Saturday, August 22, 2026
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Language Accessibility: केरल में लोग इंग्लिश जानते भी हैं, तो बोलना नहीं चाहते…पिता के तलाक के केस ट्रांसफर में यह बात आई सामने, पढ़ें

Language Accessibility: सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही में स्थानीय भाषा की अड़चनों और वादियों (Litigants) की व्यावहारिक दिक्कतों पर एक बेहद अहम और यथार्थवादी टिप्पणी की है।

मामले को पंजाब के लुधियाना ट्रांसफर करने की गुहार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने अपने पति द्वारा केरल में दर्ज कराए गए तलाक और बच्चे की कस्टडी (Custody) के मामले को पंजाब के लुधियाना ट्रांसफर करने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि केरल में हर कोई अंग्रेजी जानता है और वहां किसी बाहरी राज्य के व्यक्ति को केस लड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी।

अदालत रूम का संवाद: “केरल में हर कोई इंग्लिश जानता है” बनाम सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान जब भाषा का मुद्दा उठा, तो पति और पत्नी के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई।

  • पति के वकील की दलील: पति की ओर से पेश वकील अल्जो जोसेफ ने केस को पंजाब ट्रांसफर करने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि केरल में केस लड़ने में पत्नी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि “केरल में हर कोई अंग्रेजी जानता है और केरल एक लैंग्वेज-फ्रेंडली (भाषा के अनुकूल) राज्य है।”
  • जस्टिस संदीप मेहता का तीखा पलटवार: जज साहब ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा— “वहां (केरल में) बहुत मुश्किल होती है। हमें मत बताइए। भले ही वे अंग्रेजी जानते हों, लेकिन वे (अंग्रेजी में) बोलना नहीं चाहते।”
  • अदालत ने रेखांकित किया कि किसी भी राज्य में केवल साक्षरता देखकर ‘भाषा की सुगमता’ (Language Accessibility) का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। जमीनी हकीकत और अदालती कामकाज में स्थानीय भाषा (मलयालम) का प्रभाव एक बड़ा फैक्टर होता है।

क्या था पूरा पारिवारिक विवाद? (The Matrimonial Dispute)

  • शादी और विदेश यात्रा: इस जोड़े की शादी साल 2017 में हुई थी। वे 2023 तक साथ रहे और फिर यूनाइटेड किंगडम (UK) शिफ्ट हो गए।
  • रिश्ते में दरार और कानूनी लड़ाई: UK जाने के बाद दोनों का रिश्ता टूट गया। इसके बाद पति अपने नाबालिग बच्चे को लेकर भारत (केरल) लौट आया और वहां की अदालत में बच्चे की कस्टडी और तलाक के कई मुकदमे दायर कर दिए।
  • पत्नी की मजबूरी: पत्नी वर्तमान में यूके (UK) में रह रही है। भारत में उसकी तरफ से उसकी मां कोर्ट के चक्कर काट रही है। पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि केरल के इन सभी मुकदमों को पंजाब के लुधियाना ट्रांसफर किया जाए।

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कोर्ट ने क्यों दिया पंजाब केस ट्रांसफर करने का आदेश?

पति ने दलील दी कि बच्चा पिछले तीन सालों से उसके साथ केरल में रह रहा है, इसलिए मामले की सुनवाई वहीं होनी चाहिए। उसने यह भी कहा कि चूंकि पत्नी विदेश में है, इसलिए कोर्ट का फोरम बदलने से उस पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच पति के इन तर्कों से सहमत नहीं हुई और कोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया।

  • प्रभावी भागीदारी का अभाव: कोर्ट ने नोट किया कि भाषा की कठिनाइयों और अन्य व्यावहारिक बाधाओं के कारण पत्नी अब तक केरल की अदालती कार्यवाही में प्रभावी ढंग से भाग (Effective Participation) नहीं ले पाई है। पारिवारिक और कस्टडी के विवादों में दोनों पक्षों का सुना जाना बेहद जरूरी है।
  • मां को होने वाली दिक्कत: भारत में बेटी का केस लड़ रही बुजुर्ग मां के लिए केरल की स्थानीय भाषा और दूरी दोनों ही बड़ी मुसीबतें थीं।
  • अंतिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने व्यावहारिक चिंताओं और दूरी को ध्यान में रखते हुए केरल में लंबित सभी कार्यवाहियों को तुरंत लुधियाना (पंजाब) की अदालत में ट्रांसफर करने का निर्देश दे दिया।

मामले का मुख्य सारांश (Case Takeaways at a Glance)

मुख्य पहलूसुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण और आदेश
मूल विवादबच्चे की कस्टडी और तलाक का मुकदमा (केरल बनाम पंजाब)।
भाषा का मुद्दाकोर्ट ने माना कि इंग्लिश जानने के बावजूद स्थानीय स्तर पर संवाद की दिक्कतें एक कड़वी हकीकत हैं।
न्याय का सिद्धांतकेवल भौगोलिक दूरी नहीं, बल्कि भाषा की सुगमता भी न्याय पाने के अधिकार (Access to Justice) का हिस्सा है।
अंतिम निर्णयकेरल की अदालत से केस पूरी तरह लुधियाना, पंजाब ट्रांसफर कर दिया गया।

निष्कर्ष (Analysis Summary)

यह फैसला इस मायने में ऐतिहासिक है कि सुप्रीम कोर्ट ने कागजी दावों (जैसे शत-प्रतिशत साक्षरता या अंग्रेजी का ज्ञान) के बजाय अदालतों की जमीनी और व्यावहारिक हकीकत को स्वीकार किया। उत्तर भारत के किसी व्यक्ति के लिए दक्षिण भारत के राज्यों में (या इसके विपरीत) जाकर कानूनी लड़ाई लड़ना न केवल आर्थिक रूप से बल्कि भाषाई रूप से भी बेहद थकाऊ और कठिन होता है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला और भारत में उसकी पैरवी कर रही मां की इस व्यावहारिक लाचारी को समझा और ‘न्याय के हित’ में केस को पंजाब स्थानांतरित कर दिया।

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