Saturday, July 11, 2026
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Contempt of Court: दिल्ली-NCR में अवैध निर्माण और आगजनी… लगता है सरकार सिर्फ चेहरा बचाने की कवायद कर रही है, पढ़ें तल्ख टिप्पणी

Contempt of Court: दिल्ली-एनसीआर में जानलेवा अवैध निर्माणों और हाल ही में हुए भीषण अग्निकांडों पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा फूट पड़ा है।

नियम-कानूनों को सरेआम ताक पर रखकर प्रतिबंधित इलाकों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए. अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और गुरुग्राम प्रशासन की जमकर क्लास लगाई। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाकों में अवैध निर्माण की जांच के लिए IIT के प्रोफेसरों की एक स्वतंत्र टीम का गठन कर दिया है और वरिष्ठ अधिकारियों को 4 अगस्त, 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है। अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर नगर निगमों द्वारा केवल ‘चेहरा बचाने की कवायद’ (Face-saving exercises) की जा रही है। ज़मीन पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है। नियम-कानूनों को सरेआम ताक पर रखकर प्रतिबंधित इलाकों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं और बाद में उनका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर अदालती आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो हम जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही (Contempt of Court) शुरू करने में एक सेकंड भी नहीं हिचकेंगे।

मामला क्या है?: सैदुलाजाब हादसा, आग की घटनाएं और ढुलमुल तंत्र

यह पूरा मामला दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रहे हादसों और अदालती आदेशों की नाफरमानी से जुड़ा है।

सैदुलाजाब इमारत हादसा (30 मई, 2026): दक्षिण दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में एक अवैध रूप से बन रही बहुमंजिला इमारत भरभराकर गिर गई थी, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई और 14 घायल हुए थे। कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae – अदालत के मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने स्टेटस रिपोर्ट में एमसीडी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि निगम ने इस अवैध निर्माण को समय पर रोकने में पूरी तरह कोताही बरती।

अग्निकांडों की झड़ी: रिपोर्ट में 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर और 22 जून को लखनऊ में लगी भीषण आग का भी हवाला दिया गया। कोर्ट ने माना कि ये हादसे किसी एक लापरवाही का नतीजा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सामूहिक विफलता हैं।

गुरुग्राम का डरावना सच: हालिया ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम के 90% से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान फायर सेफ्टी (अग्निशमन सुरक्षा) ऑडिट में फेल पाए गए हैं, जो एक बड़े टाइम-बम की तरह है।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा एक्शन: IIT की टीम करेगी साकेत और लाजपत नगर की जांच

अदालत ने एमसीडी के दावों पर अविश्वास जताते हुए जांच की कमान सीधे विशेषज्ञों के हाथ में सौंप दी है।

स्वतंत्र एक्सपर्ट टीम का गठन

पीठ ने आदेश दिया है कि दो वरिष्ठ IIT प्रोफेसरों, दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई जाए। यह टीम दक्षिण दिल्ली के तीन प्रमुख इलाकों साकेत, लाजपत नगर और मालवीय नगर का दौरा करेगी और वहां हुए बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों का आकलन कर सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। कोर्ट ने साफ कहा कि इस रिपोर्ट में किसी भी तरह की ढिलाई या बेईमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

देशव्यापी जांच के पुराने आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि उसने 25 मार्च, 2026 को ही देश भर के नगर निगमों को आदेश दिया था कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक जांच करें और उन इलाकों की पहचान करें जो सिर्फ रहने (Residential) के लिए तय थे, लेकिन वहां धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां (Commercial misuse) चल रही हैं।

अधिकारियों को सख्त अल्टीमेटम

अदालत की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.डी. संजय और एमसीडी के वकील गोविंद जी के समक्ष निगमों की कार्यशैली पर गहरी चिंता जताई गई।

व्यक्तिगत पेशी: 4 अगस्त, 2026 की अगली सुनवाई पर एमसीडी के आला अधिकारियों के साथ-साथ गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के उपाध्यक्ष को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा। जीएमडीए उपाध्यक्ष को यह बताना होगा कि 90% इमारतों के फायर सेफ्टी में फेल होने के बाद उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।

अवमानना की चेतावनी: जस्टिस अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि 2024 और विशेषकर 20 मई, 2026 के विशिष्ट आदेशों का पालन न करके अधिकारियों ने लक्ष्मण रेखा पार की है। अब सीधे जेल भेजने की कार्रवाई होगी।

केस शीट: दिल्ली-एनसीआर अवैध निर्माण समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्चतम न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्देश
संबंधित अदालतउच्चतम न्यायालय ( must / Supreme Court of India)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस ए. अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन
जांच के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरीवरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा
जांच के दायरे में आए क्षेत्रसाकेत, लाजपत नगर, मालवीय नगर (दिल्ली) और पूरा गुरुग्राम (हरियाणा)
गठित की गई विशेष टीम2 वरिष्ठ IIT प्रोफेसर + 2 ड्राफ्ट्समैन + MCD अधिकारी
अगली सुनवाई और कड़ा निर्देश4 अगस्त, 2026; वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश।
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