Saturday, June 27, 2026
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Tirupati Temple: राम मंदिर दान विवाद के बीच तिरुपति बालाजी मंदिर का अकाउंटिंग सिस्टम को लेकर क्या है बड़ा कदम…ICAI से क्यों किया समझौता

Tirupati Temple: देश के सबसे अमीर धार्मिक ट्रस्टों में से एक तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने अपने वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है।

Tirupati Temple: दशकों पुराने पारंपरिक अकाउंटिंग सिस्टम करें आधुनिक

अयोध्या के राम मंदिर में दान को लेकर सामने आए कथित विवादों और मीडिया रिपोर्टों के बीच, तिरुपति बालाजी मंदिर का प्रबंधन देखने वाले TTD ने अपने दशकों पुराने पारंपरिक अकाउंटिंग सिस्टम को ओवरहॉल (पूरी तरह आधुनिक) करने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से संपर्क किया है। ICAI के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी. ने इस बात की पुष्टि की है कि संस्थान ने इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू कर दिया है और इसे 100 दिनों के भीतर पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

दशकों पुराने सिस्टम की जगह लेगा आधुनिक ERP प्लेटफॉर्म

डिजिटल कायाकल्प: TTD का वर्तमान अकाउंटिंग ढांचा पिछले दो से तीन दशक पुराना है। ICAI की विशेषज्ञ शाखा ‘अकाउंटिंग रिसर्च फाउंडेशन’ (ARF) इस पूरे सिस्टम को पूरी तरह से एक आधुनिक एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है।

लीकेज (वित्तीय गड़बड़ी) पर लगेगी लगाम: वित्तीय पारदर्शिता को लेकर देश में बढ़ती सार्वजनिक संवीक्षा (Public Scrutiny) के बीच यह कदम उठाया गया है। नई प्रणाली लागू होने के बाद मंदिर में आने वाले चढ़ावे, दान और खर्चों का रियल-टाइम और सटीक हिसाब-किताब रखा जा सकेगा।

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कैश हो या चेक, फुलप्रूफ इंटरनल कंट्रोल जरूरी: ICAI

अयोध्या के राम मंदिर में कथित अनियमितताओं के दावों पर पूछे गए सवालों पर ICAI अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी. ने बेहद नपा-तुला विधिक व तकनीकी रुख अपनाया। उन्होंने कहा, हमारे पास मीडिया रिपोर्टों के अलावा इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी या ज्ञान नहीं है कि राम मंदिर में क्या हुआ। लेकिन वित्तीय प्रबंधन का एक सार्वभौमिक नियम है— संग्रह चाहे नकद (Cash) के रूप में हो, चेक के रूप में हो या बैंकिंग लेनदेन से, वहां एक फुलप्रूफ आंतरिक वित्तीय नियंत्रण तंत्र (Foolproof Internal Financial Control Mechanism) होना ही चाहिए। यदि ऐसा सिस्टम मौजूद है, तो वित्तीय लीकेज या हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं बचती।

ICAI के उपाध्यक्ष मंगेश पांडुरंग किनरे ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि संस्थान इस बात की जानकारी जुटा रहा है कि धार्मिक संस्थानों के वित्तीय अंतरालों को कैसे पूरी तरह पाटा जाए। उन्होंने कहा, हम TTD के लिए जो नया अकाउंटिंग मैनुअल (Accounting Manual) तैयार कर रहे हैं, वह भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या रिसाव को रोकने में पूरी तरह सक्षम होगा।

रेलवे और इंडिया पोस्ट के बाद अब मंदिरों की बारी

ICAI के पास बड़े पैमाने पर सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्रों के वित्तीय ढांचे को सुधारने का पुराना अनुभव है। इससे पहले संस्थान भारतीय रेलवे (Indian Railways) और इंडिया पोस्ट (India Post) के लिए भी इसी तरह के जटिल अकाउंटिंग रिफॉर्म प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है, जो इसकी विधिक और तकनीकी साख को मजबूत करता है।

प्रोजेक्ट मैट्रिक्स और मुख्य बिंदु (Project Matrix Overview)

मुख्य बिंदु / श्रेणियांTTD – ICAI वित्तीय सुधार परियोजना (2026)
संबंधित संस्थानतिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI)
परियोजना का नेतृत्वआईसीएआई की विशेषज्ञ विंग ‘अकाउंटिंग रिसर्च फाउंडेशन’ (ARF)
परियोजना की समय सीमा100 दिन (ब्लूप्रिंट और नया अकाउंटिंग मैनुअल तैयार करने के लिए)
तकनीकी बदलाव20-30 साल पुराने मैनुअल/पारंपरिक सिस्टम की जगह पूर्ण ERP डिजिटल प्लेटफॉर्म
परियोजना का मुख्य उद्देश्यदान (नकद, चेक, डिजिटल) में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाना और वित्तीय गड़बड़ी (Leakages) को शून्य करना।
भविष्य का विधिक मॉडलइस मॉडल को देश के अन्य शीर्ष मंदिरों और परोपकारी संगठनों (Philanthropic Organizations) के लिए एक मानक (Replicable Template) के रूप में पेश किया जाएगा।

