Children Campaigns: सोशल मीडिया के इस दौर में क्या राजनीतिक दलों द्वारा उन बच्चों को चुनावी अभियान का जरिया बनाया जा सकता है जो खुद अभी वोटर नहीं हैं।
नए तरीके के चुनावी हथकंडे को लेकर भारत निर्वाचन आयोग का जवाब
इस बेहद संवेदनशील और नए तरीके के चुनावी हथकंडे को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि वह इस बात की गंभीरता से जांच करेगा कि क्या राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार में बच्चों के ऐसे इस्तेमाल को रोकने के लिए नए और कड़े दिशा-निर्देशों (Guidelines) की आवश्यकता है। मद्रास हाईकोर्ट में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अर्चना पटनायक के माध्यम से दाखिल जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया के दौर में पैदा हुई यह स्थिति इसकी मांग करती है, तो बच्चों के संरक्षण के लिए उचित गाइडलाइंस बनाई जाएंगी। यह मामला हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा किए गए कथित चुनावी कदाचार के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।
याचिका का आधार: क्या है पूरा विवाद?
यह मामला वासुकी बनाम भारत निर्वाचन आयोग नामक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसे मद्रास उच्च न्यायालय की ग्रीष्मकालीन अवकाश पीठ के समक्ष दायर किया गया था।
मुख्य आरोप: याचिकाकर्ता (अधिवक्ता एल. वासुकी) ने आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान प्रमुख राजनीतिक दलों—तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) ने चुनावी नियमों का उल्लंघन किया।
बच्चों से वोट की अपील: विशेष रूप से यह आरोप लगाया गया कि जनसभाओं में बच्चों से सीधे तौर पर यह भावुक अपील की गई कि वे अपने माता-पिता, दादा-दादी और रिश्तेदारों को घर जाकर किसी विशेष दल को ही वोट देने के लिए मजबूर या प्रभावित करें। इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी सामने आए जहां बच्चे अपने परिवार पर वोट के लिए दबाव बनाते दिखे।
चुनावी रिश्वतखोरी: याचिका में बच्चों के इस्तेमाल के साथ-साथ चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर धन वितरण और मतदाताओं को लुभाने के लिए दी गई कथित रिश्वत की जांच की भी मांग की गई थी
चुनाव आयोग (ECI) का अदालत में रुख
निर्वाचन आयोग ने याचिका की विचारणीयता (Maintainability) पर कानूनी सवाल उठाए, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और चुनाव की शुचिता को लेकर कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं।
चुनाव प्रचार में बच्चों की भूमिका पर पूर्ण प्रतिबंध
आयोग ने स्पष्ट किया कि कानूनन बच्चों को किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चुनाव संबंधी गतिविधियों में शामिल नहीं किया जा सकता, चाहे वह चुनावी अधिकारियों द्वारा हो या राजनीतिक दलों द्वारा। ईसीआई ने अपने 5 फरवरी, 2024 के उस ऐतिहासिक प्रेस नोट का भी हवाला दिया, जिसमें सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बच्चों को किसी भी रूप में राजनीतिक अभियानों का हिस्सा बनाने से सख्त मना किया गया था।
सोशल मीडिया और अप्रत्यक्ष दबाव का परीक्षण
चुनाव आयोग ने कहा कि चूंकि वर्तमान याचिका में किसी सीधे तौर पर प्रचार का हिस्सा बने बच्चे का ठोस उदाहरण (Direct Instance) नहीं दिया गया है, बल्कि बच्चों द्वारा माता-पिता को प्रभावित करने की बात कही गई है, इसलिए सोशल मीडिया के इस प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। अगर जरूरत लगी, तो इसके लिए अलग से नियमावली आएगी।
वोटर वयस्क हैं, दबाव का अनुमान नहीं लगाया जा सकता
ईसीआई ने यह भी तर्क दिया कि भारतीय कानून के तहत मतदान पूरी तरह से गुप्त (Secrecy of Vote) होता है। देश के सभी मतदाता वयस्क (Adults) हैं और अपने फैसले खुद लेने में पूरी तरह सक्षम हैं। इसलिए केवल बच्चों की अपील के आधार पर यह कानूनी अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि मतदाताओं पर कोई अप्रत्यक्ष दबाव (Indirect Pressure) काम कर रहा था। आयोग ने जोड़ा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RP Act) की धारा 123 के तहत ‘अनुचित प्रभाव’ (Undue Influence) एक भ्रष्ट आचरण है, जिसकी जांच तय कानूनी दायरे में ही होती है।
तमिलनाडु चुनाव 2026: सीज़ल मैनेजमेंट और करोड़ों की बरामदगी
याचिका में पैसे बांटे जाने के आरोपों पर जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने अदालत के सामने कड़ी निगरानी के आंकड़े पेश किए। आयोग ने बताया कि धन के अवैध प्रवाह को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए थे।
कुल जब्ती (Seizure): इलेक्शन सीज़र मैनेजमेंट सिस्टम (ESMS) के सक्रिय होने के बाद, हालिया चुनाव अवधि के दौरान तमिलनाडु में कुल ₹599.24 करोड़ की भारी-भरकम राशि और प्रतिबंधित सामग्री जब्त की गई।
निगरानी टीमें: इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए राज्य भर में 2,283 फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें (FST) और 2,221 स्टेटिक सर्विलांस टीमें (SST) तैनात की गई थीं, जिन्होंने चौबीसों घंटे जांच अभियान चलाया।
कानूनी ढांचा: आयोग ने कहा कि मतदाताओं को रिश्वत देने या प्रलोभन देने के सभी मामले पहले से ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के तहत दंडनीय अपराधों की श्रेणी में आते हैं।
केस शीट: मद्रास हाईकोर्ट विधिक स्थिति
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | चुनाव आयोग की स्थिति और विधिक संदर्भ |
| संबंधित उच्च न्यायालय | मद्रास उच्च न्यायालय (vacation Bench) |
| मामले का शीर्षक | वासुकी बनाम भारत निर्वाचन आयोग |
| जवाबकर्ता अधिकारी | मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अर्चना पटनायक |
| प्रमुख राजनीतिक दल (आरोपी) | TVK, DMK, AIADMK |
| तमिलनाडु चुनाव 2026 में कुल जब्ती | ₹599.24 करोड़ (2,283 फ्लाइंग स्क्वॉड और 2,221 स्टेटिक सर्विलांस टीमों द्वारा) |
| लागु कानूनी धाराएं | जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (धारा 123) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) |
| ECI का मुख्य आश्वासन | सोशल मीडिया के दौर में बच्चों द्वारा माता-पिता को प्रभावित करने की रणनीति का परीक्षण कर नई गाइडलाइंस बनाने पर विचार किया जाएगा। |

