Sunday, June 28, 2026
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Consenting Adults: पढ़ी-लिखी वकील महिला को अपनी भलाई का पूरा पता है…नैतिकता व अपराध अलग-अलग हैं; दुष्कर्म केस में यह फैसला पढ़ें

Consenting Adults: दिल्ली हाई कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी एक शादीशुदा जिम ट्रेनर को जमानत दे दी है।

आपसी सहमति से बने रोमांटिक संबंधों का मामला

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला आपसी सहमति से बने रोमांटिक संबंधों का प्रतीत होता है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Liberty) के मामले में ‘नैतिकता’ (Morality) को ‘अपराध’ (Offence) से अलग रखा जाना चाहिए। यह मामला एक महिला वकील (शिकायतकर्ता) और जिम ट्रेनर के बीच संबंधों से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि एक शादीशुदा और बच्चे वाले व्यक्ति को “एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर” (विवाहेतर संबंध) रखने के कारण कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए।

कोर्ट का तर्क: सहमति बनाम जबरदस्ती

  • अदालत ने शिकायतकर्ता के दावों और पेश किए गए सबूतों में कई विरोधाभास पाए।
  • दूरी और बेहोशी: महिला का आरोप था कि उसे दिलशाद गार्डन (दिल्ली) के जिम में नशीला पदार्थ पिलाकर गाजियाबाद के एक होटल ले जाया गया और वहां रेप किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि बेहोशी की हालत में कोई व्यक्ति इतनी दूर तक कैसे यात्रा कर सकता है।
  • रोमांटिक संबंध: आरोपी द्वारा पेश की गई तस्वीरों और वीडियो को देखकर कोर्ट ने कहा कि वे किसी अश्लील कृत्य के बजाय एक सामान्य रोमांटिक रिश्ते को दर्शाते हैं।
  • जागरूकता: कोर्ट ने नोट किया कि शिकायतकर्ता 30 वर्षीय एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं। वह न तो नाबालिग हैं और न ही अनपढ़, इसलिए उन्हें अपनी भलाई और कार्यों के परिणामों का पूरा ज्ञान है।

नैतिकता बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता

  • अदालत ने पुलिस की “नैतिकता” वाली दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया।
  • स्वतंत्रता का अधिकार: केवल इसलिए कि आरोपी शादीशुदा था और किसी अन्य महिला के साथ रिश्ते में था, उसे जेल में नहीं रखा जा सकता यदि अपराध (बलात्कार) साबित नहीं होता।
  • कोई झूठा वादा नहीं: महिला ने यह दावा नहीं किया था कि यह रिश्ता शादी के झूठे वादे पर आधारित था।

अन्य दलीलें खारिज

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के उस तर्क को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें दोनों पक्षों के अलग-अलग धर्मों से होने की बात उठाकर मामले को संवेनदनशील बनाने की कोशिश की गई थी। कोर्ट ने कहा कि नवंबर 2025 से जेल में बंद आरोपी को और अधिक समय तक सलाखों के पीछे रखने का कोई ठोस कारण नहीं है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का निष्कर्ष / टिप्पणी
आरोपीशादीशुदा जिम ट्रेनर।
शिकायतकर्ता30 वर्षीय महिला वकील।
मुख्य बिंदुनैतिकता को अपराध के कानूनी मापदंडों से नहीं जोड़ा जा सकता।
तथ्यसहमति से बने रोमांटिक संबंध प्रतीत होते हैं।
नतीजाआरोपी को जमानत दी गई।

कानूनी स्पष्टता

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक नैतिकता के बीच की कानूनी सीमा को स्पष्ट करता है। कोर्ट ने दोहराया है कि जब दो वयस्क (Consenting Adults) आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं, तो बाद में उसे केवल इसलिए बलात्कार में नहीं बदला जा सकता क्योंकि वह रिश्ता सामाजिक रूप से ‘अनैतिक’ लग सकता है।

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