Tirupati Temple: जानिए कुल अनुमानित संपत्ति ₹3 लाख करोड़ से अधिक और उसके रखरखाव के बारे में

तिरुपति बालाजी (श्री वेंकटेश्वर स्वामी) मंदिर दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक स्थलों में से एक है। इसकी कुल संपत्ति, सालाना आय और इसके रखरखाव की व्यवस्था बेहद आधुनिक और पारदर्शी है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार पूरी व्यवस्था इस प्रकार है:

तिरुपति बालाजी मंदिर की कुल संपत्ति और आय (Income & Net Worth)

मंदिर का प्रबंधन तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। टीटीडी द्वारा जारी श्वेत पत्र और वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार:

  • कुल संपत्ति (Net Worth): मंदिर की कुल अनुमानित संपत्ति ₹3 लाख करोड़ से अधिक (लगभग 30 बिलियन डॉलर) है। यह देश की कई बड़ी कंपनियों (जैसे विप्रो, नेस्ले और ओएनजीसी) के मार्केट कैप से भी ज्यादा है।
  • सालाना आय: मंदिर की सालाना आय ₹4,000 करोड़ से ₹5,000 करोड़ के बीच रहती है।
  • आय के मुख्य स्रोत:
    • हुंडी (दान-पात्र): श्रद्धालुओं द्वारा हुंडी में चढ़ाया जाने वाला नकद दान, जो प्रतिदिन औसतन ₹2 करोड़ से ₹3 करोड़ (सालाना ₹1,200 से ₹1,400 करोड़) होता है।
    • बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): विभिन्न बैंकों में मंदिर का लगभग ₹16,000 करोड़ से अधिक का कैश फिक्स डिपॉजिट है, जिससे हर साल करोड़ों रुपये का ब्याज मिलता है।
    • सोना और चांदी: मंदिर के पास बैंकों में 11,300 किलोग्राम (11.3 टन) से अधिक सोना जमा है (गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत), जिससे ब्याज के रूप में भी सोना मिलता है। इसके अलावा गर्भगृह में टन सोने-चांदी के आभूषण हैं।
    • अन्य स्रोत: दर्शन टिकट, लड्डू प्रसादम की बिक्री, और श्रद्धालुओं द्वारा दान किए जाने वाले बालों की नीलामी (जिससे सालाना ₹100-150 करोड़ की आय होती है)।

संपत्ति और रखरखाव की व्यवस्था (Asset Management & Maintenance)

इतनी बड़ी संपत्ति को सुरक्षित और पारदर्शी रखने के लिए TTD एक बेहद कड़े और आधुनिक सिस्टम का पालन करता है।

  • अकाउंटिंग सिस्टम का आधुनिकीकरण (2026): वित्तीय पारदर्शिता को और मजबूत करने और किसी भी प्रकार के लीगल व वित्तीय लीकेज को रोकने के लिए, जून 2026 में TTD ने ICAI (Institute of Chartered Accountants of India) के साथ हाथ मिलाया है। इसके तहत पूरे वित्तीय सिस्टम को आधुनिक ERP (Enterprise Resource Planning) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जा रहा है।
  • अचल संपत्ति का प्रबंधन (Real Estate): पूरे भारत में टीटीडी के पास लगभग 7,600 एकड़ से अधिक जमीन और 960 से ज्यादा संपत्तियां (इमारत, कल्याण मंडपम, धर्मशालाएं) हैं। जो संपत्तियां बहुत दूरदराज के इलाकों में हैं और जिनका रखरखाव व्यावहारिक नहीं है, उन्हें सार्वजनिक नीलामी (Public Auction) के जरिए बेचकर पैसा सीधे ‘कॉर्पस फंड’ में डाल दिया जाता है। बाकी संपत्तियों को लीज (किराए) पर देकर राजस्व कमाया जाता है।
  • कड़ा आंतरिक नियंत्रण (Internal Audit): हुंडी में आने वाले सोने, चांदी और नकद को सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में गिना जाता है। टीटीडी का पैसा किसी भी निजी या सरकारी बांड और शेयरों में निवेश नहीं किया जाता, बल्कि केवल राष्ट्रीयकृत (Nationalised) बैंकों में सुरक्षित एफडी के रूप में रखा जाता है।
  • सामाजिक कल्याण में खर्च: इस आय का एक बड़ा हिस्सा 14,000 से अधिक कर्मचारियों के वेतन, मुफ्त भोजन (अन्नाप्रसादम), शैक्षणिक संस्थानों, मुफ्त सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों के संचालन और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में खर्च होता है।
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