Drug Trafficking: पटना हाईकोर्ट ने मेडिकल और प्रतिबंधित दवाओं के अवैध व्यापार (Drug Trafficking) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत तय किया है।
Drug Trafficking के तहत कोडीन आधारित कफ सिरप बरामदगी का मामला
हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ ने ‘कुचायकोट थाना केस संख्या 316/2023’ से जुड़ी एक अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को खारिज करते हुए यह ऐतिहासिक विधिक टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि यदि किसी व्यक्ति के पास से बिना वैध लाइसेंस या प्राधिकार (Authorization) के कोडीन (Codeine) आधारित कफ सिरप बरामद होता है, तो वह इस आधार पर NDPS अधिनियम (स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985) की कड़े दंडात्मक प्रावधानों से नहीं बच सकता कि उसमें कोडीन की सांद्रता (Concentration) कुल दवा की तुलना में 2.5 प्रतिशत से कम है।
मामला क्या था? ट्रक से बरामद हुईं कफ सिरप की 3,200 बोतलें
बड़ी खेद बरामद: यह कानूनी विवाद गोपालगंज जिले के बलथरी चेक-पोस्ट से शुरू हुआ था। पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक ट्रक को रोका, जिसमें से ‘एस्कफ कोडीन सिरप’ (Eskuf Codeine Syrup) की 100-100 मिलीलीटर की 3200 बोतलें, छह लिक्विड सॉल्यूशन के कंटेनर और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। मौके से ड्राइवर को गिरफ्तार कर ट्रक जब्त कर लिया गया।
ट्रक मालिक की विधिक दलील: ट्रक के मालिक (याचिकाकर्ता) ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसके वकील ने दो मुख्य विधिक तर्क दिए— पहला, उसने केवल अपना वाहन एक ट्रांसपोर्टर को किराए पर दिया था, अपराध से उसका सीधा संबंध नहीं है। दूसरा, जब्त सिरप में कोडीन की मात्रा 2.5% से कम है, इसलिए यह एक आवश्यक दवा (Essential Drug) है और इस पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट लागू होना चाहिए, न कि कड़ा NDPS एक्ट।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: न्यूट्रल पदार्थ (Neutral Substance) का वजन भी शामिल
जस्टिस जितेंद्र कुमार ने याचिकाकर्ता के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए दोनों अधिनियमों (NDPS और ड्रग्स एक्ट) के बीच के विधिक अंतर को स्पष्ट किया।
दोनों कानूनों का अलग-अलग विधिक दायरा
अदालत ने नोट किया कि ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ चिकित्सा और उपचारात्मक (Therapeutic) उपयोग के लिए दवाओं को नियंत्रित करता है। इसके विपरीत, NDPS अधिनियम एक विशेष कानून है जिसका उद्देश्य नशीली दवाओं और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना है।
2.5% से कम कोडीन होने पर भी NDPS एक्ट प्रभावी
अदालत ने स्पष्ट किया कि कोडीन और उसके मिश्रण को ‘आवश्यक स्वापक औषधि’ (Essential Narcotic Drugs) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। NDPS नियमों के तहत इनके परिवहन, कब्जे, खरीद और बिक्री के लिए कड़े नियम हैं। वैधानिक प्रावधानों से यह साफ है कि यदि कफ सिरप में कोडीन की मात्रा 2.5% से कम भी हो, तब भी उसके कब्जे और परिवहन को विनियमित किया जाता है। इसलिए, यदि कोई बिना विधिक प्राधिकार (Authorization) के इतनी बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं रखते हुए पाया जाता है, तो उस पर केवल ड्रग्स एक्ट नहीं, बल्कि NDPS अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
‘कमर्शियल क्वांटिटी’ (व्यावसायिक मात्रा) का नियम
अदालत ने कानून की स्थापित स्थिति को दोहराते हुए कहा कि जब कोडीन के शुद्ध वजन को कफ सिरप के ‘न्यूट्रल पदार्थ’ (तरल घोल) के कुल वजन के साथ मिलाकर देखा जाएगा, तो यह पूरी जब्ती ‘कमर्शियल क्वांटिटी’ (Commercial Quantity) के दायरे में आएगी। जैसे ही मामला व्यावसायिक मात्रा का बनता है, NDPS अधिनियम की धारा 37 के कड़े नियम लागू हो जाते हैं, जिसके तहत जमानत मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से असहमति
याचिकाकर्ता ने अपनी राहत के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ‘विभोर राणा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले के फैसले पर भरोसा जताया था। पटना हाई कोर्ट ने उस फैसले को अलग करते हुए (Distinguish) कहा कि उस मामले में NDPS अधिनियम और उसके नियमों के कुछ विशिष्ट वैधानिक प्रावधानों को अदालत के संज्ञान में नहीं लाया गया था, इसलिए वह मिसाल इस मामले में लागू नहीं होती।
Drug Trafficking: केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | पटना उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (जून 2026) |
