Trademark application: पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (CGPDTM) कार्यालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को एक चौंकाने वाली जानकारी दी है।
आरटीआई (RTI) अपील की सुनवाई
सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी के समक्ष एक आरटीआई (RTI) अपील की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई। कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि ट्रेडमार्क आवेदनों के निपटारे के लिए कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित नहीं है और न ही इस प्रक्रिया के लिए समयसीमा वाली कोई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अस्तित्व में है। यह मामला ट्रेडमार्क विरोध (Opposition) के मामलों में होने वाली कथित देरी और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं से जुड़ा है। एक अपीलकर्ता ने आरटीआई के जरिए पूछा था कि उसके मामले में काउंटर-स्टेटमेंट दाखिल करने के 10 महीने बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि अन्य मामलों को जल्दी निपटा दिया गया।
विभाग की दलील: कार्यभार और नियम
- सुनवाई के दौरान ट्रेडमार्क कार्यालय (प्रतिवादी) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
- विशाल कार्यभार: विभाग ने कहा कि उन्हें बहुत बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं।
- समय सीमा का अभाव: आधिकारिक तौर पर ट्रेडमार्क आवेदनों को निपटाने के लिए कोई फिक्स्ड टाइम लिमिट नहीं है।
- SOP की कमी: विभाग ने स्वीकार किया कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय करने वाली कोई SOP फिलहाल नहीं है।
CIC के कड़े निर्देश
- आयोग विभाग के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित आदेश दिए।
- संशोधित जवाब: विभाग को एक नया और विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
- औसत समय का डेटा: विभाग को पिछले 6 महीनों का डेटा देना होगा कि एक आवेदन को निपटाने में औसतन कितना समय लगा।
- दस्तावेज साझा करना: विभाग को ई-फाइल रिकॉर्ड और नोट शीट्स उपलब्ध कराने को कहा गया है (तीसरे पक्ष की जानकारी को हटाकर)।
- हलफनामा: यदि फाइल मूवमेंट और नोटिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो विभाग को इस संबंध में एक औपचारिक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना होगा।
आरटीआई में क्या जानकारी मांगी गई थी?
- अपीलकर्ता ने विभाग से कई तीखे सवाल पूछे थे।
- काउंटर-स्टेटमेंट की सूचना देने में लगने वाला औसत समय।
- देरी के पीछे के विशिष्ट कारण।
- फाइल मूवमेंट का विवरण।
- क्या प्रक्रियात्मक खामियों के लिए कोई आंतरिक जांच (Internal Inquiry) की गई?
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| विवरण | विभाग / आयोग का पक्ष |
| मुख्य मुद्दा | ट्रेडमार्क विरोध मामलों में अत्यधिक देरी। |
| विभाग का बयान | निपटान के लिए कोई कानूनन समय सीमा या SOP नहीं है। |
| CIC का रुख | जवाब अधूरा है; पिछले 6 माह के निपटान का औसत समय पेश करें। |
| पारदर्शिता | विभाग को नोट शीट्स और फाइल रिकॉर्ड दिखाने होंगे। |
सुस्त प्रक्रिया पर सवाल
यह मामला भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के पंजीकरण की धीमी गति को उजागर करता है। ट्रेडमार्क आवेदन किसी भी व्यवसाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, और निश्चित समयसीमा या SOP की कमी न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठाती है, बल्कि व्यापार करने की सुगमता (Ease of doing business) को भी प्रभावित करती है। CIC का हस्तक्षेप इस दिशा में जवाबदेही तय करने का एक प्रयास है।

