाने के 20 साल बाद भी गुजरात में ध्वनि प्रदूषण की समस्या वैसी ही बनी हुई है।
- मूक दर्शक नहीं: बेंच ने स्पष्ट किया कि कोर्ट निर्देशों की ऐसी “पूर्ण अवहेलना” को मूक दर्शक बनकर नहीं देख सकता, जबकि नागरिक इससे पीड़ित हो रहे हैं।
प्रशासन की नाकामी: सिर्फ कागजी कार्रवाई
- कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2024 और 2025 में जारी किए गए SOPs और अधिसूचनाओं (Notifications) का जिक्र किया।
- कागजी कार्यान्वयन: कोर्ट ने सितंबर 2025 की एक पुरानी टिप्पणी को दोहराया कि नियमों का कार्यान्वयन केवल कागजों तक सीमित है।
- लापरवाह अनुमतियां: अधिकारी बिना किसी जाँच के लाउडस्पीकरों और DJ ट्रकों के लिए धड़ल्ले से अनुमतियाँ जारी कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक उपकरण जब्त करने के बजाय उन्हें छूट दी जा रही है।
अधिकारियों की उपस्थिति और आश्वासन
- सुनवाई के दौरान गृह सचिव निपुण तोरणे और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) के अध्यक्ष आर. बी. बराड वर्चुअली पेश हुए।
- कड़ी अनुपालन का वादा: अधिकारियों ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राज्य की अधिसूचनाओं का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
- रिपोर्ट की मांग: कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए अधिकारियों से एक “विस्तृत रिपोर्ट” मांगी है कि नियमों को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| प्रतिबंधित समय | रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक (Night Hours)। |
| दोषी अधिकारी | उल्लंघन होने पर पुलिस और संबंधित अधिकारियों पर ‘क्रिमिनल कंटेंट’ का खतरा। |
| कोर्ट का आदेश | राज्य सरकार को विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। |
| अगली सुनवाई | 18 जून, 2026। |
शांति का अधिकार बनाम शोर
गुजरात हाई कोर्ट का यह रुख उन नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत है जो रात के समय तेज आवाज और लाउडस्पीकरों से परेशान हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि धार्मिक या सामाजिक आयोजनों के नाम पर कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वे 18 जून तक कोर्ट को अपनी रिपोर्ट में क्या ठोस बदलाव दिखाते हैं।