| संबंधित अदालत | पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस जितेंद्र कुमार (एकल पीठ) |
| संबंधित आपराधिक मामला | कुचायकोट (गोपालगंज) थाना केस संख्या 316/2023 |
| जब्त सामग्री | 3,200 बोतलें (Eskuf Codeine Syrup) |
| मुख्य कानूनी प्रश्न | क्या 2.5% से कम कोडीन वाले कफ सिरप के अवैध परिवहन पर NDPS एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है? |
| अदालत का विधिक स्टैंड | हाँ। बिना वैध कागजात या मेडिकल लाइसेंस के ऐसी प्रतिबंधित दवाओं को व्यावसायिक मात्रा में रखना NDPS एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है। |
| अदालत का अंतिम आदेश | याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका पूरी तरह खारिज (Rejected)। |
Bihar Prohibition and Excise Act, 2016 और Drug Trafficking
बिहार में शराबबंदी (Bihar Prohibition and Excise Act, 2016) लागू होने के बाद नशेडियों द्वारा कोडीन युक्त कफ सिरप (Codeine-based cough syrups जैसे Phensedyl, Corex, Wiscof आदि) का इस्तेमाल विकल्प के तौर पर किया जाने लगा। इस कारण कफ सिरप को लेकर कानूनी मंतव्य और पुलिसिया कार्रवाई में काफी जटिलता आ गई है। बिहार में कानूनी मंतव्य साफ है कि इलाज के उद्देश्य से कफ सिरप रखना या बेचना पूरी तरह वैध है, लेकिन बिना कागजात या व्यावसायिक स्तर पर इसकी अवैध जमाखोरी और परिवहन सीधे ‘शराब और ड्रग तस्करी’ की श्रेणी में माना जाएगा।
हाल ही में पटना हाई कोर्ट के कई फैसलों (2025-2026) ने इस विषय पर बेहद स्पष्ट और कड़ा कानूनी रुख साफ किया है। कानूनी मंतव्य को दो अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है।
राज्य सरकार और पटना हाई कोर्ट का सख्त रुख (शराबबंदी कानून के तहत)
बिहार सरकार ने 18 अक्टूबर 2016 को एक अधिसूचना (Notification No. 11) जारी की थी, जिसके तहत कोडीन युक्त सभी दवाओं और औषधीय तैयारियों को ‘नशीला पदार्थ’ (Intoxicant) घोषित किया गया था।
हाईकोर्ट की मुहर: पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस अधिसूचना की संवैधानिक वैधता को पूरी तरह सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 (Directive Principles) के तहत राज्य सरकार को लोक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ऐसे कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
शराबबंदी कानून लागू होना: यदि किसी व्यक्ति के पास से बिना वैध डॉक्टर पर्चे (Prescription) या बिना वैध ड्रग लाइसेंस के भारी मात्रा में कफ सिरप बरामद होता है, तो पुलिस उस पर बिहार उत्पाद एवं मद निषेध अधिनियम, 2016 की धारा 30(a) के तहत शराब तस्करी/रखने का मामला दर्ज करती है।
NDPS एक्ट और मात्रा की गणना (Commercial Quantity)
कफ सिरप का मामला केवल शराबबंदी तक सीमित नहीं रहता, इसमें NDPS एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) भी जुड़ जाता है क्योंकि कोडीन एक नशीला पदार्थ है।
पूरी बोतल का वजन मायने रखता है: आरोपी अक्सर अदालत में यह दलील देते हैं कि 100ml की कफ सिरप की बोतल में केवल 0.2% कोडीन फास्फेट होता है, जो कि बहुत कम (Small Quantity) है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय (Hira Singh Case) और पटना हाई कोर्ट के फैसलों के अनुसार, सजा तय करते समय केवल शुद्ध कोडीन को नहीं, बल्कि सिरप के पूरे तरल मिश्रण (मिश्रित वजन) को गिना जाएगा। इस गणना के अनुसार, यदि किसी के पास से कफ सिरप के कुछ कार्टन (व्यावसायिक मात्रा) मिलते हैं, तो वह सीधे एनडीपीएस की गंभीर धाराओं में आ जाता है, जहां जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है।
वैध कारोबारियों और मेडिकल स्टोर के लिए कानूनी सुरक्षा
कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस सख्त कानून का शिकार आम मरीज या वैध कारोबारी न बनें। यदि कोई दवा दुकान संचालक या ट्रांसपोर्टर निम्नलिखित नियमों का पालन करता है, तो वह दोषी नहीं है।
शेड्यूल-एच (Schedule-H Drug): कोडीन कफ सिरप ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ‘शेड्यूल एच’ की दवा है। इसे बेचने के लिए दवा दुकानदार के पास वैध ड्रग लाइसेंस और स्टॉक रजिस्टर होना चाहिए।
डॉक्टर का पर्चा: आम नागरिक के पास कफ सिरप होने पर वैध मेडिकल पर्चा होना चाहिए।
अदालतों की टिप्पणी: पटना हाई कोर्ट ने हालिया मामलों में यह भी टिप्पणी की है कि यदि भारी मात्रा में बरामदगी वैध कागजात (बिल और इनवॉइस) के साथ परिवहन के दौरान हुई है, तो पुलिस को केवल संदेह के आधार पर एनडीपीएस या शराबबंदी के तहत जेल भेजने के बजाय ड्रग इंस्पेक्टर के माध्यम से जांच करानी चाहिए।

