Stray Dogs’ Bite: भारत में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के बढ़ते हमलों और काटने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।
आंकड़े चिताजनक, अकेले तामिलनाडु में दो लाख से अधिक कुत्ते काटने की घटना
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने साफ कहा कि घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसे हिंसक हो चुके जानवरों के लिए कोई जगह नहीं है। शीर्ष कोर्ट ने देश में डॉग बाइट (Dog Bite) के आंकड़ों को “Alarming” (खतरनाक) बताते हुए कहा कि यह समस्या अब पब्लिक सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है।
2026 के चौंकाने वाले आंकड़े: राज्यों की स्थिति (The Statistics)
- अदालत ने विभिन्न राज्यों से आए आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है।
- तमिल नाडु (Tamil Nadu): 4 महीने में 2.63 लाख केस: साल 2026 के शुरुआती चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) में ही राज्य में 2.63 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के मामले और 17 मौतें दर्ज की गईं। हर महीने औसतन 60,000 से 70,000 लोग कुत्तों के शिकार हो रहे हैं, जो पिछले पूरे साल के आंकड़े (6.25 लाख) का एक बड़ा हिस्सा है।
- कर्नाटक (Karnataka): 2 लाख से ज्यादा मामले: 2026 के पहले चार महीनों में 2 लाख से अधिक मामले और 25 लोगों की रेबीज (Rabies) से मौत हुई। अकेले बेंगलुरु अर्बन में सबसे ज्यादा 6 मौतें हुईं।
- कोर्ट ने नोट किया कि कर्नाटक में यह संकट तेजी से बढ़ा है—साल 2023 में जहाँ ~2.3 लाख मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 5 लाख पहुंच गई।
- दिल्ली एयरपोर्ट (IGI Airport) भी सुरक्षित नहीं: देश के सबसे व्यस्त इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल्स पर 1 जनवरी 2026 से अब तक कम से कम 31 डॉग बाइट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मार्च 2026 में यात्रियों को काटे जाने के बाद इन्हें हटाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट जैसी जगह पर ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं।
- राजस्थान और गुजरात का हाल: उदयपुर और भीलवाड़ा: उदयपुर में 2026 में अब तक 1,750 मामले आ चुके हैं, जबकि भीलवाड़ा में एक ही दिन में 42 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा। छोटे बच्चों के चेहरे और अंगों को नोचने की घटनाएं सामने आई हैं।
- सूरत (Surat): सूरत घूमने आए एक जर्मन टूरिस्ट पर भी आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं से विदेशी सैलानियों के बीच देश और नगर प्रशासन की छवि खराब होती है।
सरकारों की “लापरवाही” और “प्रशासनिक सुस्ती” पर कोर्ट की फटकार
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली की कड़े शब्दों में आलोचना की।
- 25 साल से सिर्फ कागजी ढांचा: कोर्ट ने कहा कि Animal Birth Control (ABC) फ्रेमवर्क साल 2001 से लागू है और 2023 में इसे और मजबूत किया गया। इसके बावजूद पिछले दो दशकों में सरकारों ने कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया।
- खस्ताहाल ABC सेंटर्स: नसबंदी (Sterilisation) और वैक्सीनेशन (Vaccination) के सेंटर्स बेहद कम हैं। जहाँ हैं, वहाँ न तो क्वालिफाइड स्टाफ है, न डॉक्टर और न ही आधुनिक उपकरण।
- Crisis-Driven रवैया: सरकारें पहले से तैयारी करने (Proactive approach) के बजाय तब जागती हैं जब स्थिति हाथ से निकल जाती है (Reactive response)।
संविधान का आर्टिकल 21 और ‘राइट टू लाइफ’
- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक बहुत बड़ी संवैधानिक व्यवस्था दी है। कहा, जब इंसानों की जिंदगी और सुरक्षा की तुलना किसी अन्य जीव के कल्याण (Animal Welfare) से की जाएगी, तो संवैधानिक संतुलन निश्चित रूप से और बिना किसी संदेह के इंसानी जीवन की सुरक्षा के पक्ष में झुकेगा।
- बहानेबाजी नहीं चलेगी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर्टिकल 21 (Right to Life) के तहत राज्यों का यह कर्तव्य है कि वे नागरिकों को सुरक्षित माहौल दें। सरकारें फंड की कमी, प्रशासनिक असुविधा या लॉजिस्टिक्स का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकतीं।
- ‘जंगलराज’ जैसी स्थिति नहीं बनने दे सकते: कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इन हालातों को ऐसे ही छोड़ दिया गया, तो सार्वजनिक स्थल इंसानों के रहने लायक नहीं बचेंगे और वहाँ डार्विन का सिद्धांत (Survival of the fittest – जो ताकतवर है वही जिएगा) लागू हो जाएगा।
NHAI को भी लगी फटकार: हाईवे साफ रखना आपकी जिम्मेदारी
- नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने दलील दी थी कि हाईवे से आवारा पशुओं को हटाना राज्य सरकारों का काम है।
- कोर्ट ने खारिज किया तर्क: सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सड़कों और हाईवे को सुरक्षित रखना और वहां से आवारा पशुओं के खतरे को हटाना Road Safety Obligations के तहत सीधे तौर पर NHAI की जिम्मेदारी है।
फैसले का मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
| श्रेणी | सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश / अवलोकन |
| मुख्य मुद्दा | आवारा कुत्तों का हिंसक (Feral) होना और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनना। |
| संविधान की स्थिति | एनिमल वेलफेयर जरूरी है, लेकिन वह इंसानी जान की कीमत पर नहीं हो सकता। |
| अदालती आदेश | संस्थागत परिसरों (Institutional premises) और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने के पुराने आदेशों की पुष्टि की गई। |
| सरकारों को टास्क | मुख्य सचिवों को इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी दूर करने और ABC नियमों को कड़ाई से लागू करने का निर्देश। |
निष्कर्ष (Analysis Summary)
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में पशु प्रेम (Animal Rights) और मानव सुरक्षा (Human Rights) के बीच चल रही लंबी बहस को एक स्पष्ट दिशा देता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सड़कों, पार्कों और एयरपोर्ट्स पर नागरिकों का सुरक्षित घूमना उनका मौलिक अधिकार है। अब गेंद पूरी तरह से राज्य सरकारों और नगर निगमों के पाले में है कि वे कागजी दावों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर नसबंदी और डॉग शेल्टर्स का निर्माण तेजी से करें।

